धर्म-अध्यात्म धर्म सत्कर्तव्यों के ज्ञान व पालन और असत् कर्मों के त्याग को कहते हैं January 2, 2021 / January 2, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यधर्म के विषय में तरह तरह की बातें की जाती हैं परन्तु धर्म सत्याचरण वा सत्य कर्तव्यों के धारण व पालन का नाम है। यह विचार व सिद्धान्त हमें वेदाध्ययन करने पर प्राप्त होते हंै। महाराज मनु ने कहा है कि धर्म की जिज्ञासा होने पर उनका वेदों से जो उत्तर व समाधान […] Read more » Religion is called knowledge and observance of truth and renunciation of untoward deeds. धर्म
धर्म-अध्यात्म मनुष्य जीवन व उसके लक्ष्य पर विचार December 31, 2020 / December 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमारा यह जन्म मनुष्य योनि मे हुआ था और हम अपनी जीवन यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। हमें पता है कि कालान्तर में हमारी मृत्यु होगी। ऐसा इसलिये कि सृष्टि के आरम्भ से आज तक सृष्टि में यह नियम चल रहा है कि जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु अवश्य ही होती है। गीता […] Read more » Thoughts on human life and its goals मनुष्य जीवन व उसके लक्ष्य
धर्म-अध्यात्म जिस प्रयोजन के लिये परमात्मा ने जीवन दिया है उसे करना ही धर्म एवं कर्तव्य है December 27, 2020 / December 27, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य जन्म लेता है परन्तु उसे यह पता नहीं होता कि उसके जन्म लेने व परमात्मा के जन्म देने का प्रयोजन किया है? जन्म के प्रयोजन का ज्ञान हमें वेदों सहित ऋषियों के दर्शन व उपनिषद आदि ग्रन्थों सहित ऋषि दयानन्द के सत्यार्थप्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका एवं आर्य विद्वानों के ग्रन्थों से होता है। निष्कर्ष […] Read more » Religion and duty are to do the purpose for which God has given life परमात्मा
धर्म-अध्यात्म सत्यार्थप्रकाश ग्रंथ अविद्या दूर करने के लिये लिखा गया ग्रंथ है December 27, 2020 / December 27, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द सरस्वती जी का सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ देश देशान्तर में प्रसिद्ध ग्रन्थ है। ऋषि दयानन्द ने इस ग्रन्थ को क्यों लिखा? इसका उत्तर उन्होंने स्वयं इस ग्रन्थ की भूमिका में दिया है। उन्होंने लिखा है कि ‘मेरा इस ग्रन्थ के बनाने का मुख्य प्रयोजन सत्य–सत्य अर्थ का प्रकाश करना है, अर्थात् […] Read more » satyarth prakash Satyarth Prakash Granth is a book written to remove ignorance सत्यार्थप्रकाश ग्रंथ
धर्म-अध्यात्म संसार को ईश्वर की सत्ता का परिचय सर्वप्रथम वेदों से मिला है December 26, 2020 / December 26, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह संसार 1.96 अरब वर्षों से अधिक समय पूर्व बना था। तब से यह जीवों के आवागमन व ग्रहों व उपग्रहों के नियमपूर्वक गतिमान होने से चल रहा है। सृष्टि में प्रथम मनुष्य वा स्त्री पुरुष अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न हुए थे। सभी मनुष्यों सहित आंखों से दृश्य व अदृश्य […] Read more » The Vedas were first introduced to the world by the power of God. ईश्वर की सत्ता
