अब संचार के क्षेत्र में भारत को घेरने लगा है चीन

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समन्वय नंद

chinaस्वामी विवेकानंद सार्ध शती कार्यक्रम पूरे देश में मनाया जा रहा है । इस अवसर पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किय़ा जा रहा है। स्वामी विवेकानंद एक भविष्यद्रष्टा थे । उन्होंने जो भविष्यवाणी की थी वह बाद में चल कर सत्य प्रमाणित हुए हैं । इसलिए उनके वाणी को याद करने का यह सही समय है । स्वामी विवेकानंद ने चीन के बारे में कहा था कि चीन सोया हुआ राक्षस है । उसे मत जगाओ । चीन जग जाने से से सभी को परेशान करेगा । स्वामी विवेकानंदन का य़ह कथन सत्य प्रमाणित हुआ है ।

चीनी राक्षस जब निद्रा से जगा तो उसने अपने पडोसियों पर हमला कर उन पर कब्जा जमाना प्रारंभ कर दिया। मंगोलिया,मंचुरिया के बाद उसने तिब्बत को पूरी तरह निगल लिया। 1962 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु व वामपंथी नेता जब हिन्दी- चीनी भाई भाई के नारे लगाने में व्यस्त थे, तब चीन ने भारत पर हमला कर दिया। अभी भी हजारों बर्ग मील भारतीय भूमि चीनी कब्जे में है । 14 नवंबर, 1962 को भारतीय संसद ने चीनी कब्जे से प्रत्येक इंच जमीन छुडाने के लिए एक संकल्प प्रस्ताव पारित किया था । लेकिन यह दुर्भाग्य का विषय है कि इस घटना को 50 साल बीत जाने के बाद भी चीनी कब्जे से देश की जमीन छुडाने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं हुए हैं ।

इसके बाद भी चीन ने अपने रबैये में किसी प्रकार का बदलाव किया हो, ऐसा भी नहीं लग रहा है । चीन का भारत विरोधी रुख बदस्तुर जारी है। कभी चीन सिकिम पर दावा जता रहा है तो कभी अरुणाचल प्रदेश पर । कभी चीन अरुणाचल प्रदेश के अधिकारियों को वीजा देने से इंकार कर रहा है तो कभी भारतीय प्रधानमंत्री की तवांग यात्रा का विरोध करता है । इस कारण स्वामी विवेकानंद की भाषा में चीन का सोया हुआ राक्षस अपना असली रुप दिखा रहा है।

चीन धीरे धीरे भारत की घेराबंदी में जुटा है। पाकिस्तान के साथ उसकी मित्रता सर्वविदित है। सामरिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत के खिलाफ पाकिस्तान को सामरिक रुप से शक्तिशाली बनाने में चीन की सर्वाधिक भूमिका रही है। नेपाल में माओवादियों के शक्तिशाली होने के बाद वहां भी चीन भारत विरोधी वातावरण तैयार करने में लगा है। नेपाल के बाद अब चीन श्रीलंका पर भी डोरे डालना शुरु कर दिया है और श्रीलंका को सहायता प्रदान करना प्रारंभ कर दिया है । मालदीव में भी वह अपनी घुसपैठ करने में सफल होता दिख रहा है जोकि भारत के लिए चिंता का विषय है ।

अब एक चिंताजनक बात सामने आय़ी है । चीन भारत के पडोसी देशों के साथ समझौता कर संचार के क्षेत्र में भारत की घेराबंदी करने की योजना पर कार्य कर रहा है । देश की खुफिया एजेसी रिसर्च एंड एनलिसिस विंग से इस संबंधी जानकारी मिलने के के बाद केन्द्रीय संचार मंत्रालय व सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हो गई है ।

अभी हाल ही में भारतीय़ खुफिय़ा एजेंसी द्वारा दिये गय़े रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र में विशेष कर भारत के पडोसी देशो में चीन टेलीकम व अन्य संचार के क्षेत्र में चीन अपनी भागिदारी बढाने में लगा है। इस कारण इस इलाके में टेलिकम व इंटरनेट के क्षेत्र में भारत की संप्रभुता प्रभावित होने की आशंका है ।

