लेखक परिचय

अखिल कुमार (शोधार्थी)

अखिल कुमार (शोधार्थी)

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 आज रास्ते में रमेश मिला  था. चेहरे पर चार  इंच  की  उगी  झाड़ियों में से झांकते चेहरे को मैं नहीं  पहचान  पाया  किन्तु  मेरा  उन्नत  ललाट  उसकी  समझ  से दूर  नहीं  रहा. अचानक उसने मुझे पुकारा तब मैंने आवाज़ के आधार पर कद-काठी देखकर कयास लगाया कि यह तो रमेश होना चाहिए और वो रमेश ही निकला. कोई सफाचट गाल वाला यदि चेहरे पर अचानक दाढ़ी कि खेती करने लगे तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं- ‘या तो वह प्रेम में खुद को घायल रूप में प्रस्तुत कर रहा है या वो अचानक बौद्धिक उर्फ़ मार्क्सवादी में तब्दील हो गया है’.  मैंने कयास लगाया कि वो शहीद भगत सिंह कि उम्र से ज्यादा का हो चुका है मतलब उसकी साम्यवाद से प्रभावित होने कि उम्र जा चुकी है अतः हो न हो वह या तो प्रेम में घायल है या विरहपीडित.

उसने मुझसे पूछा ”कैसे हो”.

मैंने कहा ”मजे में”, लेकिन मैंने उससे नहीं पूछा कि ”तुम कैसे हो”. थोड़ी देर बाद वह कुलबुलाने लगा जिसका मतलब मैंने निकला कि वह मजे में नहीं है और यदि है भी तो दिखाना नहीं चाहता. मैंने सोचा पूछ लूँ कि दाढ़ी का राज क्या है नहीं तो कहीं चलते-चलते न पूछने कि गुस्ताखी के कारण मुझसे झगडा न कर ले. वैसे भी जब आदमी ”कैसे हो” पूछने पर उत्तर दे ”एकदम फिट” तो मतलब होता है कि वो मजे में है और यदि वो मुंह बिचकाकर ठंडी साँस छोड़ता हुआ उत्तर दे ”ठीक ही हूँ” तो इसमें का क्षेपक ”ही” इस बृहद अर्थ को दर्शाता है कि या तो वो ठीक नहीं है या खुद को बेठीक रूप में प्रस्तुत करना चाहता है. पूछने पर उसने कुछ नहीं बताया लेकिन अचानक उसकी मोबाइल के स्क्रीन पर एक अपरिचित जनाना तस्वीर देखकर मैंने कयास लगाया कि हो न हो यह लड़की इसके साथ पढ़ती होगी या कम से कम इसकी जानकार होगी. पहले यह रमेश कि नज़रों में आई होगी,फिर बातों में और फिर दिल व जिगर के विशाल भूभाग पर इसने कब्ज़ा जमा लिया होगा. इस कारण रमेश ने अपनी धडकनों को चुन-चुन के पकड़ा होगा और उन पर खुरच-खुरच के उसका नाम लिख दिया होगा. इसके बाद रमेश ने उसे इस सत्र के लिए सालाना प्रेम का प्रस्ताव दिया होगा जिसे उसने पहले से ही किसी और से ग्रहण  कर लिया होने के कारण रिजेक्ट कर दिया होगा. तब रमेश ने उसको इमोशनल बलैकमेली के फंदे में फंसाने के लिए दस दिन बाद उसको बकरे जैसी दाढ़ी के साथ अपना दीदार कराया होगा. इन दस दिनों में रमेश ने फास्टफूड और तली-भुनी चीजों को कम खाकर फल ज्यादा खाया होगा जिससे अब उसका वजन बैलेंस्ड था जिसे वो कुपोषण कि हद तक गिरा हुआ मान कर चल रहा था.

