लेखक परिचय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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चीटी मेरी बेस्ट फ्रेंड है.
बी ए.पास बी एड.ट्रेंड है|

हर दिन लाँग ड्राइव पर जाती.
अपने खुद को खुद ही चलाती|
शक्कर गुड जैसे भोजन को.
अपने सिर पर रख ले आती|
करती है दिन रात परिश्रम.
नहीं काम का कभी एंड है|

चलती है तो चलती जाती.
बिना रुके ही बढ़ती जाती|
थकने का तो नाम ना लेती.
जब तक मंजिल ना मिलजाती|
द्दृढ़ इच्छा के एयर पोर्ट पर.
करती श्रम का प्लेन लेंड है|

है कतार में बढ़तीजाती.
गिर जाती तो उठकर आती|
अगर कहीं व्यवधान हुआ तो.
काट काट चक्कर आ जाती|
शिक्षा देती है हम सबको.
श्रम का हर दम अपर हॆंड है|

उठो और चल पड़ो बात यह.
कही विवेकानंदों ने है|
लंगड़ों ने पर्वत लांघे हैं.
नदी पार की अंधों ने है|
हर चीटी ने इसी बात का.
हमें किया ई मेल सेंड है|

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