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    Homeसाहित्‍यकविताजप ले प्रभु का नाम तू बन्दे

    जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे


    जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे ,
    मत कर तू झूठा अभिमान बन्दे।
    झूठी है ये काया,झूठी है ये माया,
    मत कर तू इस पर गुबान बन्दे।।

    न कुछ लाया था,न कुछ ले जायेगा,
    मरने के बाद यही सब रह जायेगा।
    किसके लिए ये कुछ जोड़ रहा तू बन्दे,
    तेरा शरीर भी मिट्टी में मिल जाएगा बन्दे।।
    जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे।।

    जीते जी अच्छे काम कर ले बन्दे,
    मत पड़ तू माया के इस फंदे मे।
    माया बनी मकड़ी का जाल बन्दे,
    इसमें फसके मर जायेगा तू बन्दे।
    जप ले प्रभु का नाम तू अब बन्दे।

    झूठे हैं इस दुनिया के रिश्ते नाते,
    जीते जी भाते है ये सबको नाते।
    मरने के बाद टूट जायेंगे ये नाते,
    भूल जायेगी ये दुनिया सब नाते।।
    जप ले प्रभु का नाम भूल जा ये नाते।
    जप ले प्रभु का नाम तू अब बन्दे।।

    ऊंचे ऊंचे तूने ये महल है बनाऐ,
    मरने के बाद ये तेरे काम न आए।
    मिलेगी न दो गज जगह तुझको,
    फिर क्यों तूने झूठे स्वप्न सजाए।।
    स्वप्न छोड़ भज ले प्रभु का नाम बन्दे।
    भज ले प्रभु का नाम अब तू बन्दे।

    कोरोना का ये दौर है छाया,
    टूट रही है इससे सबकी काया।
    कहीं जल प्रलय पड़ रही भारी,
    कहीं हो रही बर्फ़ की मारामारी।
    ये प्रकृति का सब खेल है बन्दे,
    भज ले प्रभु का नाम तू बन्दे।।

    पढ़ा है तूने त्रिकोण षटकोण बन्दे,
    पढ़ा नहीं जीवन का दृष्टिकोण बन्दे।
    बदल ले जीवन का दृष्टिकोण बन्दे
    नकारत्मक से सकारत्मक हो बन्दे
    फिर न मिलेगा समय तुझे ये बन्दे
    भज ले प्रभु का नाम तू बन्दे।
    जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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