बाल कविता : दुश्मन को कभी मित्र  न मानो

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मिली कही तुलसी की माला,

लेकर उसे गले में डाला।

तन पर अपने राख लगाई,

बैरागी सा रूप बनाया।

बिल्ली चली प्रयाग नहाने,

चूहो से बोली,ए प्यारो,

मैने किए हजारों पाप,

तुमको दिए कितने संताप,

कर उन सब पापो का ख्याल,

मैने छोड़ा ये जग जंगाल,

अब जाती हूं तीर्थ करने,

राम राम रट कर मरने।

चूहो न किया सोच विचार,

सत्तू बांध हुए वे तैयार,

ज्योहि बिल्ली पहुंची पुल के पास,

बिल्ली करने लगी उनका नाश।

ले ले उनको खूब चबाने,

दोनो कूल्हे लगी मटकाने।

दुश्मन को कभी मित्र न मानो,

उसका कहा कभी मत मानो।।

आर के रस्तोगी 

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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