क्या भारत सबक लेगा अमेरिका से?

कुंवर वीरेन्द्र सिंह ”विद्रोही”

दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन ‘अलकायदा’ का मुखिया अमेरिका में 9/11 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के मास्टर माइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से महज कुछ किलोमीटर दूरी पर एबटाबाद में 40 मिनट के सोर्ट एनकांउटर में मार गिराया। अमेरिका की इस सुनियोजित कुशल सैन्य कार्यवाही ने दुनियां को हैरत में डाल दिया है।

अमेरिका की गुप्तचर संस्था सी आई ए की सराहना जितनी की जाए कम होगी, क्योंकि पाक के सैन्य इलाके में छिपा लादेन को खोज निकालने के लिए कितने दिनों तक गुप्तचरों को अपना काम करना पड़ा होगा, लादेन के खात्मे की रणनीति 2010 से ही चल रही थी। धन्यवाद के पात्र हैं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जिनके कुशल नेतृत्व में आतंक का पर्याय बन चुका लादेन का खात्मा किया गया।

पाक का आतंकी चेहरा बेनकाब हो चुका है। क्या भारत अमेरिका की इस कार्यवाही से सबक लेगा? कांग्रेस की केंद्रीय सत्ता ऐसा करने में मानसिक रूप से अक्षम है। थल सेनाध्यक्ष एके सिंह ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत अमेरिका जैसी कार्यवाही करने में सक्षम है। इस टिप्पणी की कांग्रेस सरकार ने तीखी आलोचना की है। वोटबैंक और कुर्सी लोलुप कांग्रेस सत्ता राष्ट्रीय सुरक्षा में नाकाम है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी दिग्गी राजा फरमाते हैं कि ओसामा जी को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार सम्मान सहित दफनाया जाना चाहिए था। आखिर एक आतंकी के प्रति इतना श्रध्दाभाव की वजह क्या हो सकता है? कथित धर्मनिरपेक्ष कांगेस वोटबैंक की खातिर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। अमेरिका की तरह घर में घुसकर मारने की बात तो छोड़िए जनाब! हम तो अपराध सिध्द आतंकवादियों को जेलों में पनाह देकर पोषण दे रहे हैं। क्यों! हम शिखंडी हो गए हैं।

संसद पर हमले का मास्टर माइंड अफजल गुरु, मुंबई होटल ताज पर हमले का दोषी आतंकी अजमल कसाब को तिहाड़ जेल में चिकन बिरयानी खिलाकर शाही दावत दे रहे हैं। क्यों! ऐसी क्या मजबूरी है? फांसी देने में जब मामला साफ हो चुका है। अजमल कसाब और अफजल गुरु खतरनाक अपराधी है। लेकिन हमारी केंद्रीय सत्ता मानसिक रू प से पक्षाघात से पीड़ित है। करोड़ों रूपये उनकी सुरक्षा और शाही पोषण पर खर्च कौन-सी अक्लमंदी का काम कर रहे हैं? इससे पहले की पानी सर से उपर चला जाए, हमें जल्द अजमल कसाब अफजल गुरु को सजा-ए-मौत दे देनी चाहिए, यही राष्ट्र और समाज के हित में होगा। अन्यथा फिर कही इतिहास न दोहराया जाए कि कोई हवाई जहाज हाईजैक किया जाए, फिर कोई मुख्यमंत्री की बेटी डॉ. रूबिया सईद का अपहरण का ड्रामा खेला जाए, और हमारे प्रधानमंत्री आतंकी लीड को तिहाड़ जेल से निकालकर शाही सम्मान के साथ पाक राजधानी इस्लाबाद विदाई देकर आए।

क्या डॉ. रूबिया जैसीबेटी देश के लिए शहीद नही हो सकती थी जिसके बदले 20 खुंखार आतंकवादियों को रिहा किया गया। उन्होंने कितनी हीं बहु-बेटियों की आबरू को तार-तार किया होगा, कितने ही हिन्दुओं का कत्ल किया होगा। लेकिन इस बात से नेताओं को क्या वास्ता, उन्हें तो अपनी बेटी की चिंता थी, इसलिए 20 आतंकियों को छोड़ दिया गया और आज वही रूबिया विधायक बनकर कश्मीर विधानसभा में माइक तोड़ और गमले फोड़कर रूतवा बुलंद कर रही है।

