लेखक परिचय

विभोर त्रिखा

विभोर त्रिखा

पत्रकारिता में अभी नयी शुरुवात की है .....

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निशंक सरकार ने अपनी सरकार की वाह वाही लूटने के लिए अटल खाद्यान्न योजना तो शुरू कर दी है लेकिन उसे सही ंग से धरातल पर क्रियान्त्रिवत कराने में इस सरकार को सर्दी के मौसम में भी पसीने छूट रहे है। गरीबों को सस्ता राशन देने की घोषणा के बाद लोगों को पहले ही माह में निर्धारित किये गये अनाज कई दुकानदारों से पूरा नहीं मिल पा रहा है। एपीएल व बीपीएल दोनों ही श्रेणी के लोगों को सस्ता राशन अनेक कार्ड धारकों को नहीं मिलने से विभागीय मंत्री के माथे पर भी चिन्ता की लकीरें पड़ना तो दूर वे विभाग के लापरवाह अफसरों पर भी लगाम नहीं लगा पा रहे है। खास बात यह है कि भले ही खाध्य विभाग के मंत्री दिवाकर भट्ट है लेकिन यह सस्ता राशन खाद्यान्न योजना गरीबों तक पहुंचने की योजना व घोषणा किया जाना स्वयं मुख्यमंत्री डॉ़ रमेश पोखरियाल निशंक के मास्तिष्क की उपज व उन्हीं की योजना है। मुख्यमंत्री डॉ़ निशंक ने इस अटल खाद्यान्न योजना का लाभ राज्य के एपीएल व बीपीएल कार्ड धारकों तक पहुंचाने के लिए बाकायदा दिल्ली द्रबार से अपनी पार्टी के सुप्रीमों नितिन गडकरी को राज्य में बुलाकर उनके हाथों से सस्ता राशन खाद्यान्न योजना का विधिवत रूप से उद्घाष्टन अथक शुभारंभ कराने में कामयाबी हासिल कर ली है परन्तु योजना के शुरू होने के बाद से इस मामले में पेंच ही पेंच आड़े आ रहे है। प्रथम माह ही कार्ड धारकों को इस चुनावी योजना का मात्र जाने वाला सस्ता राशन उपलब्ध होने में कैंची फिर रही है तो अगले माह मार्च में योजना का ‘‘हाल’’ क्या होगा? उसका स्वतः ही अनुमान लगाया जा सकता है। मुख्यबात यह है कि खाध्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दिवाकर भट्ट के हाथों से यह नईनवेली सस्ता खाद्यान्न योजना कतई भी ठीक ंग से नहीं चल पा रही है। भाजपाई निशंक सरकार की यह योजना दिवाकर भट्ट से इसलिए सफलतापूर्वक संचालित नहीं हो पा रही है क्योंकि उनका अपने संबंधित विभाग पर अंकुश नहीं है। खाध्य विभाग के अधिकारी ही इस खाद्यान्न योजना के संचालन हेतु अपने ही मंत्री को पहाड़ा पॄाते रहते है? चुनावी दृष्टि से भाजपा सरकार द्वारा प्रारंभ की गई इस खाद्यान्न योजना को संचालित करने में जब मुख्यमंत्री डॉ़ निशंक को यह लगने लगा कि दिवाकर भट्ट के बस की बात योजना को संचालित करना नहीं है तो निशंक ने दिवाकर की कार्यशैली पर पैनी नजर रखकर यह पता लगाना प्रत्रांरभ कर दिया है कि आख्रि यह योजना संचालित करवाने में दिवाकर भट्ट ‘‘निशंक’’ सरकार की धाज्जियां एवं खिल्ली कहाकहा अथवा किसकिस मोचेर पर उड़वा रहे है? कहने का अभिप्राय यह है कि मुख्यमंत्री डॉ़ रमेश पोखरियाल निशंक इस बात को लेकर गहरी चिन्ता में है कि कहीं दिवाकर भट्ट उनकी सरकार की इस योजना को हास्यास्पद बनवा कर न रहे जाएं? क्योंकि स्वयं निशंक इस योजना को लेकर ही संभावतः आगामी विधानसभा चुनाव को सफलतापूर्वक भुनाना चाहते है। यदि सरकार की यह सस्ता अनाज खाद्यान्न योजना समय की यह सस्ता अनाज खाद्यान्न योजना समय से पूर्व ही दम तोड़ गयी तो आगामी चुनावी मिशन भी संभावतः फेल हो सकता है? चचार्एं तो अब सस्ता की कुछ टेबलकुसीर पर यह होने लग गयी है कि खाध्य मंत्री दिवाकर भट्ट से खाध्य विभाग वापस लेने की निशंक सरकार सोच रही है। क्योंकि मुख्यमंत्री चाह रहे है कि उनके द्वारा शुरू की गयी खाद्यान्न योजना कम से कम आगामी दिसंबर माह तो ठीकठाक ंग से परवान च़ी रहे है और इसके लिए अभी समय रहते अति आवश्यक कदम उठाना जरूरी समझा जा रहाह है। यह समझा जा रहा है कि डॉ़ निशंक खाध्यमंत्री दिवाकर भट्ट से दोचार दिन में यानि कि इसी माह के अंत तक खाध्य विभाग के मुद्दे व खाद्यान्न योजना को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत करने वाले है। फिहहाल तो सस्ता राशन खाद्यान्न योजना को समय रहते दम न तोड़ने हेतु मुख्यमंत्री खुद ही योजना की मॉनिटरिंग कर हे है। अपने विशेष दूतों के जरिये डॉ़ निशंक खाध्य मंत्री दिवाकर भट्ट पर विशेष नजर भी रख्त्रो हुये है तथा प्रतिदिन मामले की रिपोर्ट लेकर उस पर एक्शन लेने की योजना बना रहे है। अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री डॉ़ निशंक अपनी कैबिनेट के उक्रांद कोटे के इकलौते मंत्री दिवाकर भट्ट से खाध्य विभाग वापस लें लेंगे जिसकी काफी संभावनाएं बनती नजर आ रही है। यदि दिवाकर भट्ट से निशंक सरकार यह महत्वपूर्ण विभाग छीनती है तो तभी सीएम निशंक सीधे अपने स्तर से इस योजना को सही ंग से काफी हद तक संचालित भी करा सकते है और अफसर भी सुधर जाएंगे?

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