राजनीति

कांग्रेस से कई नेता बिछड़े सभी बारी-बारी,कांग्रेस से मोह भंग ओर भाजपा से यारी

प्रदीप कुमार वर्मा

भारत के उत्तर-पूर्व में अपने विशाल चाय बागानों,काजीरंगा अभ्यारण्य,ब्रह्मपुत्र नदी, बिहू नृत्य और कामाख्या मंदिर के लिए देश और दुनियां में चर्चित असम में विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान हो गया है। देश के इस पूर्वोत्तर प्रदेश की 126 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी और 4 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राज्य में तेज हुई सियासी हलचल के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नगांव से दूसरी बार सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और असम प्रदेश कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे को लेकर नवज्योति तालुकदार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में पार्टी की कार्यप्रणाली से लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि और अपनी बार-बार शिकायतों के बाद भी कोई समाधान नहीं मिलने का हवाला दिया है। जबकि नवज्योति से एक कदम आगे जाते हुए नौगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा का दामन थाम लिया है।

         यह कोई पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ कांग्रेसी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता गांधी परिवार के पार्टी पर कथित “कब्जा” जमाने और उनको साइड लाइन किए जाने की बात कहते हुए पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। जम्मू-कश्मीर के कददावर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के कई दशकों पहले शुरू हुए कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला आज भी जारी है। कांग्रेस में अपनी बात नहीं कह पाने तथा राहुल गांधी के कुछ चाहते नेताओं द्वारा कामकाज में दखल देने के आरोप लगाते हुए असम कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा हाल ही में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। इससे पूर्व असम के ही बड़े नेता हिमंता विश्व शर्मा भी कांग्रेस छोड़कर न केवल भाजपा में शामिल हो गए थे, बल्कि आज भाजपा के लोकप्रिय मुख्यमंत्री में शुमार हैं। इसके अलावा भी पिछले सालों में कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ कर दूसरे दलों का दामन थाम चुके हैं। 

           कांग्रेस छोड़ने वाले सभी नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल खडे़ किए हैं। इन सवालों की जड़ में कांग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गांधी से लेकर उनके खास करीब एक दर्जन चाटुकार कांग्रेस नेता भी शामिल है। बीते करीब दस साल में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद कई कांग्रेसी नेताओं ने “हाथ का साथ” छोड़ कर कोई भाजपा में शामिल हुआ तो किसी ने अपनी ही पार्टी बना ली है। इनमें महाराष्ट्र में कांग्रेस का एक बड़ा नाम मिलिंद देवड़ा भी शामिल है। देवड़ा परिवार बीते करीब छह दशक से कांग्रेस के साथ रहा। यही नहीं, मिलिंद देवडा मनमोहन सरकार में केंद्र के मंत्री भी रह चुके हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम आजाद ने साल 2022 में पार्टी से इस्तीफा दिया था और जम्मू-कश्मीर में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी बना ली थी। गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल ने भी वर्ष 2022 में इस्तीफा दिया तथा फिर भाजपा में शामिल हो गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने फरवरी 2022 में कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। कुमार भी कांग्रेस की सरकार में कानून मंत्री रहे थे। 

           पंजाब कांग्रेस के चीफ रहे सुनील जाखड भी मई 2022 में भाजपा में शामिल हुए और जुलाई में उन्हें बीजेपी पंजाब इकाई के प्रमुख बन गए। कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में सबसे ज्यादा चर्चा ज्योतिरादित्य सिंधिया की हुई। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की युवा टीम का अहम हिस्सा माने जाने वाले सिंधिया करीब छह साल पहले वर्ष 2020 में कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए थे। सिंधिया की बगावत के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार गिर गई थी। भाजपा में बतौर इनाम पाने वाले सिंधिया अब केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं। इसके साथ ही आने वाले समय में मध्यप्रदेश की राजनीति में उनकी अहम भूमिका मानी जा रही है। राहुल कैबिनेट के एक और युवा चेहरे जितिन प्रसाद भी मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। वे भी वर्ष 2021 में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। गुजरात के कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर ने वर्ष 2019 में कांग्रेस छोड़ी थी। कांग्रेस पार्टी में रहते हुए अल्पेश ने राज्यसभा में क्रोस वोटिंग की तथा फिर भाजपा में शामिल हुए। अभी अल्पेश गांधीनगर दक्षिण से जीत विधायक हैं।

        डेढ़ सौ साल पुरानी पार्टी कांग्रेस को छोड़ने वाले नेताओं में एक चर्चित नाम पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का भी है। पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़ी। फिर अपनी पार्टी बनाई और एक साल के भीतर भाजपा में शामिल हो गए। महाराष्ट्र की तेज तर्रार कांगेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पार्टी की प्रवक्ता रहते हुए वर्ष 2019 में कांग्रेस छोड़ी। अब शिवसेना से राज्यसभा सांसद हैं। इसके साथ ही हरियाणा के काद्यावर नेता और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य रहे कुलदीप बिश्नोई ने साल 2022 में कांग्रेस का साथ छोड़ा और भाजपा में चले गए। इसके साथ ही महाराष्ट्र के सीएम रहे नारायण राणे सहित दर्जनों कांग्रेसी नेता बीते एक दशक में कांग्रेस पार्टी से अपना नाता तोड़ चुके हैं। इससे पहले जयवीर शेरगिल, शहजाद पूनावाला, रीता बहुगुणा जोशी, गौरव वल्लभ एवं राधिका खेड़ा जैसे कई और नाम भी है, जो कांग्रेस का दामन छोड़कर अब दूसरे दलों में प्रमुखता से अपनी पार्टी ऒर राष्ट्रहित के मुद्दे उठा रहे हैं।