इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन

evm1. इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है?
. यह एक सामान्य इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरण है जिसका इस्तेमाल परम्परागत मतदान प्रणाली में इस्तेमाल किए जाने वाले मतपत्रों के स्थान पर वोटों को दर्ज करने के लिए किया जाता है।2. परम्परागत मतपत्र/मतपेटी प्रणाली की तुलना में ईवीएम के क्या फायदे हैं?
(i) इसमें अवैध और संदिग्ध मतों की आशंका समाप्त हो जाती है, जो अनेक मामलों में विवादों और चुनाव याचिकाओं के मूल कारण होते हैं।
(ii) इनसे वोटों की गिनती की प्रक्रिया परम्परागत प्रणाली की तुलना में अत्यंत तीव्र हो जाती है।
(iii) इससे कागज की भारी बचत होती है, जिससे बड़ी संख्या में पेड़ कटने से बचते हैं और मतदान की प्रक्रिया को पारिस्थितिकी अनुकूल बनाने में मदद मिलती है।
(vi) इससे प्रिंटिंग की लागत लगभग शून्य हो जाती है क्योंकि प्रत्येक मतदान केन्द्र के लिए केवल एक मतपत्र की आवश्यकता पड़ती है।

3. भारत के अलावा अन्य देष कौन से हैं जो चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल करते हैं?
. भूटान ने अपने पिछले आम चुनाव में पूरे देश में भारतीय ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल किया। इन मशीनों का इस्तेमाल नेपाल ने भी अपने पिछले आम चुनाव में कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में किया था।

4. भारत में ईवीएम की शुरूआत कब हुई?
. इसका इस्तेमाल पहली बार 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में गिने-चुने मतदान केन्द्रों (50 मतदान केन्द्रों)े पर किया गया था।

5. भारतीय ईवीएम मशीनों की बेजोड़ विशेषताएं क्या हैं?
. यह एक सामान्य मशीन है जिसका इस्तेमाल मतदान कार्मिकों और मतदाताओं दोनों द्वारा आसानी से किया जा सकता है। यह रूखे ढंग से परिचालित किए जाने के प्रति भी पर्याप्त मजबूत है और विषम जलवायु स्थितियों में काम करने में सक्षम है। प्रत्येक मशीन एक स्वतंत्र इकाई होने और किसी नेटवर्क से जुड़ी न होने के कारण इसकी प्रोग्रामिंग के साथ कोई छेड़खानी नहीं कर सकता और इसके नतीजों में कोई हेराफेरी मुमकिन नहीं है। देश के अनेक भागों में बिजली आपूर्ति की दोषपूर्ण स्थिति को देखते हुए मशीनों को बैटरी चालित बनाया गया है।

6. मतपत्र आधारित चुनाव प्रणाली के स्थान पर ईवीएम प्रणाली आरंभ करने की क्या आवश्‍यकता थी?
. किसी भी चुनाव में मतपत्रों की गिनती में घंटों लग जाते थे, जिससे मतगणना कर्मचारियों और उम्मीदवारों/राजनीतिक दलों के लिए आवेश का वातावरण बन जाता था। कभी-कभी दो शीर्ष उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर कम होने के कारण पुनर्गणना की मांग से माहौल और भी गरमा जाता था। बड़ी संख्या में अवैध और संदिग्ध वोटों से भी कठिनाइयां पैदा होती थी।

7. भारत में ईवीएम का विनिर्माण कौन करता है?
. केन्द्र सरकार के केवल दो प्रतिष्ठान- भारत इलैक्ट्रोनिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया- ईवीएम के विनिर्माता हैं, जिनसे भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा ईवीएम खरीदी जाती हैं।

8. क्या ईवीएम को मंजूर करने से पहले निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से सलाह मशविरा किया था?
. हां। इस मामले में सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श किया गया था और उनके समक्ष ईवीएम प्रदर्शित की गई थीं।