अमेरिका की सी आई ए गुप्तचर संस्था ने पाक सैन्य इलाके में लादेन की खोजकर उसी के घर में ही मार डाला। और एक हमारी गुप्तचर संस्था है सी बी आई जो पाक पर दबाव बनाने के लिए आतंकी व अंडरवर्ल्ड अपराधियों की सूची सौंपी है। उसके कई अपराधी भारत में ही मजे ले रहे हैं।

फिरोज अब्दुल खां उर्फ हमजा मुंबई आर्थर रोड जेल में बंद है। लानत है ऐसी गुप्तचर संस्था पर जिसके नाक के नीचे अपराधी और वे खोज रहे हैं। पड़ोस में, इससे पहले मोस्ट वांटेड सूची में शामिल आतंकी अजहर कमार खां मुंबई में सपरिवार रह रहा था।

आखिर हम अमेरिका की तरह सैन्य कार्यवाही क्यों नहीं कर सकते? इसके कारण है राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति ठुलमूल रवैया, निजी स्वार्थों का सर्वाधिक महत्व देना, राष्ट्रीय भावना की कमी। जिसके कारण हम क भी एकमत नहीं होते हैं। आखिर क्यों?

जब निजी स्वार्थ, वेतन भत्ता और अन्य सुविधाओं की बात आती है तब सभी दलों के नेता एक हो जाते हैं। बाकी मुद्दों पर कभी सहमत क्यों नही होते। जबकि अन्य पश्चिमी राष्ट्रों में राष्ट्रीय मुद्दों पर सभी पार्टियां एक हो जाती है। ओबामा की इस सैन्य कार्यवाही का समूचे अमेरिका ने स्वागत किया है। किसी ने भी इसका विरोध नही किया। लेकिन हमारे यहां के नेता तो भारतीय नागरिकों की चिंता छोड़कर आतंकवादियों की सेहत का ज्यादा ख्याल रखते हैं। यही कारण है की सब प्रकार से सक्षम होने के बावजूद भी हम अमेरिका की तरह कार्यवाही नहीं कर सकते। नेता भ्रष्टाचार के दल-दल में घुटनों तक सने हैं। भारत दुनियां के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी देश की ओर अग्रसर होता जा रहा है। विदेशों में तो राष्ट्रद्रोही को मृत्युदंड दी जाती है। पर भारत में किसी को भी सजा-ए-मौत नही दी जा सकी। दरअसल, उन्हें फांसी देने की बात छोड़िए। ऐसा तो विचार करना भी पाप होगा क्योंकि इस मामले में हम अहिंसा के पुजारी गांधी, गौतम और महावीर के अनुयायी जो हैं। यहां तो अफजल और कसाब को फांसी नही दी जा सकती, बल्कि उनकी सुरक्षा और सेहत पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जाता है।

जबतक देश में कें द्र की शिखंडी सरकार रहेगी, तब तक देश का धन और जांवाज सैनिकों का लहू पानी की तरह बहाया जाता रहेगा। हजारों वर्षों की गुलाम मानसिकता को ढ़ोने की आदी हो गए हैं। राष्ट्रभक्त युवाओं को आगे आना होगा और भ्रष्ट मंत्रियों को सबक सिखाना होगा। देश में जब तक ऐसा कानून नही बनेगा कि देश की सुरक्षा मामलों में जल, थल और वायुसेना अध्यक्षों को स्वतंत्र निर्णय का अधिकार होना चाहिए। कोई राजनैतिक हस्तक्षेप नही होना चाहिए।

* लेखक स्वतंत्र चिंतक हैं।

1 COMMENT

  1. दो बातें मैं कहना चाहता हूँ.पहला तो यह की सी आई ए के सम तुल्य भारतीय संस्था रा है,सीबीआइ नहीं.दूसरी बात अमेरिका की क्षमता से भारत के क्षमता के तुलना की तो लेखक का विचार सही है की हमारे यहाँ किसी भी मामले में राष्ट्रीय सहमती बनना आसान नहीं हैं क्योंकि हमारा चरित्र और हमारा राजनैतिक ढाँचा ऐसा है की हम स्वार्थ से उपर उठ ही नहीं सकते .फिर देश और राष्ट्र के बारे में क्या सोचेंगे?ऐसे भी अमेरिका की भ्रतष्णा हम जितना भी कर लें पर राष्ट्रीयता के मामले में पश्चिमी राष्ट्रों और जापान की चरण धूलि के बरा बर भी हम लोग नहीं हैं.इस बात का प्रमाण भ्रष्टाचार.काले धन का अर्थ शास्त्र ,हमारा सार्वजनिक और निजी चरित्र इत्यादि हर कार्य कलापों से मिलता है.

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