लेख

भीम का पुत्र “घटोत्कच” एक अर्ध-राक्षस

शिवानन्द मिश्रा

 वह दूसरों की तरह “युद्ध” के मैदान में योद्धा नहीं था। उसने कर्ण को अपने मुख्य हथियार (शक्ति) का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जिसे कर्ण ने अर्जुन के लिए संरक्षित किया था। शक्ति को नष्ट करने और अर्जुन को बचाने के लिए कुरुक्षेत्र युद्ध में घटोत्कच की ही उपयोगिता थी।

उसी तरह अभिमन्यु एक अर्ध-प्रशिक्षित योद्धा था। श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में नियम तोड़ने के लिए उनका इस्तेमाल किया था।

आप वर्दी में सैनिक हैं या बिना वर्दी के, धर्मयुद्ध में सभी की भूमिका है। एक व्यक्ति घर के दरवाज़े पर बहुत महँगा पर्दा लगाकर रखते थे। अंदर सब खोखला था लेकिन परदा बहुत महँगा था। मोहल्ले के लोग समझते कि व्यक्ति बहुत धनी व्यक्ति हैं। एक पठान से क़र्ज़ लिया हुआ था। पठान अक्सर आता व पैसे वापिस माँगता। वे व्यक्ति दे न पाते। कई बार ऐसा होने के बाद एक दिन पठान बहुत चिल्लाया, और चिल्लाते हुए बोला कि पैसे लौटाते नहीं हो और पर्दा इतना महँगा टांगा हुआ है ?? मैं इसी को ले जाता हूँ ! और एक क्षण का भी समय दिए बिना परदा खींच लेता है।

पूरा मोहल्ला इकट्ठा था। लोग देखते हैं कि आँगन में व्यक्ति के परिवार की महिलायें अत्यधिक फटे पुराने कपड़ों में एकत्र होकर पठान की गालियाँ सुन रही थीं।

जो भी दृश्य दिखा, अत्यधिक दरिद्रता का था। पठान को भी इतनी ग्लानि हुई कि पर्दा वहीं छोड़कर चला गया लेकिन उस व्यक्ति ने भी परदा वापिस टांगा नहीं क्यूँकि कुछ छुपाने को बचा ही नहीं था अब। पोषित मीडिया द्वारा पाकिस्तान के न्यूक्लियर अटैक का डर हमें इसीलिए दिखाया जाता रहा ताकि हम कभी आतंक के विरुद्ध कोई कार्रवाई न कर सकें क्योंकि कार्रवाई करने से भारत में वोट बैंक वाले लोग नाराज़ होकर फिर वोट नहीं देते। 

न्यूक्लियर अटैक कोई गिल्ली डंडे का खेल नहीं है। प्रथम तो भारत ही पाकिस्तान को मिटा देगा। दूसरे, पश्चिमी देशों में ये सब वारगेम हो चुके हैं कि 

1. पाकिस्तान ने भारत पर न्यूक्लियर अटैक किया तो या

2. ईरान ने इजरायल पर न्यूक्लियर अटैक किया तो पूरी दुनिया से तुरंत माफ़िया गैंग का नामोनिशान मिटा देना है। रैबीज के वाइरस कैरी करना अलग बात है, रैबीज का अटैक हो चुके कुत्ते को सीधे गोली मारी जाती है। 

ना पश्चिम के वामी कुछ कर पाएँगे, न मानवाधिकार वाले, न मीडिया, ना घिग्घी बंधे लोग। तो मोदी ने दो सर्जिकल स्ट्राइक करके 

व्यक्ति के दरवाज़े से परदा खींच दिया है। 

अंदर की पूरी दरिद्रता, पूरा खोखलापन सामने है। ब्लैक आउट किए बैठे हैं व्यक्ति, सो नही पा रहे हैं, पता है कि कुछ भी किया तो ये मोदी है, फिर ठोकेगा।

गाँव में बुज़ुर्ग कहते थे कि किसी बात को अधिक लम्बा कभी मत खींचो। उस व्यक्ति ने एक रोज़ धमकी दी-न्यूक्लियर अटैक कर दूँगा। मोदी ने परदा झटक कर फेंका और बोला, “आ, कर के दिखा।”

हर वीरगति प्राप्त हुए सैनिक या नागरिक पर छाती पीटने वालों को पॉपकॉर्न की तरह व्यवहार करने के बजाय महाभारत और गीता का अध्ययन करना चाहिए।

हम धर्म युद्ध में हैं। यदि आप भावनात्मक रूप से कमजोर हैं तो घर पर रहें और अपना मुंह बंद रखें, और उन लोगों का मनोबल न गिराएं जो आपकी लड़ाई लड़ रहे हैं।

शिवानन्द मिश्रा