9. क्या ईवीएम को मंजूर करने से पहले निर्वाचन आयोग ने तकनीकी विषेषज्ञों से परामर्श किया था?
. हां। ईवीएम को मंजूर करने से पहले तकनीकी समिति की राय ली गई थी, जिसमें प्रोफेसर एस. सम्पत, प्रोफेसर पी वी इंदिरेसन और डा0 सी राव कासरबडा शामिल थे। समिति ने सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखकर से मशीनों की गहन जांच की थी और सर्वसम्मति से चुनावों में उनके इस्तेमाल की अनुशंसा की थी।

10. नियंत्रण इकाई की क्या विशेषताएं हैं?
. नियंत्रण इकाई मुख्य इकाई है जो सभी आंकड़ों का संग्रह करती है और ईवीएम की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण रखती है। नियंत्रण इकाई की कार्य प्रणाली को नियंत्रित करने वाले प्रोग्राम को ”एकबारगी प्रोग्रामेबल आधार” पर एक माइक्रोचिप में बर्न्ट किया जाता है। एक बार बर्न्ट होने के बाद इसे रीड, कापी या परिवर्तित नहीं किया जा सकता। ईवीएम मशीनें बैलट यूनिट से कंट्रोल यूनिट में आंकड़े ट्रांसमिट करने की सुरक्षा बढ़ाने के लिए डायनामिक कोडिंग का इस्तेमाल करती हैं। नई ईवीएम मशीनों में रीयल टाइम क्लॉक और डेट- टाइम स्टैम्पिंग सुविधा विद्यमान है, जो कभी भी कोई की प्रेस करने पर उन्हें सही समय और तारीख रिकार्ड करने में सक्षम बनाती हैं। मतदान पूरा होने पर और क्लोज (बंद) बटन दबाने पर मशीन कोई डाटा स्वीकार नहीं करती अथवा कोई वोट रिकार्ड नहीं करती। ”टोटल” बटन दबाने पर कंट्रोल यूनिट उस समय तक दर्ज किए गए वोटों की संख्या प्रदर्शित कर सकती है जिसकी पुनर्जांच फार्म 17 ए में दर्ज मतदाताओं से की जा सकती है। मतगणना केन्द्र पर गणना एजेंटों की मौजूदगी में गणना स्टाफ द्वारा ”रिजल्ट” बजट दबाने पर कंट्रोल यूनिट का डिस्प्ले सिस्टम किसी मतदान केन्द्र पर डाले गए मतों की कुल संख्या और मशीन में प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किए गए वोटों की संख्या प्रदर्शित करती हैं। कंट्रोल यूनिट कनेक्टिंग केबल के साथ की गई भौतिक छेड़छाड़ का भी पता लगा सकती है तथा उसे डिस्प्ले यूनिट में दर्शा सकती है।

11. बिजली रहित क्षेत्रों में ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?
. ईवीएम बिजली पर निर्भर नहीं है। यह बैटरी से संचालित होती है।

12. ईवीएम में दर्ज किए जा सकने वाले वोटों की अधिकतम संख्या कितनी होती है?
. ईवीएम मशीन में अधिकतम 3840 वोट दर्ज किए जा सकते हैं। यह संख्या किसी मतदान केन्द्र के लिए निर्दिष्ट मतदाताओं की संख्या (जो आम तौर पर 1400 से कम होती है), से काफी अधिक है।

13. कुछ चुनावों में बड़ी संख्या में उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं। ईवीएम में उम्मीदवारों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है?
. उम्मीदवारों की अधिकतम संख्या 64 तक होने की स्थिति में ही ईवीएम के जरिये मतदान संचालित किया जा सकता है।

14. अगर उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक हो तो क्या होगा?
. ऐसे मामलों में मतदान मतपत्र/मतपेटी की परम्परागत पध्दति के जरिये कराना पड़ेगा।

15. मतदान केन्द्र पर कोई निरक्षर मतदाता ईवीएम का संचालन कैसे करेगा? वह किसकी सहायता ले सकता है?
. पीठासीन अधिकारी के पास बैलट यूनिट की कार्ड बोर्ड अनुकृति होती है। उसके माध्यम से वह प्रदर्शित करके दिखायेगा कि ईवीएम के जरिये वोट कैसे डाला जा सकता है। लेकिन उसे उस मतदान चैम्बर में जाने की अनुमति नहीं होगी, जहां वास्तविक बैलट यूनिट रखी हुई है।

16. क्या कोई ईवीएम मशीनों में हेराफेरी कर सकता है?
. ईवीएम को हेराफेरी की आशंका से मुक्त बनाने के लिए हर संभव ध्यान रखा गया है। ईवीएम मशीनों में प्रयुक्त माइक्रोप्रोसेसर की प्रोग्रामिंग को चिप में बर्न्ट किया जाता है। फ्यूज्ड प्रोग्राम को न तो बदला जा सकता है और न ही मिटा कर लिखा जा सकता है। चिप पर अतिरिक्त या वैकल्पिक कोड बर्न करने का कोई भी प्रयास उसके मौजूदा प्रोग्राम को नष्ट कर देगा और उसे इस्तेमाल के अयोग्य/व्यर्थ बना देगा। अतिरिक्त सावधानी के उपाय के रूप में किसी मतदान के लिए तैयार की गयी मशीनों को उम्मीदवारों या उनके एजेन्टों की मौजूदगी में भौतिक रूप से सीलबंद किया जाता है तथा मजबूत कमरों में सुरक्षित रखा जाता है। उनकी रक्षा के लिए केन्द्रीय पुलिस बल तैनात किया जाता है। उम्मीदवारों के प्रतिनिधि भी मशीनों की निगरानी रख सकते हैं। मतदान पूर्व या मतदान दर्ज की गयी ईवीएम मशीनों के रखने के स्थानों पर जाने की अनुमति आयोग द्वारा निर्धारित कड़ी प्रक्रिया के बाद ही मिल सकती है, जिसके लिए पूरी पारदर्शिता बरती जाती है।

17. किसी पार्टी या उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के लिए क्या ईवीएम को किसी व्यक्ति द्वारा प्री-प्रोग्राम्ड किया जा सकता है?
. किसी उम्मीदवार विशेष के पक्ष में वोट हस्तांतरित करने के लिए वैकल्पिक चिप प्रोग्राम करने के वास्ते यह जरूरी होगा कि सम्बध्द उम्मीदवार के क्रमांक की पहचान की जाये। चूंकि संदर्भित मतपत्र पर उम्मीदवारों का क्रम भरे गए नामांकनों और वैध पाए गए नामांकनों पर निर्भर करता है, इसलिए पहले से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की वास्तविक सूची क्या होगी।

18. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए और यह सिध्द करने के लिए कि ईवीएम के साथ कोई हेराफेरी नहीं कर सकता, निर्वाचन आयोग कौन सी प्रक्रियाएं अपनाता है?
. आयोग ने मशीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कड़ी प्रक्रियाएं निर्धारित की हैं। मशीनों का विनिर्माण सार्वजनिक क्षेत्र के केवल दो प्रतिष्ठानों द्वारा किया जाता है, जो आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप मशीनें बनाते हैं। आयोग इस काम को तकनीकी समिति के परामर्श से पूरा करता है, जिसमें जानेमाने व्यवसायी शामिल होते हैं। प्रत्येक चुनाव से पहले मशीनों की जांच इन दो सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के इंजीनियरों द्वारा की जाती है। मशीनों को आम तौर पर जिला मुख्यालयों में स्ट्रांग रूम्स में रखा जाता है, जहां प्रवेश वर्जित होता है। स्टोर में जाने की अनुमति लॉगबुक में आवश्यक प्रविष्टि के बाद ही दी जाती है, जिसमें प्रवेश के प्रयोजन सहित प्रवेश का समय और तारीख दर्ज करनी पड़ती है। चुनाव अधिकारी द्वारा मतपत्र चिपका कर एक बार मशीनों को मतदान के लिए तैयार किए जाने के बाद, उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक, उम्मीदवार या उनके एजेन्टों की देखरेख में स्ट्रांग रूम में ले जाया जाता है और दोहरे ताले के अंतर्गत रखा जाता है। इन तालों पर उम्मीदवार/एजेन्ट अपनी अपनी सील लगा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया की विडियो फिल्म भी तैयार की जाती है। मतदान के पश्चात ईवीएम मशीनों को समान प्रक्रिया अपनाते हुए स्ट्रांग रूम्स में भेजा जाता है जहां सुरक्षा बलों की तीन स्तरीय पहरेदारी के अंतर्गत उन्हें रखा जाता है। उम्मीदवारों या उनके एजेन्टों को दृश्यमान दूरी से स्ट्रांग रूम पर निगरानी रखने की अनुमति दी जाती है।

