कविता

भजन: शिव बारह ज्योतिर्लिंग महिमा

दोहा : गुरुर ब्रह्मा, गुरुर विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा,
गुरु साक्षात् परम ब्रह्म, तसमई श्री गुरुवे नमः।

दोहा : शिवोहम तत्व ही है, इस सृष्टि का आधार,
शिव को पाने हम चलें, शिव भोले के द्वार।

मु: चलो रे -२, शिव शंकर के द्वारे -२
भोले बिगड़े काज सँवारे,
भोले सब के कारज सारे |

अंत १; सौराष्ट्र सोमनाथ जी जाओ,
श्री शैलेश, मलिकार्जुन धाओ।
मि: उज्जैन में महाकालेश्वर,
सारे पाप उतारे (खुल जाये मोक्ष के द्वारे )
चलो रे -२, शिव शंकर के द्वारे -२

अंत २: ओम्कारेश्वर त्रिम्भकेश्वर जायेंगे,
भीमशंकर जी के दर्शन पाएंगे।
सेतुबंध रामेश्वर जी,
जो रामजी ने हैं पधार।
चलो रे -२, शिव शंकर के द्वारे -२

अंत ३: दारुकवन में नागेश्वर बिराजे।
काया के कष्ट सब दूर भगावें।
बैद्यनाथ जी देंगे तुमको
रोगो से छुटकारे।
चलो रे -२, शिव शंकर के द्वारे -२

अंत ४: कशी जी की महिमा है भारी।
शिवशंकर ने त्रिशूल पर है धारी।
(तीनो लोको में सबसे न्यारी )
विश्वनाथ जी के दर्शन पा कर
मुक्ति के खुल जाएं द्वारे।
काल भैरव जी के दर्शन से
भूत बाधा निस्तारऐ।
चलो रे -२, शिव शंकर के द्वारे -२

अंत ५: केदार नाथ धुष्णेश जी के दर्शन
पशुपति नाथ मिटावें अड़चन।
सात जन्मो के पाप हरें,
(पितृ दोष भी सबके हरें)
नन्दो बोले जैकारे
(हम सब बोले जैकारे )
काल सर्प योग विनशे,
जो शिव नाम पुकारे।
भवसागर से तारे,
राकेश नित्य पुकारे
चलो रे -२, शिव शंकर के द्वारे -२