खैर, प्रेम में घायलों के प्रति मेरी श्रद्धा कभी नहीं रही क्योंकि एक तो मेरे घायल होने पर रोने वाला कोई नहीं था, दूसरे  मुझे एक पंडित जी ने बताया था कि हम नियति के हाथ के खिलौने हैं, वो ऊपर बैठा हम शतरंज कि मुहरों से खेल रहा है, भाग्य से ज्यादा और समय से पहले कुछ नहीं मिल सकता. अतः मैं जान गया था कि गलती न रमेश की है न लड़की की. गलती नियती की है, ऊपर वाले की है, भाग्य की है और समय की है. जब नियती, ऊपर वाला, भाग्य और समय चरचरा के मेहरबान होते हैं तो बंदा राखी सावंत का स्वयंवर भी जीत सकता है, मल्लिका शेरावत का प्यार और ऐश्वर्या जैसी बीवी भी पा सकता है. नहीं तो यही अभिषेक बच्चन के शादी कि करिश्माई कवायदों के समय करिश्मा द्वारा रिजेक्ट किये जाने पर अमित जी को लगा कि अभिषेक कि शादी ही नहीं हो पायेगी, भोला-भाला बच्चा कुंवारा रह जायेगा, मधुशाला का वंश डूब जायेगा. तब अभिषेक कि शादी के लिए अभिषेक ने ही नहीं अमित जी ने भी दाढ़ी रखी जो चार इंच कि होती उससे पहले ही ऐश्वर्या देवी ने फील किया कि बच्चा दुखी है और सलमान कुछ ज्यादा खुश अतः आ गईं आंसू पोंछने. इस तर्क से मैंने अनुमान लगाया कि रमेश का दुःख बंटाने कई लड़कियां आगे आई होंगी किन्तु चूंकि वो अभिषेक बच्चन नहीं था, न अमिताभ बच्चन का कुलदीपक अतः लड़के ही आगे आये. बाद में साजिश का पता चला कि लड़कियां अब नारीवादियों के चक्कर में पड़कर, पुरुषों को सबक सिखाने के लिए, आपस में ही प्रेम कि पींगे बढाने लगी थीं.

उसने मुझसे कहा कि वो लड़की उसके दिल की धडकनें नहीं पढ़ पा रही है. मैंने उसे सांत्वना दी कि हो सकता है कि वो अभी निरक्षर हो या प्रेम का ककहरा सीख रही हो, तो वो तुम्हारे अदृश्य दिल की अदृश्य धडकनें कैसे पढ़ पाएगी? तब मुझे सूचना मिली कि वो अभी रोहित के दिल की धडकनें पढने में व्यस्त थी और रोहित की धडकनें पूरा रामायण-महाभारत थीं. वो पढ़ती जा रही थी और धडकनें ख़त्म ही नहीं हो रही थीं.

मैंने उसे सुझाया ”कहीं और ट्राई करो”.

वो गुर्राया ”दिल तो एक ही है…. आ गया जो किसी पे प्यार क्या कीजे”.

मैंने कहा ”एक ही है तो क्या साला एक ही नाम जपेगा और एक ही काम करेगा, उसे लोगों के नाम की धडकनें छापने के आलावा शरीर को खून पानी भी भेजना है कि नहीं?”

उसने कहा ”एक ही दिल है, इसकी धडकनों पर कैसे किसी और का नाम लिख दूँ”

मैंने उसे नजीर दी सैफ, सलमान, आमीर, अक्षय से लेकर प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर होते हुए सीमोन- द-बउआर तक की. अब उसे धीरे-धीरे विश्वास हो रहा था कि अभी दिल पूरी तरह नहीं टूटा है कि मधुशाला की राह ली जाय. अभी एकाध चांस और ट्राई किया जा सकता है.