19. नयी प्रक्रिया ”ईवीएम रैन्डोमाइजेशन” क्या है, क्या मैं जान सकता हूं इसे क्यों अंजाम दिया जा रहा है।
. ईवीएम मशीनों के गड़बड़ी प्रूफ होने के बावजूद सावधानी के अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। इनके अंतर्गत किसी चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम मशीनों के लिए दो स्तरीय रैन्डो माइजेशन प्रक्रिया शुरू की गयी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी को पहले से यह जानकारी न मिल पाये कि किसी निर्वाचन क्षेत्र/मतदान केन्द्र में कौन सी ईवीएम इस्तेमाल की जायेगी। इस प्रयोजन के लिए किसी जिला निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में इस्तेमाल की जाने वाली सभी ईवीएम मशीनों के क्रमांकों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाली ईवीएम मशीन का चयन कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया के जरिये बेतरतीब ढंग से किया जाता है। इसे प्रथम स्तरीय रैन्डो माइजेशन कहा जाता है। अन्य रैन्डो माइजेशन को दूसरे स्तर का रैन्डो माइजेशन कहा जाता है जो मतदान अधिकारी द्वारा यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि निर्वाचन क्षेत्र के किस मतदान केन्द्र के लिए कौन सी ईवीएम इस्तेमाल की जायेगी।

20. अगर मतदान के दिन किसी ईवीएम में कोई समस्या आ जाये, तो उस मामले में क्या समाधान किया जा सकता है?
. सेक्टर अधिकारी द्वारा खराब ईवीएम के स्थान पर तत्काल नई ईवीएम प्रदान की जाती है। यह अधिकारी उसे आवंटित क्षेत्र में कुछ मतदान केन्द्रों पर निरंतर घूमता है ताकि अतिरिक्त मतदान सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

21. ईवीएम को सीलबंद करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है? ऐसा क्यों किया जाता है? इसे कैसे अंजाम दिया जाता है?
. ईवीएम के विभिन्न भागों की भौतिक सीलबंदी की जाती है ताकि मतदान की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रण करने वाले बटनों तक पहुंच रोकी जा सके। ये कार्य कई चरणों में किया जाता है। बैलट यूनिट की बैलट स्क्रीन और कंट्रोल यूनिट के उम्मीदवार सेट अनुभाग की सीलिंग उम्मीदवारों अथवा उनके एजेन्टों की मौजूदगी में मतदान अधिकारी की देखरेख में की जाती है ताकि मतपत्र के साथ हेराफेरी रोकी जा सके और उम्मीदवार बटनों में अवांछित परिवर्तन न किया जा सके। ये दोनों बटन किसी भी चुनाव में आवश्यक होते हैं। इसी प्रकार अगर रिजल्ट सेक्शन को सील नहीं किया जायेगा, तो कोई भी व्यक्ति निर्दिष्ट तारीख को मतगणना केन्द्र पर गणना शुरू होने से पहले नतीजा देख सकता है।

उम्मीदवारों अथवा उनके एजेन्टों को निर्वाचन अधिकारी द्वारा बुलाया जाता है और मतदान/पीठासीन अधिकारियों की मुहरों के साथ टैग्स/पेपर सीलों पर उनके हस्ताक्षर कराए जाते हैं।

