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भारत की पहली महिला जासूस नीरा आर्या जिसने देशहित में किया अपने पति का कत्ल , लेकिन सरकार से मिली बेरूखी

अंग्रेजों ने कटवा डालें थे स्तन, लेकिन नहीं खुलवा पाए थे नीरा आर्या का मुंह

भगवत कौशिक। चंडीगढ़ : साल 1857 से लेकर 1947 तक भारत की आजादी के लिए खूब कोशिशें हुईं।कई आंदोलन और जंग लड़ी गईं, जिनमें सैंकड़ों वीरों और क्रांतिकारियों ने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया। न जाने कितने ही वीर, वीरांगनाएं और सैनिक देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की बलि दे गए और कितने ही गुमनामी में मौत की नींद सो गए। ऐसी ही एक वीरांगना थीं नीरा आर्या, जिन्हें भारतीय सेना की पहली महिला जासूस माना जाता था।जिसने ऐशो-आराम, परिवार, विवाह और अंततः अपना शरीर तक देश की आज़ादी पर न्योछावर कर दिया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रक्षा के लिए अपने पति को भी मा’र डाला। जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं जेलर ने उनके स्तन तक काट दिए लेकिन निरा ने सुभास चंद्र बोस के बारे में एक शब्द तक नहीं बताया।

कौन हैं नीर आर्या?

नीरा आर्या उत्तर प्रदेश के बागपत के खेकड़ा की रहने वाली थीं और भारत की पहली महिला जासूस थीं। उनका जन्म साल 1902 में हुआ था और साल 1998 में उनका निधन हो गया था। उत्तर प्रदेश के एक संपन्न परिवार में जन्मी नीरा आर्य के सामने सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन था। लेकिन उन्होंने सुविधा नहीं, स्वतंत्रता चुनी। वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ीं और आज़ाद हिंद फौज की पहली महिला रेजीमेंट का हिस्सा बनीं। पर्दे के पीछे रहकर उन्होंने जासूसी का जोखिमभरा काम किया, जहाँ एक गलती की कीमत जान होती है।

सीआईडी इंस्पेक्टर से शादी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बचाने के लिए पति का कत्ल

नीरा आर्या की शादी सीआईडी इंस्पेक्टर जयरंजन दास से हुई थी। लेकिन दोनों में ही जमीन-आसमान का अंतर था। जहां नीरा सच्ची देशभक्त थीं, वहीं पति जयरंजन अंग्रेजों को पूजता और उनकी गुलामी करता था। बताया जाता है कि जयरंजन को एक बार नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जासूसी करने और उनकी हत्या करने का काम सौंपा गया। जयरंजन ने नीर्या आर्या को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी और नेताजी की जासूसी में लग गया। एक बार जब नीरा आर्या, नेताजी से मिलने गईं तो उसने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। फिर उसने मौका देखकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर गोलियां चलाईं, पर वो उनके ड्राइवर को जा लगीं। वहीं, नीरा मौजूद थीं। उन्होंने जब यह मंजर देखा तो पति को ही मौत के घाट उतार दिया। इसके कारण नेताजी ने उनका नाम ‘नीरा नागिन’ रख दिया।

जेल में हुई प्रताड़ित

जेल में कैद करने के बाद अंग्रेजी सैनिक उनसे नेताजी के बारे में जानकारी लेने की कोशिश करने लगे, जिसके बदले वे उन्हें बेल पर रिहा करने का लालच भी देते रहे, लेकिन अंग्रेजों के कई बार पूछने पर भी नीरा कहती थी कि उनकी हवाई दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। हालांकि, जेलर जानता था कि वो झूठ बोल रही हैं। फिर अनेकों बार पूछने पर नीरा कहतीं, ‘वो मेरे दिल में है।

जेलर ने कटवा दिया स्तन

लाख कोशिशों के बाद भी जब ब्रिटिश सैनिक नीरा की हिम्मत नहीं तोड़ पाए तो जेलर को यह अपमान बर्दाश्त नहीं हो पाया। ऐसे में उसने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए कहा, ‘ठीक है लाओ तुम्हारा दिल ही निकालकर देख लेते हैं।’ फिर क्या था जेलर ने नीरा का एक स्तन काटने का आदेश दे दिया। ब्रेस्ट रिपर के जरिए नीरा के दाएं स्तन को काटकर अलग कर दिया। इसके बाद जेलर ने नीरा को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिर ऐसी बदसलूकी की तो दूसरा स्तन भी काट दिया जाएगा।

भारत आजाद, जेल से रिहा हुईं तो किसी ने नहीं पूछा, गुमनामी में रहीं

जब भारत आजाद हुआ, तो नीरा आर्या को भी जेल से रिहा कर दिया गया। लेकिन बताया जाता है कि उन्होंने देश के लिए जो कुछ भी किया, उसे किसी ने तवज्जो नहीं दी। नीरा आर्या और उनकी वीरता को भुला दिया गया। बताया जाता है कि नीरा आर्या ने अपने आखिरी दिन गुमनामी में बिताए।नीरा आर्य जेल से रिहा हुईं पर न सम्मान मिला, न पदक और ही ना ही कोई पेंशन। वे हैदराबाद की सड़कों पर फूल बेचकर जीवन चलाने को मजबूर हुईं। 1998 में वे चुपचाप इस दुनिया से चली गईं। नीरा आर्य ने कुछ मांगा नहीं। उन्होंने सिर्फ दिया, अपना जीवन, अपना सुख और अपना भविष्य।