धर्म-अध्यात्म स्वामी श्रद्धानन्द के साहित्य पर उनके बलिदान दिवस पर विशेष छूट एवं उपहार December 26, 2020 / December 26, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, हितकारी प्रकाशन समिति, हिण्डोन सिटी-राजस्थान आर्यजगत की एक प्रमुख साहित्य-प्रकाशक संस्था है। इस संस्थान का संचालन प्रसिद्ध ऋषिभक्त श्री प्रभाकरदेव आर्य जी करते हैं। इस संस्था का इतिहास लगभग तीन दशकों का है। इस अवधि में संस्था ने लगभग 350 छोटे-बड़े ग्रन्थों का प्रकाशन किया है। वर्तमान में लगभग 200 से […] Read more » स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म यम नियमों का पालन किये बिना भक्ति व उससे लाभ होना असम्भव December 24, 2020 / December 24, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य ईश्वर का बनाया हुआ एक चेतन प्राणी है जिसके पास पांच ज्ञान एवं पांच कर्म इन्द्रियों से युक्त मानव शरीर है। शरीर में मन, बुद्धि, चित्त व अहंकार नाम वाला अन्तःकरण चतुष्टय भी होता है। बुद्धि का कार्य ज्ञान प्राप्ति व उस ज्ञान का उपयोग करने में सहायक होना होता है। बुद्धि […] Read more » It is impossible to gain devotion and benefit from following Yama rules ईश्वर
धर्म-अध्यात्म मनुष्य का आत्मा ही ईश्वर प्राप्ति व प्रार्थनाओं की पूर्ति का धाम है December 23, 2020 / December 23, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य की अपनी अपनी आवश्यकतायें एवं इच्छायें हुआ करती हैं। वह उनकी पूर्ति के लिये प्रयत्न भी करते हैं। मनुष्य जिस सामाजिक वातावरण में रहता है वहां उसे अपने बड़ों से जो शिक्षा मिलती है उसमें उसकी स्वाभाविक प्रवृत्ति हो जाती है। वह बिना छानबीन व विवेक से उन्हें स्वीकार कर लेता है। […] Read more » ईश्वर प्राप्ति
धर्म-अध्यात्म ईश्वर में आस्था सत्य व ज्ञान से युक्त होने पर ही सार्थक होती है December 22, 2020 / December 22, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम एक बहु प्रचारित विचार को पढ़ रहे थे जिसमें कहा गया है ‘ईश्वर में आस्था है तो मुश्किलों में भी रास्ता है।’ हमें यह विचार अच्छा लगा परन्तु यह अपने आप में पूर्ण न होकर अपूर्ण विचार है। इसको यदि ठीक से समझा नहीं गया तो इससे लाभ के साथ कभी कभी […] Read more »
धर्म-अध्यात्म पृथिवी आदि लोकों का आकाश में भ्रमण का सिद्धान्त वेदों की देन है December 20, 2020 / December 20, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द ने ईश्वर प्रदत्त ज्ञान चार वेदों की भूमिका स्वरूप जिस ग्रन्थ का निर्माण किया है उसका नाम है ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’। इस ग्रन्थ में ऋषि दयानन्द जी ने चार वेदों के मन्त्रों के प्रमाणों से अनेक ज्ञान विज्ञ़़ान से युक्त विषयों को प्रस्तुत किया है। सृष्टि विद्या विषय भी इस ग्रन्थ […] Read more » आकाश में भ्रमण का सिद्धान्त
धर्म-अध्यात्म ईश्वर एक सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक तथा सर्वान्तर्यामी सत्ता है December 18, 2020 / December 18, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह संसार एक सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, अनादि, नित्य तथा सर्वशक्तिमान सत्ता से बना है। ईश्वर में अनन्त गुण हैं। उन्हीं गुणों में उसका सत्य, चित्त व आनन्द गुण सहित सर्वव्यापक तथा सर्वान्र्यामी होना भी सम्मिलित है। अनादि व नित्य होने से वह काल से परे है। उसका आरम्भ व अन्त नहीं […] Read more » God is a true universal and omnipotent entity ईश्वर
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने वेदोद्धार सहित अन्धविश्वास एवं कुरीतियों को दूर किया था December 17, 2020 / December 17, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य प्रकाश करने की आवश्यकता वहां होती है जहां अन्धकार होता है। जहां प्रकाश होता है वहां दीपक जलाने वा प्रकाश करने की आवश्यकता नहीं होती। हम महाभारत काल के उत्तरकालीन समाज पर दृष्टि डालते हैं तो हम देखते हैं कि हमारा समाज अनेक अज्ञान व अविद्यायुक्त मान्यताओं के प्रचलन से ग्रस्त […] Read more » Rishi Dayanand had overcome superstition and evil practices including Vedodhar. अन्धविश्वास एवं कुरीतियों को दूर