22. मतदान के बाद मतों की गिनती तक ईवीएम कहां रखी जाती है?
. मतदान दर्ज होने के बाद ईवीएम मशीनों को आम तौर पर निर्वाचन क्षेत्र में या निकटवर्ती ऐसे स्थान पर सुरक्षित स्टोर केन्द्र में रखा जाता है, जहां उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि निगरानी रख सकें। आम तौर पर यह स्थान वहीं होता है जहां गणना की जाती है।

23. ईवीएम में वोटों की गिनती कैसे होती है?
. मतगणना केन्द्र पर अनेक गणना टेबलों पर ईवीएम मशीनें रखी जाती है, जिनकी संख्या आमतौर पर 14 से अधिक नहीं होती। गणना एजेन्टों के लिए बैठने की व्यवस्था इस तरह से की जाती है कि वे स्पष्ट रूप से ईवीएम और उसके डिस्प्ले को देख सकें। जब ईवीएम का रिजल्ट बटन दबाया जाता है, तो उसका डिस्प्ले सेक्शन किसी मतदान केन्द्र पर डाले गए कुल वोटों की संख्या दर्शाता है और उसके बाद क्रमिक रूप से प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा हासिल किए गए वोट प्रदर्शित किए जाते हैं। गणना स्टाफ के अलावा गणना एजेन्ट भी उन्हें देख सकते हैं। प्रत्येक दौर के अंत में उस दौर का नतीजा और क्रमिक जोड़ की घोषणा की जाती है। प्रत्येक दौर के योग को संकलित करके नतीजा तैयार किया जाता है।

24. हमारे देश में मतदान केन्द्रों पर कब्जों जैसी चुनाव गड़बड़ियां अक्सर सामने आती रहती हैं। क्या ईवीएम मशीनों से बूथों पर कब्जों को रोकने में मदद मिल सकती है?
. अगर ईवीएम को बूथों पर कब्जा करने वालों द्वारा छीन लिया जाता है तो बूथों पर कब्जे नहीं रोके जा सकते। किन्तु मशीन एक मिनट में पांच और एक घंटे में तीन सौ वोटों से अधिक मतों को दर्ज नहीं कर सकती। इसकी तुलना में मत पेटी में कितनी ही संख्या में मतपत्र डाले जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त बूथ कब्जा करने वालों को देखकर पीठासीन अधिकारी कंट्रोल यूनिट में ”क्लोज” बटन दबाकर मतदान को रोक सकता है।

25. क्या संसद और राज्य विधानसभा चुनाव में एक साथ ईवीएम का इस्तेमाल संभव है?
. हां, संसदीय और राज्य विधानसभा चुनाव ईवीएम के जरिये एक साथ कराये जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में दो अलग अलग ईवीएम रखी जा सकती है जिनमें से एक का इस्तेमाल संसदीय चुनाव और दूसरी का विधानसभा चुनाव के लिए किया जा सकता है।

26. कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में रिजल्ट कितने समय तक स्टोर रह सकता है?
. ईवीएम की मेमोरी चिप में नतीजे को स्थायी रूप से स्टोर किया जा सकता है। यह परवर्ती चुनावों के लिए मशीन तैयार करने के लिए जानबूझ कर मिटाए जाने तक सुरक्षित रह सकता है। मशीन से बैटरी हटाए जाने का कोई प्रभाव उसकी मेमोरी पर नहीं पड़ता।

27. अगर गणना के समय ईवीएम में डिस्प्ले दिखाई न दे रहा हो तो ऐसी स्थिति में चुनाव परिणाम कैसे प्रमाणित किया जा सकता है?
. ईवीएम के विनिर्माताओं ने ”अनुषंगी डिस्प्ले यूनिट” का विकास किया है। कंट्रोल यूनिट पर मूल डिस्प्ले विफल होने की स्थिति में इस एडीयू के इस्तेमाल से अधिकतर मामलों में नतीजे को पुन: प्राप्त किया जा सकता है।

28. क्या बटन को बार बार दबाने पर एक से अधिक वोट डाला जा सकता है?
. नहीं, उम्मीदवार बटन एक बार दबाए जाने के बाद मशीन बटन के सामने लिखे उम्मीदवार के पक्ष में वोट दर्ज कर देती है। मशीन में अन्य वोट तब तक रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता जब तक कि पीठासीन/मतदान अधिकारी द्वारा कंट्रोल यूनिट का बैलट बटन न दबा दिया जाये।

