लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

Posted On by &filed under कला-संस्कृति.


डॉ. वेदप्रताप वैदिक

आजकल मैं मुंबई आया हुआ हूं। यहां मेरे व्यक्तिगत मित्रों और सिने जगत के कुछ सितारों से भेंट हो रही है। आज सुबह के अखबारों में बड़ी खबर यह है कि 9 अक्तूबर को होनेवाली गुलाम अली की महफिल रद्द हो गई है। गुलाम अली दक्षिण एशिया का बड़ा नाम है। वे पाकिस्तानी हैं लेकिन पड़ौसी देशों में भी वे उतने ही लोकप्रिय हैं। घर-घर में उनकी गज़लें सुनी जाती हैं। भारत में अक्सर उनके कार्यक्रम होते रहते हैं।

मुंबई में उनका कार्यक्रम रद्द क्यों हुआ? इसलिए कि शिव सेना ने उसका विरोध किया। शिव सेना के मुखिया का कहना है कि वे गुलाम अली के विरोधी नहीं हैं। वे पाकिस्तान के विरोधी हैं। इसीलिए गुलाम अली का कार्यक्रम नहीं होने देंगे। उन्होंने पहले भी पाकिस्तानी खिलाडि़यों को मुंबई में घुसने नहीं दिया था। शिव सेना का तर्क बिल्कुल असरदार होता, अगर इस समय भारत-पाक युद्ध चल रहा होता लेकिन अभी तो राजनीतिक वार्ता-भंग का दौर चल रहा है। ऐसे में कई दूसरे तार जुड़े रहें, यह ज्यादा जरुरी है। दोनों देशों में ऐसे करोड़ों लोग हैं, जो आतंकवाद और युद्ध के विरुद्ध हैं। आपने सिर्फ मुंबई में अपनी मनमानी कर ली तो क्या हुआ? सारे भारत के साथ पाकिस्तान का व्यापार चल रहा है या नहीं? ये ही गायक और कलाकार भारत के अन्य शहरों में अपने कार्यक्रम कर रहे हैं या नहीं? दोनों देशों के दूतावास एक-दूसरे की राजधानियों में खुले हैं या नहीं? दोनों देशों के बीच रेलें, बस और जहाज चल रहे हैं या नहीं? दोनों देशों के बीच फोन और इंटरनेट पर हजारों लोग एक-दूसरे से संपर्क में हैं या नहीं? इन सबको या तो बंद करवाइए, अगर आप में दम हो तो? या फिर बेचारे मुंबई के लोगों को आप अपने दिमागी कठघरे में क्यों बंद कर रहे हैं? यदि आप ठीक हैं और आप में कुछ दम है तो आप केंद्र सरकार को अपने रास्ते पर लाइए। वरना आप मजाक का विषय तो पहले ही बन चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार में आप हैं। इसके बावजूद उसने कहा है कि यदि गुलाम अली का कार्यक्रम होता है तो उसे पूरा संरक्षण मिलेगा। यदि आप में ज़रा भी नैतिक बल होता तो ऐसी ‘देशद्रोही’ सरकार में आप एक क्षण भी नहीं रहते लेकिन आप मंडिमंडल में टिके हुए हैं। इस मोटी खाल की राजनीति करनेवालों के मस्तक पर जनता चंदन लगाएगी या कालिख पोतेगी?

शिवसेना का यह तर्क हम मान लें कि ये पाकिस्तानी कलाकार सिर्फ पैसा बनाने के लिए भारत आते हैं तो भी वह यह क्यों भूल जाती है कि ये इन कलाकारों का निहित स्वार्थ क्या इस बात में नहीं होगा कि भारत के साथ उनके देश पाकिस्तान के संबंध अच्छे बने रहें? कलाकारों से यह उम्मीद करना कि वे राजनीति में सीधी दखलंदाजी करें, ज़रा ज्यादती है। बेहतर हो कि हम कला को राजनीति के दलदल में न घसीटें। अपनी विदेश नीति का हम सांप्रदायिकीकरण न करें। विदेश नीति के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हम प्रांतीय राजनीति की संकीर्ण चैखट में ठोक-पीट कर फिट क्यों करें?

One Response to “गुलाम अली: शिवसेना का कुतर्क”

  1. mahendra gupta

    शिव सेना को यदि पाकिस्तानी कलाकारों से इतनी घृणा हे तो उसकी नाक तले बनने वाली बंबइया फिल्मों में पाकिस्तान के कलाकार हीरो की भूमिका कर रहें हैं व करते आये हैं ,वहां की नायिकाओं ने भारतीय फिल्मो में अपनी भूमिका निभाई है , वहां के अन्य गायक यहाँ फिल्मों में गाने गए रहे हैं, तब उन पर रोक क्यों नहीं लगा रही है या लगाती है , तब उसका विरोध कहाँ दुबक जाता है ?ZEE का एक चैनल” ज़िंदगी” केवल पाकिस्तान के धारावाहिक ही दिखा रहा है , क्या उसकी आँखें बंद हैं ?यह मात्र एक राजनीतिक स्टंट है और कुछ नहीं यदि शिवसेना में इतना डीएम खम है तो उसे दिल्ली में भी यह शो नहीं होने देना चाहिए, इन अन्य कलाकारों पर भी रोक लगाने के लिए निर्माताओं से कहना चाहिए , खेलों में भी भारत की टीमें पाकिस्तान के साथ मैच खेलती हैं बेशक देश के बाहर खेलें क्या वह उन पर रोक लगाने की क्षमता रखती है ?यह केवल अस्तित्व के संकत से झूझ रही पार्टी की एक हताशा मात्र है

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *