तर्ज: अंबै तू है जगदम्बे काली
दोहा: त्रिलोक के स्वामी हैं शंकर भोले नाथ।
अपने भक्तो के सदा शम्भू रहते हैं साथ।।
कालो के भी काल हैं महाकालेश्वर नाथ।
इनके दर्शन से हो काल सर्पयोग नाश
मु: शंकर भोले भंडारी, संग में गौरा महतारी।
गोदी में तेरी गणपति लाल है
ओ भोले बाबा चंदा विराजै तेरे भाल पे।
अ १: कानो में कुण्डल सोहे, शीश पै गंगा माता।
ओढ़ के मृग छाला बैठा है, गल मुंडो की माला।
कर में त्रिशूल बिराजे, भस्मी है अंग में साजे।
डम डम तेरा डमरू बाजे
मि: अंग पे लिपटे तेरे ब्याल है।
ओ भोले बाबा चंदा विराजै तेरे भाल पे।
अ २: भांग चढ़ा कर बाबा तुम, राम राम जपते हो।
जोगी का भेष है तुम्हारा कैलाश पर वस्ते हो।
नंदी की करो सवारी, छवि सबसे है प्यारी, तीन लोक में महिमा भारी
मि: तू तो कालो का भी बाबा काल है। (घबराता तुमसे काल है)
ओ भोले बाबा चंदा विराजै तेरे भाल पे।
अ ३: तुम तो हो बाबा बड़े दयालु, जपते ऋषि मुनि ज्ञानी।
सेवें हैं देव, असुर तुमको ही, सृष्टि के सब प्राणी।।
गुण गावै, तुम्हे रिझावै, लीला का पार न पावें।
मि: ओ बाबा भक्तों को करते निहाल है
ओ भोले बाबा चंदा विराजै तेरे भाल पे।
अ ४: राक्षस सब तुमने ही संघारे, ओ शिव शंकर भोले।
देवो को भय मुक्त कर दिया सब जय जयकार हैं बोले।।
गंगा धरा पर लाये, भागीरथ के मन भाये, पूर्वज है स्वर्ग पठाये,
मि: भागीरथी हो गयी गंगा, रखो भक्तों का ख्याल है।
ओ भोले बाबा चंदा विराजै तेरे भाल पे।।
अ ५: तेरी शरण में आये हम सब, ओ शंकर त्रिपुरारी
महिमा तेरी जग जानत है, ओभोले भंडारी
नन्दो नित ध्यावे, राकेश भजन सुनावै, चरणों में सब शीश झुकावें
मि: दर्शन दो गुरु रूप में, छुड़वा दो माया जाल है।
ओ भोले बाबा चंदा विराजै तेरे भाल पे।।