भारतीय खुफिया एजेंसी से रिपोर्ट मिलने के बाद केन्द्रीय संचार मंत्रालय चौकन्ना हो गई है । संचार मंत्रालय अब चाहती है कि विदेश मंत्रालय इस संबंध में उन पडोसी देशों से बात करे । अगर आवश्यक होता है तो उन देशों को आवश्यकीय आर्थिक सहायता व तकनीकी सहायता प्रदान किया जाए ।

भारतीय खुफिया एजेंसी द्वारा दिये गये रिपोर्ट में कहा गया है कि मालदीव के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में अपने देश में सूचना प्रौद्यगिकी आधारभूत संरचना के विकास के लिए चीन से मदद की गुहार लगायी है । इसके अलावा चीन की टेलीकम कंपनी हुवाई के साथ मालदीव सरकार ने इस संबंध में एक समझौता भी किया है ।

भारतीय खुफिया एजेंसी ने सरकार को दिये रिपोर्ट में कहा है कि नेपाल के साथ भी चीन इसी तरह का प्रयास प्रारंभ किया है । नेपाल में चीनी कंपनी हुवाई व जेडटीई, नेपाल में नेक्सट जेनरशन नेटवर्क तैयार करने में लगी हुई है। भारतीय खुफिया एजेंसी के पास जो जानकारी है उसके अनुसार हुवाई व जेडटीई का चीन की सेना के साथ गहरे संबंध हैं । इससे पूर्व भारतीय़ खुफिया एजेंसी ने कहा था कि चीन के जेडटीई कंपनी को नेपाल में एक हाइटेक डाटा सेंटर तैयार करने का ठेका प्राप्त हुआ है। यह भारत की सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। रिसर्च एंड एनलिसिस विंग का कहना है कि चीन द्वारा भारत के पडोसी देशों के साथ इस तरह के संचार नेटवर्क तैयार करने से भारत की सुरक्षा पर आगामी दिनों संकट आ सकते हैं। इसलिए इसका प्रतिकार किये जाने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर पडोसी देशों से बातचीत करने के लिए सलाह दी गई है ।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल व मालदीव में चीनी कंपनियों द्वारा संचार नेटवर्क तैयार करने से आगामी दिनों में चीन इन देशों को प्रभावित कर इनका उपयोग वह भारत के खिलाफ कर सकता है । इससे देश की सुरक्षा खतरे में पड सकती है ।

सामरिक दृष्टि भारत को घेरने के बाद अब चीन भारत को अन्य मोर्चों पर भी घेरने में लग गया है । संचार व्य़वस्था रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है । इसे लेकर भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है। चीन ने अब भारत के उन पडोसियों को निशाना बनाना शुरु किया है जो भारत के अत्यंत घनिष्ठ देश हैं । इसे भारत की कूटनीति की विफलता कहनी चाहिए । चीन के इन नये मोर्चे पर घेराबंदी को लेकर भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है। साउथ ब्लाक में एक चीन समर्थक लाबी है । इन चीन समर्थक लाबी की पहले शिनाख्त करनी होगी तथा इसके बाद इन्हें हटाया जाने के साथ साथ चीन के इस रणनीति को विफल बनाने के दिशा में कार्य करना चाहिए ।

2 COMMENTS

  1. स्वामी विवेकानंद जी ने चीन को एक सोया राक्षस कहते हुए उससे सावधान रहने को कहा था। किन्तु, ऐसा लगता है कि वे भारत और भारतीयों को जानते हुए भी कुम्भकर्ण नहीं कहना चाहते थे।

  2. चीन ने मोबाइल के विस्तार के साथ अपने बाजार का लाभ उठाते हुए मोबाइल संचार उपकरण बनाने में तरक्की की. हवावेई, जेडटीई ने मोबाइल उपकरण भी बनाए. अब उनकी तरक्की के लिए चीन पर दोष लगाना कहाँ तक उचित है. मैंने ३० सेप्टेम्बर २००८ को अपने ब्लॉग पर इस सम्बन्ध में लिखा था “भारत मे करोडो. मोबाइल उपभोक्ता है, लेकिन एक भी कम्पनी स्वदेशी मोबाइल सेट या उपकरण नही बनाती है। जबकी चीन की जेडटीइ ओर हुवावैइ से माल लेकर रिलायन्स ओर टाटा वाले ठप्पा भर लगते है ।” कास हम समय रहते अपनी नीतियों में परिवर्तन कर पाते. https://himwant.blogspot.com/2008/09/blog-post_30.html

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