आदिवासी और अल्पसंख्यक नेता की खोज में है राहुल गाँधी

–पंकज चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश की राहुल गाँधी की तीन दिवसीय यात्रा राहुल के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और सिमी की समानता के बयान से सरगर्म रही, तो वही राहुल द्वारा कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश से दस आदिवासी और दस अल्पसंख्यक नेता की खोज का ऐलान भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। सिमी से तुलना के बयान ने तो कल भोपाल में भा.जा.पा. प्रदेश कार्यकारीणी के बैठक में अन्य मुद्दों को पीछे छोड़ दिया सबने ने राहुल के बयान की निंदा को प्राथमिकता दी और साथ मुख्य –मंत्री शिवराज से ये सवाल भी पूछा गया की राहुल को राज्य अतिथि का दर्जा क्यों?

कांग्रेस की सबसे बड़ी उम्मीद राहुल गाँधी ने युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव में जान फूंकने के उद्देशय से मध्य प्रदेश के विभिन्न भागों का दौरा कर, यहाँ प्रयास किया की आदिवासी बाहुल्य इस राज्य में कांग्रेस को भविष्य के लिए आदिवासी और अल्पसंख्यक नेता मिल सकें। राहुल कांग्रेस महासचिव के तौर पर देश भर में कांग्रेस के छात्र संगठन और युवा इकाई के प्रभारी है और ऐसा प्रयास कर रहें है की ये दोनों संगठन कांग्रेस के बड़े नेताओं के कथित चुंगल से मुक्त हो सकें। ये बात और है की अभी राहुल के इस प्रयोग के परिणाम भविष्य के गर्त में है।

पर इस दौरे में उनके बयान एक बार फिर चर्चा में है ,प्रदेश में काबिज भारतीय जनता पार्टी ने आर.एस.एस.की सिमी से समानता पर ऐतराज जताते हुए राहुल को भारत की संस्कृति के अध्ययन की सलाह दी है। राहुल का ये बयान उनके के कथित राजनैतिक गुरु दिग्विजय सिंह के सामान ही है,जो समय –समय पर इसी आशय के बयान देते रहते है।

राहुल ने इस बयान के अलावा इस दौरे स्वयं को सिर्फ युवा कांग्रेस तक ही सिमित रखा और ये प्रयास किया की प्रदेश में मुख्य कांग्रेस संगठन का सामंजस्य इस युवा इकाई से बना रहें और दोनों के मध्य किसी प्रकार का गतिरोध ना आने पाए, इस के चलते उज्जैन में प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारीणी को बुलकर समझाइश भी दी गयी और लताड भी लगई की प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेताओं की गुटबाजी खत्म हो, नही तो आपस में लड़ते-लड़ते कहीं कांग्रेस का हाल भी यहाँ यू.पी., बिहार जैसा ना हो जाये। और राहुल कि ये आशंका बेमानी नहीं है आज भी मध्य-प्रदेश में मुस्लिम कांग्रेस के साथ ही है. लेकिन तब तक, जब तक की कोई अन्य सशक्त विकल्प नहीं है, वैसा ही कुछ आदिवासी मतदाताओं का भी है गोंडवाना गणतन्त्र जैसे कई आदिवासी दल जब–तब कांग्रेस को आंख दिखाते रहतें है। राहुल ने शायद इस बात को समझ लिया है और इसीलिए इस प्रदेश से नए और नौजवान आदिवासी और अल्पसंख्यक नेता को ढूढने के बात करी है। प्रदेश कांग्रेस का युवा संगठन को सहयोग एवं मार्गदर्शन भी अति अवशक है, जिसकी कि कमी महसूस की जा रही है।

प्रदेश में नए कांगेस अध्यक्ष के मुद्दे पर राहुल के दो टूक इंकार से इस कुर्सी के दावेदारों को झटक लगा है, राहुल ने मीडिया से चर्चा में और नेताओं से बात में ये स्पष्ट कर दिए की वे इस मामले में दखल नही करेंगे और हमेशा की तरह प्रधानमंत्री की प्रशंसा कर अपने प्रधानमंत्री बनने के बारें में किये गए सवालों को भी टाल दिया।

2 COMMENTS

  1. कोई आश्चर्य नहीं. कोंग्रेस हमेशा जातिवादी उभार का घिनौना खेल खेलकर अपनी राजनीतिक दूकान चलाती रही है.
    उत्तर प्रदेश में वह मायावती के खिलाफ सवर्णों और मध्यम वर्ग को ललचाने में लगी है तो एम् पी में ठीक उसके उलटा.

  2. भावी प्रधानमन्त्री है, बालक कहो अज्ञ। यह् कुछ भी बोले मगर, मानो इसे सुविज्ञ। मानो इसे सुविज्ञ, नहीं तो बदला लेगा। प्रधान बनकर सबको जेल में फ़िर भेजेगा। कह साधक इस देश मे वट चलता सन्तरी का। राहुल प्रत्याशी हैअ भावी प्रधान मन्त्री का।

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