नागरिकता संशोधन विधेयक

भाजपा सरकार द्वारा लाये गए इस विधेयक पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का विरोध समझ से परे है या फिर इन विपक्षियों को मुस्लिम लीग या जमायते इस्लामी की संज्ञा देना ही उचित होगा, इनका विरोध इस बात पर है की सरकार ने इस विधेयक मे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हुये मुस्लिमो को नागरिकता न देने की बात की है जो भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है।

इन लोगों को आखिर ये समझ नहीं आ रहा या फिर ये समझना ही नहीं चाहते की यह विधेयक इन पड़ोसी देशों के मुस्लिमो द्वारा हुये उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यको के लिए है न की उत्पीड़ितों के लिए अगर यह विधेयक सांप्रदायिक होता तो इसमे इसाइयों को कभी शामिल न किया जाता क्योंकि संघ परिवार मुस्लिमो से जादा इसाइयों के खिलाफ माना जाता है और केरल या नार्थ ईस्ट मे इसाइयों द्वारा हो रहे हिन्दुओ के जबरन धर्मपरिवर्तन पर न सिर्फ चिंतित है बल्कि संघर्ष कर रहा है फिर भी उन्हे इस विधेयक मे जगह दी गयी है।

अगर इस विधेयक मे मुस्लिमो को भी जगह दे दी जाएगी तो पाकिस्तान कितने ही इस्लामी आतंकियों को भी भारत की नागरिकता दिलवा सकता है साथ ही ये न्याय की बेसिक अवधारणा के भी खिलाफ ही होगा क्योंकि जिनसे बचकर हिन्दू तथा बाकी अल्पसंख्यक भारत मे भागकर आ रहे हैं और शरण मांग रहे हैं अगर वो धार्मिक उत्पीड़न करने वाले भी उनके पीछे पीछे भारत मे भी आने लगे तो वो बेचारे कहाँ जाएँगे।

दूसरी बात जब धर्म के नाम पर और लांखों लोगों का कत्लेआम करवा कर देश का बंटवारा कर दिया गया और मुस्लिमो को अलग देश दे दिया और वो खुशी खुशी पाकिस्तान चले गए फिर यहाँ वापस क्यों आना चाहते हैं? और अगर वापस आना ही चाहते हैं तो फिर अपने हिस्से की जमीन भी वापस लेकर आयें, हिन्दू तो वहाँ की सरकारों पर भरोषा करके रुक गए थे जैसे हमारे यहाँ मुस्लिम रुके थे पर जब हिन्दुवों पर अत्याचार हुये तो वो वहाँ से भाग रहे हैं जबकि ये हमारे देश के मुस्लिम पाकिस्तान या बांग्लादेश जाने के बारे मे तो कभी सोचते भी नहीं बल्कि इन देशो के मुस्लिम ही वापस आना चाहते हैं।

ये कैसी विडम्बना है की हमारे देश के मुस्लिमों को हर चीज सरिया और कुरान के हिसाब से चाहिए पर जहां ये सब उपलब्ध है वहाँ जाने की बजाय उन देशों के मुस्लिमो को भी इसी भारत मे बसाना चाहते हैं जिसको कभी डायन तो कभी यहाँ के बहुसंख्यकों को मुस्लिमो का हत्यारा बताते हैं और कहते हैं इस देश मे मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं, अरे भाई जब यहाँ तुम खुद ही सुरक्षित नहीं हो तो बाकी देशों के मुस्लिमो को क्यों यही बसाना चाहते हो?

मुस्लिम अक्सर हर डिबेट मे ये कहते पाये जाते हैं की हम बाई च्वाइज़ भारत मे रुके इसलिए हमारा अधिकार ज्यादा है  इन तथाकथित मुस्लिम बुध्द्धिजीवियों की ये कितनी बड़ी धूर्तता है, जब दो भाइयों मे बंटवारा होता है तो अपने हिस्से की सारी जमीन सारे संसाधन लेकर भी अपने आधे बच्चे बड़े भाई के घर मे छोड़ने को या बच्चो द्वारा स्वयं ही बड़े भाई के घर मे ही डेरा जमा लेने को त्याग नहीं धूर्तता ही कहा जाता है और ये उस बड़े भाई के बच्चो पर अन्याय है की उसके हिस्से पर भी वो हक जमाये बैठे हैं जो अपना हिस्सा ले चुके हैं।

खैर उन बच्चो को तो देश ने फिर भी अपना ही लिया पर अगर वो भाई या पड़ोसी अब भी अपने बच्चे भेजना चाहता है या उसके बच्चे बड़े भाई के घर ही आना चाहते हैं तो फिर उस देश को ही क्यों न भारत मे दुबारा मिला लिया जाय जिससे सभी सुरक्षित हो जाएँ।

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