भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय

0
269


भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय,
गर्मी में देते हो ठंडी छांव प्रिय।
मै भोली भाली ऐसी अबला हूं,
मीठी निबोली खाती हूं प्राण प्रिए।

मैं तेरी छांव में जीवन बिता दूंगी,
अपना सब कुछ तुम पे लुटा दूंगी।
एक बार तुम मुझको अपना लो,
सातों जन्म तेरे साथ निभा दूंगी।।

तुम मीठे फल देने वाले तरु मेरे,
जीवन भर आश्रय देने वाले मेरे।
कभी न करना अलग मुझको तुम,
मैं चांदनी हूं तेरी तुम चांद हो मेरे।

तुम शीतल चंदन हो प्राण प्रिए,
मैं जहरीली नागिन हूं प्राण प्रिए।
लिपटी रहती हूं मै तुमसे सदा,
फिर भी ठंडी सुगंध देते हो प्रिय।।

तुम गुणी मै अवगुणी प्राण प्रिए,
मेरे अवगुणों पर न दो ध्यान प्रिय।
फिर भी प्रांशसा करते हो तुम मेरी
मैं तुम्हारे लायक न हूं प्राण प्रिए।।

आर के रस्तोगी

Previous articleमकर संक्रांति का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
Next articleज़ंजीरों को तोड़ना जानती हैं लड़कियां
आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,170 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress