कैसे करू उनसे बात ?

आर के रस्तोगी

घन घोर घटाये घिर रही ,
रुक रुक हो रही बरसात |
साजन है मेरे परदेश में ,
कैसे करू, उनसे बात ?

दम दम बिजली दमक रही ,
अब दिन भी हो गया रात |
दिन तो कैसे तैसे कट गया ,
कैसे कटेगी ये अँधेरी रात ?

ठंडी ठंडी हवा है चल रही,
ठण्ड से ठिठुर गया गात |
साजन तो मेरे पास नहीं ,
कैसे गर्म होगा ये गात ?

खनक खनक के कह रही ,
चूड़ियाँ अपने दिल की बात |
साजन तो बहुत दूर है ,
कैसे सुनेगे चूड़ियों की बात ?

सरक सरक इशारे कर रहा,
सीने पर पड़ा मेरा दुपट्टा |
अब तो इशारा समझ जाओ
कैसे दिल होगा मेरा पठ्ठा ?

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम मो 9971006425

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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