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    Homeसाहित्‍यकविताहर दिन करवा चौथ

    हर दिन करवा चौथ


    जिनके सच्चे प्यार ने, भर दी मन की थोथ ।
    उनके जीवन में रहा, हर दिन करवा चौथ ।।

    हम ये सीखें चाँद से, होता है क्या प्यार ।
    कुछ कमियों के दाग से, टूटे न ऐतबार ।।

    मन ने तेरा व्रत लिया, हुई चाँदनी शाम ।
    साथी मैंने कर दिया, सब कुछ तेरे नाम ।।

    मन में तेरा प्यार है, आँखों में तस्वीर ।
    हर लम्हे में है छुपी, बस तेरी तासीर ।।

    अब तो मेरी कलम भी, करती तुमसे प्यार ।
    नाम तुम्हारा ही लिखे, कागज़ पर हर बार ।।

    मन चातक ने है रखा, साथी यूँ उपवास ।
    बुझे न तेरे बिन परी, अब ‘सौरभ’ की प्यास ।।

    तुम राधा, मेरी बनो, मुझको कान्हा जान ।
    दुनिया सारी छोड़कर, धर लें बस ये ध्यान ।।

    मेरे गीतों में बसी, बनकर तुम संगीत ।
    टूटा हुआ सितार हूँ, बिना तुम्हारे मीत ।।

    माने कब हैं प्यार ने, ऊँच-नीच के पाश ।
    झुकता सदा ज़मीन पर, सज़दे में आकाश ।।

    – डॉ सत्यवान सौरभ

    डॉ. सत्यवान सौरभ
    डॉ. सत्यवान सौरभ
    रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

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