किसी को उस ने कबीरा बना दिया

man vsकिसी को उस ने कबीरा बना दिया
किसी को कृष्ण की मीरा बना दिया !
उसकी रहमतों का मै जिक्र क्या करूं
मैं कांच का टुकड़ा था हीरा बना दिया !
किसी को खुशियों की सौगात दे दी
किसी को दर्द का जज़ीरा बना दिया !
धूप और बारिश की दरकार जब हुई
आसमा को इनका ज़खीरा बना दिया !
सुलगती रह गई चरागों में हसरतें
सितारों को उस ने जंजीरा बना दिया !
समझ में नहीं आई कारीगरी उस की
धनवान किसी को फकीरा बना दिया !

1 thought on “किसी को उस ने कबीरा बना दिया

  1. गुप्ता जी महिमा कर रहे हैं या आरोप लगा रहे हैं उस पर? “कर्म का सिद्धांत” और कर्म फल की प्राप्ति का अद्ध्ययन जरूर कीजिये।

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