राजनीति

गंगोत्री से गंगासागर तक भगवा ही भगवा

गंगा भारत की धमनियों में बहने वाली अमर नदी है, जो उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलकर बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। यह सफर करीब 2,525 किलोमीटर लंबा है, जिसमें हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर मैदानों, डेल्टा तक का संघर्ष समाहित है। ठीक वैसे ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का भगवा परचम गंगोत्री से गंगासागर तक फैल रहा है। आज देश के अधिकांश राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधनों की सरकारें हैं, और अब पश्चिम बंगाल में भी प्रचंड जीत हासिल कर चुकी हैं।यह भगवा लहर न केवल राजनीतिक विजय है, बल्कि विकास, राष्ट्रवाद और जनकल्याण की लहर है।
गंगोत्री भाजपा का प्रतीकात्मक उद्गम स्थल है। उत्तराखंड में भाजपा की सरकार ने पर्यावरण संरक्षण से लेकर तीर्थाटन को बढ़ावा देने तक का कार्य किया है। चारधाम यात्रा का विस्तार, गंगा सफाई अभियान और आपदा प्रबंधन में भाजपा की सक्रियता ने पहाड़ी राज्य को मजबूत आधार दिया। यहीं से भगवा धारा आगे बढ़ी, उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य को जीतकर। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी ने अपराधमुक्ति, किसान कल्याण और राम मंदिर निर्माण जैसे सपनों को साकार किया। गंगा के तट पर प्रयागराज का कुंभ भी भाजपा के कुशल आयोजन का प्रमाण है। यह धारा बिहार पहुंची, जहां नीतीश कुमार के साथ गठबंधन ने विकास की गति पकड़ी।
पूर्व की ओर बढ़ते हुए भगवा ने झारखंड, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों को रंग दिया। असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने उग्रवाद को कुचलकर शांति स्थापित की, जबकि त्रिपुरा में बिप्लब देब ने लेफ्ट के लंबे राज को उखाड़ फेंका। गंगा की सहायक नदियां बनकर भाजपा ने ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों में भी मजबूत पैठ बनाई। गुजरात तो भाजपा का गढ़ है, जहां नरेंद्र मोदी और भूपेंद्र पटेल ने डबल इंजन की सरकार से औद्योगिक क्रांति लाई। अब यह लहर पश्चिम बंगाल के गंगासागर तक पहुंच चुकी है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत एक ऐतिहासिक क्षण है। 2021 के विधानसभा चुनावों में 77 सीटें जीतकर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी टक्कर दी। लेकिन 2026 के चुनावों में प्रचंड बहुमत ने पूरे देश को उत्साहित कर दिया। ममता बनर्जी की सरकार पर भ्रष्टाचार, संप्रदायवाद और गुंडागर्दी के आरोप लगे, वहीं भाजपा ने सुकींद्र रेड्डी और अन्य नेताओं के नेतृत्व में हिंदू एकता, महिला सशक्तिकरण और बंगाल की आर्थिक पुनरुद्धार का वादा किया। गंगासागर का मेला, जो लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, अब भगवा उत्सव का प्रतीक बनेगा। भाजपा की जीत से बंगाल में राम नवमी जुलूस बिना बाधा के निकलेंगे, गोरक्षा को बल मिलेगा और बांग्लादेशी घुसपैठ पर रोक लगेगी। केंद्र की योजनाएं जैसे पीएम आवास, आयुष्मान भारत और वंदे भारत ट्रेनें बंगाल तक पहुंचेंगी, जो टीएमसी ने अब तक रोकीं।
यह भगवा विस्तार संयोग नहीं, रणनीति का परिणाम है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने संगठन को मजबूत किया। ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र हर राज्य में गूंजा। गंगोत्री से गंगासागर तक का यह सफर बताता है कि भाजपा अब राष्ट्रीय पार्टी नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा करने वाली शक्ति है। पश्चिम बंगाल की जीत के साथ ही केवल कुछ राज्य बाकी रह जाएंगे। भविष्य में पूरे भारत में डबल इंजन सरकारें होंगी।
गंगा प्रदूषण से मुक्त होकर पवित्र बनी रहती है, वैसे ही भाजपा राष्ट्र को भ्रष्टाचारमुक्त बना रही है। पवित्र गंगा गंगा सागर से मिलन करती है, ठीक वैसे ही भगवा परचम पूरे भारत को एक सूत्र में बांध रहा है। यह विजय जनता की है, जो विकास और गरिमा चाहती है। गंगोत्री से गंगासागर तक – भगवा ही भगवा!
-सुरेश गोयल धूप वाला