कविता

कैसे बताऊं मेरे कौन हो तुम

कैसे बताऊं,मेरे कौन हो तुम,
मेरी जिंदगी में समाए हो तुम।

मेरे चांद हो तुम मेरे सूरज हो तुम,
मै तुम्हारी धरा मेरे गगन हो तुम।
तुम बिन होत नही कही उजियारा
मेरे जीवन के प्रकाश भी हो तुम।।

मेरे गीत हो तुम मेरे संगीत हो तुम
मेरे मीत हो तुम मेरी प्रीत हो तुम।
तुम्हारे बिन सूना है सारा संसार
मेरी हर इच्छा की आस हो तुम।।

मेरे मंदिर भी तुम मेरी पूजा भी तुम,
मेरे देवता भी तुम मेरे प्रभु भी तुम।
तुम्हारे बिन कोई पत्ता नही हिलता,
तीनों लोको के पालनहार हो तुम।।

मेरे मांग के सिंदूर तुम मेरे पांव के बिछुवे तुम
मेरे माथे की बिंदी तुम मेरे कान के कुंडल तुम।
तुम बिन हो नही सकता मेरे श्रृंगार,
मेरे जीवन के सोलह सिंगार हो तुम।।

मेरी नींद भी तुम,मेरे ख्वाब भी तुम,
मेरे दिन भी तुम,मेरी रात भी तुम।
रह नही सकती तुम्हारे बिन एक पल,
मेरे सुबह भी तुम,मेरी शाम भी तुम।।

मेरा हंसना भी तुम,मेरा रोना भी तुम,
मेरा गम भी तुम,मेरी खुशी भी तुम।
महसूस न कर सकती इनको तुम्हारे बिना,
मेरे सारे जीवन का आधार हो तुम।।

मेरे जीवन का हर सुहाग हो तुम,
मेरे जीवन का हर आधार हो तुम।
तुम्हारे बिन जीवन का आधार न कोई,
सारे संसार में बस एक ही मेरे हो तुम।।

आर के रस्तोगी