कितने हिन्दू?

कहते हैं भारत
बहुसंख्यक हिन्दुओं का देश है
अक्सरा चिंता जताई जाती
कि अल्पसंख्यकों की
अस्मिता और अस्तित्व को
शीघ्र लील जाएगा
भारत का बहुसंख्यक हिन्दू
तो क्यों नहीं करा लेते सर्वेक्षण
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
कौन हैं हिन्दू/कितने हैं हिन्दू?
हलो! तुम कौन हो?
मैं कश्मीरी/मैं पंजाबी/मैं मराठा/
मैं गुजराती/मैं बंगाली-
मैं उडि़या-असामी-नागा-कूकी-
दीमाशा-मीजो-मिश्मी-तांखुल-मैतेयी
मैं तमिल-तेलुगु-कन्नड़-मलयाली
द्राविड़ दक्षिण भारतीय!
और हलो! हल्लो! तुम कौन हो?
बोलो तुम कौन हो
हिन्दी क्षेत्र के बी-मा-रु?
बीमार बोलते नहीं
तीमारदारों से पूछो
पंडित की पोथी पलटो
या खद्दरधारियों का खाता
क से कलाल,कलवार, कलचुरी,
कायस्थ,कानू, कोरी, कुर्मी,कादर
ख से खत्री, खेतौरी,
ग से गोप,ग्वाला, गड़ेरिया
घ से घटवार,घटवाल,
च से चपोता, चर्मकार
छ से छत्री, छूतहर,
ज से जदु,जदुजा, जडेजा,जाट
ठ से ठठेरा,
त से तेली,तमोली, तांती,
द से दुसाध,
ध से धानुक,धुनियां, धोबी,
न से नाई, नोनिया,
प से पनेरी, पासी,
ब से बनिया,बाभन, ब्राह्मण
भ से भूमिहार, भूईयां,
म से माहेश्वरी, मेहरा, मयरा
र से राजपूत,राजभर,रौनियार
स से सुदी, सुड़ी, सुंडी,सुढ़ी, सोढ़ी,
श से शुण्डी,शौण्डिक,शूरसेनी,शौरि—
माफ कीजिए एक ही जाति की
अनेक उप जातियां,
कोई किसी से कम नही,
मानसिकता ऐसी
कि आज एक कृष्ण सिंह
दूसरे कृष्ण मंडल से
कंश सा व्यवहार करता है
वही कृष्ण सिंह दुर्योधन सिंह से
प्यार करता है
कृष्ण झा से मिलकर
मुहूर्त विचारता है
कि कैसे कृष्ण मृग का
शिकार किया जाए?
कि स्टेट पब्लिक सर्विस
कमीशन/पर्षद का वही कृष्ण सिंह
शीर्ष पद पा जाता है
और घोटाला का पर्याय बन जाता है
ऐसे में कृष्णा दास/कृष्णा मराण्डी
धनहीन,वर्णहीन, गमगीन,
आत्मबलहीन क्या करेगा?
अस्तु धर्म से शैव/शाक्त/वैष्णव/
आर्य समाजी/वीर शैव/लिंगायत/
भारशिव/सनातनी/प्रकृति पूजक/
टोटमवादी/सरना/विदिन/आदिवासी/
मूलवासी,जाति उपाधि से
झा-सिंह-मंडल-दास-मांझी
पर व्यवहार में हिन्दू कोई नहीं
सब के सब करते
एक दूसरे की टांग खिंचाई!

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