हिंदी भाषा के हृदय का दर्द

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मैं भारत से हिन्दी बोल रही हूँ
अपने ह्रदय की पीड़ा खोल रही हूँ
मेरी आवाज कोई नही यहाँ सुनता है
अंग्रेजी भाषा का जाल यहाँ बुनता है

मेरे देश में ही मेरा बुरा हाल है
विदेशी भाषा पर ठोकते ताल है
कोई नहीं करता मेरा ख्याल है
यही मेरे मन में बड़ा मलाल है

कैसे सुनाऊ मै तुमको कहानी
अपनों द्वारा मैं यहाँ सताई हूँ
मेरे दर्द को जरा तुम समझो
मैं अपने देश में बनी पराई हूँ

मेरे लहू का यहाँ बन गया पानी
कैसे कहूँ मैं अपने दर्द की कहानी
वर्ष में एक बार याद कर लेते है
जैसे कोई मेरा श्राद्ध मना लेते है

कहने को मेरा अपना विभाग है
अंग्रेजी को मिले आदर का भाग है
मैं अलग से बैठा दी जाती हूँ
अछूत बन कर  रह जाती हूँ

मेरे देश में मुझको नहीं जानते है
मुझको जरा नहीं यहाँ पहचानते है
हिंदी भाषा के किते स्वर व्यजन है
ये तक बच्चे यहाँ के नहीं जानते है

अंग्रेजी भाषा को यहाँ जानते है
उसको ही यहाँ सब पहचानते है
अंग्रेजी भाषा में कितने अक्षर है
अच्छी तरह से उनको जानते है

आर के रस्तोगी   

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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