ड्रैगन के बढ़ते कदम

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डॉ. शशि तिवारी 

अविभाजित हिन्दुस्तान का कभी अभिन्न अंग रहा पाकिस्तान धर्म के आधार पर विभाजित हो कट्टरता के चलते आज स्वयं के ही बुने जाल में दिनों दिन सुलझने की जगह और उलझता ही जा रहा है। कभी आतंकियों को दूध पिला, कभी भाड़े के लोगों का उपयोग कर पड़ोसियों के घर में अशांति फैलाने वाला पाकिस्तान उन्हीं का शिकार आज प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से हो रहा है। विश्व मंच पर उसने अपने रंग बदले, झूठ बोला लेकिन जब विश्व बिरादरी के सामने असलियत आने पर वो शक्तिशाली मुल्क भी अब उसकी रग-रग से अच्छी तरह न केवल वाकिफ हुए बल्कि वह भी अब इस देश का इस्तेमाल अब अपने निजी हितों के लिए करने से भी नहीं चूक रहे है फिर बात चाहे अमेरिका की हो या चीन की हो। इन 64 वर्षों में पाकिस्तान की घरेलू स्थिति आज बद से बदतर ही हुई है।

शक्ति के दंगल में चीन भी अमेरिका से उन्नीस रहना नही चाहता। किसी जमाने में शक्ति केन्द्र दो धु्रवीय यू.एस.ए. (अमेरिका) और सोवियत संघ यू.एस.एस. हुआ करते थे। लेकिन समय ने ऐसी करवट ली, ऐसी नजर लगी की सोवियंत संघ के खण्ड-खण्ड हो गए और शक्ति सम्राट अमेरिका बन गया। इस दूसरे शक्ति ध्रुव की कमी को पूरा करने के लिए चीन दबे पांव तीव्रता से अपना साम्राज्य फैला रहा है। इस समय बड़े-बड़े देश प्राकृति क ऊर्जा के भण्डार प्राकृतिक गैस एवं तेल की कमी से जूझ रहे है इसलिए सभी की नजरें परोक्ष रूप से इन्हीं पर गढ़ी हुई है।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने यह कहकर विश्व पटल पर खलबली मचा दी कि पाकिस्तान उसका भाई है? और अगर किसी से युद्ध होता है तो वह पाकिस्तान के साथ रहेगा? हाल ही में भारत-पाकिस्तान के मध्य हुआ समझौता जिसमें भारत, अफगानिस्तान की फौज को प्रशिक्षण, सैन्य सहायता और व्यापार में सहायता करेगा को ले पाक बोंराया हुआ है। वही भारत-ईरान के मध्य चौबहार, जरांच, डेलाराम और तिरमिस के मध्य बनने वाली सड़क जिससे भारत सीधा मध्य एशिया, अफगानिस्तान और ईरान से पाकिस्तान को छोड़ जुड़ जायेगा, जिसके परिणामस्वरूप दोनों के मध्य व्यापार की और भी संभावना बढ़ेगी। अब भारत भी अफगानिस्तान के साथ-साथ ईरान से भी अपने संबंधों को मजबूती के साथ नए-नए आयाम भी दे रहा हैं। उधर अमेरिका भी परोक्ष रूप से अफगानिस्तान पर अपने हवाई अड्डे एवं सैनिकों को रख कब्जा बरकार बनाए रखना चाहता है। अमेरिका ने फलस्तीनी प्रकरण में यूनेस्कों को भी आर्थिक मदद (22 प्रतिशत) जो वह देता है रोकने की धमकी दे दी है कि वह फलस्तीनी को पूर्ण सदस्य का दर्जा न दे। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मियां परवेज मुशर्रफ भारत पर अफगानिस्तान में पाकिस्तानी विरोधी लहर पैदा करने का आरोप लगा पुनः अपनी राजनीति चमकाने में जुट गए है। साथ ही अफगानिस्तान पर भी आरोप लगाने से नहीं चूक रहे है कि अफगानिस्तान का रवैया शुरु ‚ से ही पाकिस्तान विरोधी रहा है। परवेज मुशर्रफ यही नही रूकते आगे खुलासा करते हुए कहते है कि ‘‘मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मैं भारत विरोधी हूं बल्कि इसलिए भी कह रहा हूं कि मेरे पास इस बात की पुख्ता जानकारी भी है कि रूस की केजीबी, भारत की रॉ और अफगानिस्तान की खुफिया एजेन्सी में अच्छी सांठगांठ है।’’

इसी बीच पाकिस्तान का पिठ्ठू तालिबान के कमाण्डर ने ‘‘ओ सीक्रेट पाकिस्तान’’ डॉक्यूमेन्ट्री में यह कह नई बहस को जन्म दे दिया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ लड़ने के लिए हमें प्रशिक्षित कर रहा है।

अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाक यात्रा के दौरान् सच कह ही डाला कि क्यों पड़ोसी को डसवाने के लिए सांप पाल रहे हो। वह आपको ही डस लेगा इशारा भारत की और था।

इस समय पाकिस्तान की स्थिति ‘‘न खुदा ही मिला न विसाले सनम’’ जैसी हो रही है।

जब अमेरिका ने पाक को धमकाया तो पाक सेना प्रमुख अशफाक परवेज कमानी एक छोटे बच्चे की तरह कहते है ‘‘छोटा बच्चा समझ कर न धमकाना रे’’ हमारे पास भी एटम बम है।

उधर पाक-अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेद को ले डेªगन (चीन) फूला नहीं समा रहा है, दबे मन से कही न कही पाक अब चीन की ओर बढ़ने की जुगाड़ में जुट गया है। अभी अमेरिका आर्थिक मंदी और गरीब-अमीर के बीच बढ़ती खाई के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन से भी जूझ रहा है।

पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की बढ़ती उपस्थिति खुद ही ‘‘पाक-चीन’’ की कोई गुप्त संधि की ओर इंगित करता है? ऐसा ही इशारा हमारे सेना प्रमुख जनरल व्ही. के. सिंह एवं रक्षा मंत्री ए. के. एन्टोनी भी तीसरे देश की उपस्थिति पर एतराज जता चुके है। न्यूयार्क टाईम्स ने इस तथ्य को उजागर किया कि पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीरि क्षेत्र में चीन हाइवे सहित कुछ आधारभूत ढांचा विकास सम्बन्धी परियोजना पर भी काम कर रहा है। इतना ही नहीं बल्कि पीपुल्स लिवरेशन आर्मी के लगभग 11000 सैनिक भी मौजूद है। सुनने में तो यह भी आया है कि ‘‘चीन-पाकिस्तान’’ को सीधा जोड़ने के लिए कुछ गुप्त सुरंगों का भी निर्माण कर रहा है। इतना ही नही चीन समुद्री क्षेत्र में भी अपनी हलचल एवं अन्य साजों सामान का जमावडा अरब सागर के माध्यम से हिन्द महासागर में प्रवेश की भी जुगत बना रहा है। चीन सुनियोजित ढंग से थल एवं‚ जल मार्गों में भी अनाधिकृत गतिविधियों का संचालन चोरी और सीना जोरी की तर्ज पर कर रहा है। चीन जानता है इस वक्त सबसे बड़ा बाजार और मेन पावर उसी के पास है अतः अब उसे शक्ति के दूसरे ध्रुव बनने से कोई भी रोक नहीं सकता।

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