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    Homeसाहित्‍यकविताकरते सिक्के शोर !

    करते सिक्के शोर !

    क़तर रहे हैं पंख वो, मेरे ही लो आज !
    सीखे हमसे थे कभी, भरना जो परवाज़ !!

    आखिर मंजिल से मिले, कठिन साँच की राह !
    ज्यादा पल टिकती नहीं, झूठ गढ़ी अफवाह !!

    अब तक भँवरा गा रहा, जिसके मीठे राग !
    वो तितली तो उड़ चली, कब की दूजे बाग़ !!

    वक्त-वक्त का खेल है, वक्त-वक्त की बात !
    आज सभी वो मौन हैं, जिनसे था उत्पात !!

    जिनके सिर हैं पाप की, ब्याज समेत उधार!
    बनकर साहूकार वो, करने चले सुधार !!

    नोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर !
    केवल औछे लोग ही, दिखलाते हैं जोर !!

    बौने खुद औकात का, रखते कहाँ ख्याल !
    काँधे औरों के चढ़े, नभ से करें सवाल !!

    जीवन पथ पे जो मिले, सबका है आभार !
    काँटे, धोखा, दर्द जो, मुझे दिए उपहार !!

    क्या पाया,क्या खो दिया,भूलों रे नादान !
    किस्मत के इस केस में, चलते नहीं बयान !!

    वक्त न जाने कौन तू, वक्त बड़ा बलवान !
    भेजे वन में राम को, हरिश्चंद्र श्मशान !!

    जब तक था रस बांटता, होते रहे निहाल!
    खुदगर्जी थोड़ा हुआ, मचने लगा बवाल !!

    ✍ —प्रियंका सौरभ

    प्रियंका सौरभ
    प्रियंका सौरभ
    रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

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