डॉ. सतीश कुमार

किताबें
ज्ञान ,समझ देती हैं
अच्छे बुरे ,सत्य असत्य में
फर्क करने की ।
किताबें
राह दिखाती हैं
सत् पथ पर चलने की ।
किताबें
बन्दूक, गोली, तलवार, तोप
तीर कमान नहीं हैं
पर, इन सब को चलाने का
सही तरीका सीखाती हैं ।
किताबें
क्या है, क्या होना चाहिए,
कैसे करना, बतलाती हैं ।
किताबों के काले शब्द
क्रांति के,व्यवस्था परिवर्तन के
वो हथियार हैं जो कभी
असफल नही होते ।
इसी लिए हम
किताबों की इज्जत करते हैं
उन्हें सिर माथे रखते हैं
उनकी पूजा करते हैं ।
शायद हम विरोध करने के
अति उत्साह में भूल गये
कि किताब के जमीन पर गिर जाने
अथवा पैर से छू जाने पर
सिहर उठते हैं।
क्षमा माँगते हैं ।
जिन किताबों ने हमें
अपने हकों के लिए लड़ना सीखाया
हिम्मत दी विपरीत परिस्थितियों में
लड़ने की।
सामने वाले की आँखों में आँखें
डाल कर बात करने की ।
आज हमने उनके साथ क्या किया
उन्हें वो इज्जत दी
जिसकी वे हकदार हैं ।
हम किताबों के पूजारी
किताबों को ही सड़कों पर बिखेरेंगे
किताबों की जिन्दगी में
यह दिन भी आएगा ।
किताबों ने कभी ऐसा तो
नहीं सोचा होगा ।….

  - डॉ. सतीश कुमार

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