29. इससे पहले मत पत्रों को मिलाने की प्रणाली अपनाई जाती थी ताकि किसी विशेश मतदान केन्द्र की मतदान वरीयता उजागर न हो। अब ईवीएम मशीनों की गणना एक एक करके होती है और हर किसी को किसी भी मतदान केन्द्र में डाले गए वोटों की वरीयता का पता चल जाता है। क्या इस स्थिति को रोकने के लिए कुछ किया जा सकता है?
. ईवीएम के विनिर्माताओं द्वारा ”टोटलाइजर” नाम का एक डिवाइस विकसित किया गया है, जो एक ही समय, कई कंट्रोल यूनिटों के साथ कनेक्ट किया जा सकता है। यह प्रत्येक मतदान केन्द्र, जहां ईवीएम इस्तेमाल की गयी थी, में डाले गए कुल वोटों की संख्या और उन मतदान केन्द्रों में डाले गए वोटों का कुल जोड़ प्रदर्शित कर सकता है। किन्तु प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किए गए वोटों की संख्या मतदान केन्द्रों के समूचे समूह, जहां ईवीएम प्रयुक्त की गयी थी, के लिए प्रदर्शित होगी न कि अलग अलग मतदान केन्द्र के लिए। इससे किसी विशेष मतदान केन्द्र पर वोटिंग पैटर्न जानना असंभव हो जाता है।

30. दुनिया में भारतीय ईवीएम के बारे में क्या धारणा है?
. अमरीका की तुलना में भारतीय ईवीएम बेहद सरल मशीन है। अमरीका की मशीनों से भिन्न हमारी ईवीएम एकल मशीन है जिसे किसी नेटवर्क से नहीं जोड़ा जा सकता और नेटवर्क या रिमोट के जरिये नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसका मूल प्रोग्राम चिप में बर्न्ट किया जाता है, जिसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता और उसमें हेराफेरी की आशंका नहीं रहती।

31. दृष्टि बाधित व्यक्ति ईवीएम का इस्तेमाल कैसे कर सकता है?
. अन्य सभी शारीरिक दृष्टि से बाधित या अशक्त मतदाताओं की भांति दृष्टि बाधित मतदाताओं को भी एक सहयोगी साथ ले जाने की अनुमति दी जाती है जो वोट डालने में उसकी सहायता करता है। यह सहयोगी मतदान अनुभाग तक मतदाता के साथ जा सकता है। इसके अतिरिक्त अनेक ईवीएम मशीनों पर ‘ब्रेल’ लिपि में बटन यूनिट अंकित किए गए हैं, जिनपर उम्मीदवार का क्रमांक लिखा होता है। चुने हुए मतदान केन्द्रों पर पीठासीन अधिकारियों द्वारा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के नाम और क्रमांक का डमी मतपत्र उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे मतदान केन्द्रों के पीठासीन अधिकारी दृष्टि बाधित मतदाता के अनुरोध पर उसे डमी मतपत्र उपलब्ध करायेंगे। मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार का क्रमांक नोट करके डमी मतपत्र पीठासीन अधिकारी को लौटा देगा और मतदान अनुभाग में अपना वोट दर्ज कर सकेगा। ”ब्रेल” में लिखे संकेतों से वह स्वयं बैलट यूनिट पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के क्रमांक का पता लगा सकेगा और स्वतंत्र रूप से वोट डाल सकेगा।

•2004 के आम चुनाव पूरी तरह ईवीएम की सहायता से कराए गए और देश भर में 10.75 लाख ईवीएम इस्तेमाल की गयी।

•1999 के आम चुनाव में मतपत्रों की प्रिंटिंग के लिए 7700 मीट्रिक टन कागज इस्तेमाल किया गया था।

•1996 के आम चुनाव में मतपत्रों की प्रिंटिंग के लिए 8800 मीट्रिक टन कागज इस्तेमाल किया गया था।

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