उसने पूछा ”उसे कैसे भूलूं”

मैंने कहा ”दूसरी को पकड़ोगे तो पहली अपने आप भूल जाएगी”. मैंने उसे समझाया की ”प्रेम ट्रांस्फरेबुल होता है. जब अगाध प्रेम करने वाली ‘चित्रलेखा’ एक से अधिक से प्रेम की तो हम तुम तो तुच्छ जीव हैं. वास्तव में यह बहकाव नहीं बल्कि प्रेम की उदारता और उदात्तता है. मेरे गुरू ने ‘ढाई आखर प्रेम का, पढे सो पंडित होय’ को पकड़ा और ऐसा पकड़ा की आज तक पकडे हैं. जीते जी कबीर हो गए. प्रेम को उदारता की हद तक ले गए और सबको मनसा, वाचा, कर्मणा मुक्तहस्त और मुक्तकंठ प्रेम बांटा”. उसने मेरे गुरू के दर्शनों की इच्छा जताई.मैंने उनके प्रवासी होने की दुहाई देकर अपना पिंड छुड़ाया. जाते-जाते उसने मुझसे एक गंभीर मन्तोइन्ग टाइप का प्रश्न किया ”आपने क्या इसका पालन किया?”

मैंने उसे समझाया की ”जीवन में मैं जब तक पढ़ा, हर लड़की को एक नजर से देखा. नजरों में जिसके हेर-फेर हो जाये वो आदमी क्या. आदमी वही जो जुबान और नज पर कायम रहे….आज तक मैं जहाँ जिसके पास जाता हूँ उसे पहले प्रेम की नजर से देख लेता हूँ फिर सोचता हूँ की मैं यहाँ आया किस काम से था……सबको प्रेम बाँटने से प्यार बढ़ता है और इंडिया में प्यार की बड़ी कमी है..मेरे गुरूजी के आलावा सब इस मामले में कंजूस हैं और एक दिल की बात करते हैं… अरे प्रेम को एक गले, द्वार और खूंटे से मत बांधो.. इसे फैलने दो…”

अब वह मेरी बातों से पर्याप्त संतुष्ट था और दूसरे दिन के लिए एक दूसरी लड़की का नाम मेरे कान में बताकर नई धडकनें उगता चल दिया.

3 Responses to “प्रेम, दाढी और धडकनें”

  1. vimlesh

    अखिल जी बेहतरीन व्यंग आज के युवा खाना पीना सब छोड़ कर एक अदद फ्रेंड या कहो गर्लफ्रेंड के चक्कर में मजनू फरहद तक को चैलेन्ज करने में भी नहीं चूकते.
    सब कुछ जानते हुए भी पाश्च्यात संस्कृत के दीवाने बनाने की अनकही प्रतियोगिता में अपना तन मन यहाँ तक की अपने बाप दादों के द्वारा कमाए धन को बर्बाद करते हुए प्रेम प्रतियोगिता के प्रतियोगी बानने में शातात प्रयासशील रहते है .
    आपके लेख से यदि १% युवा भी शिक्षा ग्रहण करेंगे तो मक्कार मंज्नुओ की संख्या में अच्छी खासी वृधि हो जाएगी.

    भगवान इन मंज्नुओ का भला करे .

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  2. dilip rawaani

    बेहतरीन व्यंग्य आलेख……………मज़ा आ गया गुरु.

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  3. Anil Sehgal

    प्रेम, दाढी और धडकनें

    अखिल कुमार जी आप शोधार्थी हैं; नए नए प्रयोग करते रहते होंगे.

    आपका क्या निष्कर्ष है – प्रेम-रोगियौं को चेहरे पर ४ ईच झाड़ियां रखना लाभ दायक है या पग का रोड़ा ?

    आप अपने युवा मित्रों को बताएं कि आपने अपने प्रिय मित्र रमेश जी को उनके चेहरे पर 10 cm की उगी झाड़ियौं पर क्या सलाह दी, क्या समझाया.

    इस विषय पर कि दूसरी लड़की के पास clean shave हो के जाएँ या ऐसा मजनू ही चेहरे पर 4 ईच झाड़ियौं के साथ.

    – अनिल सहगल –

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