राजनीति

राम से शत्रुता और इस्लाम से मित्रता पुरानी विरासत है

– दिव्य अग्रवाल

अत्यंत पीड़ा होती है यह देखकर की पुरे विश्व में हिन्दुओ का एक ही राष्ट्र बचा है जिसे राष्ट्रवादी लोग भारत माता कहते हैं पर इसको दुर्भाग्य कहें या विडंबना भारत का ही हिन्दू सनातन के विपक्ष में खड़ा होकर इस्लामिक तुष्टिकरण में अपना जन्म और प्राप्त होने वाली मृत्यु के सत्य को भी विस्मृत कर देता है। ज्यादा कुछ न कहते हुए सीधी बात जिनको राम नाम से आपत्ति थी जिन्होंने राम मंदिर की जन्म स्थली के अस्तित्व को सदैव नकारा जो प्रभु राम मंदिर में दर्शन करने में भी अपने मन में कटुता का भाव रखते हैं जिन्हे सनातनी व्यवस्थाओं में सदैव कमी नजर आयी उन लोगो ने न तो कभी मोहम्मद रसूल पर कभी खुले मन से चर्चा की और न ही कभी इस्लामिक कमियों के बारे में कभी चर्चा की। जिन लोगो को श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट में कमी नजर आती है उन्होंने कभी जमीयत उलेमा ऐ हिन्द जैसी इस्लामिक संस्था की जांच की मांग नहीं की , धन का दुरूपयोग होना , संस्था में भ्रस्टाचार होना , चोरी होना किसी भी संस्था में हो सकता है लेकिन किसी संस्था की स्थापना ही इस्लामिक वर्चस्व को बढ़ाना ,मजहब के नाम पर अपराधियों की भी मदद करना , गैर इस्लामिक समाज के प्रति एक पूरी इस्लामिक फौज खड़ी करने की तैयारी  जैसे कटटरपंथी कार्य भी तो मजहबी दान से ,जकात से ,आर्थिक सहयोग से ही होते होंगे न, पर उस पर आज तक कोई सार्वजानिक चर्चा नहीं हुई इतना ही नहीं इस्लामिक हलाल सर्टिफिकेट से अर्जित धन कहाँ और किस उपयोग के लिए लगता है इस पर कोई चर्चा नहीं हाँ लेकिन कुछ संस्कार विहीन चोरो ने अपने व्यक्तिगत महत्वकांक्षाओं की पूर्ति हेतु राम मंदिर के धनकोष में चोरी क्या की लोगो ने इस चोरी को सनातन धर्म का षड्यंत्र ,संस्थाओं की मिलीभगत न जाने क्या क्या आरोप लगाने शुरू कर दिए भाई एक बात समझ लो जो लोग और जिनके पूर्वज तक प्रभु श्री राम का मंदिर बनने देना नहीं चाहते थे और जिन्होंने सनातन धर्म और सनातनी समाज को अपमानित करने हेतु न जाने कितने मंदिरो और सनातनी आश्रमों में रोजा इफ्तारी एवं इस्लामिक नमाज का आयोजन कराया आपको क्या लगता है को वो कभी सनातन धर्म और प्रभु श्री राम के प्रति सकारात्मक भाव रख सकते हैं ।

एक मोटी सी बात जिन्हें  राम पर विश्वास है जिन्हे राम में आस्था है जिन्होंने  सनातनी आस्था स्वरूप मंदिर में दान आदि किया क्या उन्हें इतना नहीं पता की इस धर्म दान में चोरी करने वालों की क्या दुर्गति होगी लेकिन आस्था होते भी धर्म विरोधियों की बातों में आकर समूची मंदिर ट्रस्ट को अपमानित करना , सनातन धर्म पर आघात करना क्या यह उचित है।

अच्छा एक बताओ क्या राम मंदिर में दर्शन करने हेतु ,व्हील चेयर हेतु ,लॉकर हेतु ,मंदिर प्रसाद व्यवस्था हेतु भोग आरती हेतु कोई शुल्क है क्या, नहीं यह बिलकुल निशुल्क है तो ट्रस्ट तो एक भी रुपया श्रद्धालुओं से आय के रूप में अर्जित नहीं कर रही हाँ यह जरूर है की कुछ लोगो ने चोरी की है तो इससे पूरी व्यवस्था तो अपमानित नहीं हो सकती।

अयोध्या त्याग की भूमि है मंथरा जैसे लोग न तब कम थे और न आज कम हैं कुत्सित , कुंठित मानसिकता वाले षड्यंत्रकारी लोगो ने निजी लाभ हेतु तब भी आरोप लगाए थे और आज भी लगा रहे हैं पर अयोध्या और प्रभु श्री राम की आस्था न तब कम थी न आज कम होगी।

हाँ जिन लोगो को चोरी चकारी और धर्म दान की वास्तविक चिंता है तो ऐसे जागरूक लोगो को अपनी जागरूकता उस इस्लाम के प्रति भी दिखानी चाहिए जिनसे उन्हें जन्म जन्मांतर से स्नेह है श्री अयोध्या राम ट्रस्ट से पुरानी और धनाढ्य संस्था जमीयत उलेमा ऐ हिन्द , हलाल सर्टिफिकेट से अर्जित कोष का ऑडिट और जकात के रूप में दिए गए दान की जांच की मांग कर इस्लाम के प्रति अपनी चिंता को प्रमाणित करना चाहिए अन्यथा यह तो वो ही बात हुई चाहे कुछ हो पर राम से शत्रुता और इस्लाम से मित्रता निभाने हेतु जो करना पड़े वो सेकुलरवादी और मुस्लिम तुष्टिकरण से ग्रसित लोग जीवन भर यही करेंगे।