लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै,

चारो तरफ है सन्नाटा ,अब क्या किया जाये ,
दिल बहलाने के लिये, अब कुछ लिखा जाये |
भेज दू क्या मै जो लिखता हूँ,मै तुम्हारे लिये ,
जिससे दिल की बाते,दिल को सुना दिया जाये |\

लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै,
हिम्मत नहीं होती है उसको बता दू मै |
पता नहीं ये दिल,कमजोर हो गया है क्यों ,
दिल से दिल के बाते कहता नहीं क्यों मै ||

पास होती तो लिखने की जरूरत पडती नहीं,
कलम कागज स्याही की जरूरत पडती नहीं |
कह लेता दिल की बाते,अपनी आँखों से तुमको ,
जब आँखे मिल जाती,कोई जरूरत पड़ती नहीं ||

ये हवाये भी बदचलन है पहले जैसी चलती नहीं ,
ये भी रूख बदल देती है हमारी बाते कहती नहीं, |
चलो इन हवाओं को रूख मोड़ दे और बाते करे ,
मौसम बदल चूका है,प्यार की बाते होती नहीं ||

तुम्हारे पास गंगा मेरे पास यमुना बह रही है अब ,
उनकी लहरों व बहाव के जरिये बाते करगे है अब |
दिल की किश्ती बनाकर, अरमान लिखते है अब ,
पकड़ लिया करो किश्ती पढेगे दिल की बाते है अब ||

चलो छोड़े ये पुरानी बाते,नई टेकनिक आ गई है अब ,
कागज कलम कासिद स्याही की जरूरत नहीं है अब |
ले लेते है एक अच्छा सा मोबाइल दोनों अब हम
उँगलियाँ ही चला कर दिल की बाते करेगे अब हम ||

आर के रस्तोगी

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