लेखक परिचय

नरेंद्र भारती

नरेंद्र भारती

जर्नलिस्ट और कोलुंनिस्ट यूनिवर्स न्यूज़ पेपर & रिसेर्च सेंटर डिस्ट्रिक्ट मंडी हिमाचल प्रदेश

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boysआज रविवार था ,विजय को भी दफतर से अवकाश था । सोचा परिवार सहित बाजार घूमने चलें । विजय की पत्नी नेहा व बच्चे भी जल्दी से तैयार हुए और गाड़ी में बैठकर चल दिए । विजय की पत्नी नेहा व बेटी स्नेहा ने शापिगं की । खरीदारी करने के बाद विजय एक बुकस्टाल पर रूका और ताजा समाचार पत्र और स्टेशनरी का सामान खरीदा । विजय ने अपने दस वर्षीय बेटे मनु को पूछा , बेटे तुम भी कोई अच्छी सी सामान्य ज्ञान की वाली पुस्तकें ले लो। विजय के बड़े बेटे ने बुक स्टाल पर रखी अनेक पुस्तकें देखी ,लेकिन उसे कोई पुस्तक अच्छी नहीं लगी । तभी विजय के छोटे बेटे राजू ने कहा पापा मुझे वह सामने वाली पुस्तक पसंद है इसे मुझे खरीद लो ,राजू का इशारा एक अश्लील पुस्तक की तरफ था। विजय के पैरों तले जमीन खिसक गई । विजय कभी दुकानदार की तरफ तो कभी राजू की तरफ देख रहा था।

One Response to “लधुकथा(पुस्तकवध्द)”

  1. vinod rahi

    bharti ji ki yeh lagukatha logo ko chetane ke liye ek achha prayas hi.

    Vinod Rahi
    962596500

    Reply

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