डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय
यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम एक स्वतंत्र आयोग एवं सरकारी अभिकरण है जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के दोनों राजनीतिक दलों (रिपब्लिकन पार्टी एवं डेमोक्रेटिक पार्टी) के सांसद होते हैं। इस आयोग की स्थापना सन् 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में हुआ था। इसकी स्थापना 1998 में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत की गई थी। यह एक संघीय अभिकरण है जो विदेश मंत्रालय से अलग है एवं स्वतंत्र रूप से काम करती है। यू एस सी ए आर एफ हर साल अपने “वार्षिक धार्मिक प्रतिवेदन” तैयार करती है एवं वैश्विक स्तर पर “धार्मिक स्वतंत्रता” के उन्नयन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति, विदेश मंत्रालय एवं ‘ कांग्रेस’ ( अमेरिका की संसद) को सिफारिशें करती है।
यह प्रतिवेदन वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर के देशों में “धार्मिक स्वतंत्रता” की स्थिति पर आधारित है एवं इसके साथ सिफारिशें की गई है। ये सिफारिशें “बाध्यकारी” नहीं होती हैं लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के ‘ घरेलू नीतियों एवं अंतर्राष्ट्रीय नीतियों ‘ पर प्रभाव डाल सकती हैं। यह प्रतिवेदन “ सातवीं” बार है जब आयोग ने भारत को ‘ कंट्री आफ पार्टिकुलर कंसर्न ‘ (सीपीसी ) अर्थात ‘ विशेष चिंता का देश’ घोषित करने की सिफारिशें किया है। ‘ विशेष चिंता का देश’ वह देश होते हैं जहां “धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर निरंतर एवं बड़े उल्लंघन होते हैं”। वर्ष 2025 के प्रतिवेदन में 18 देशों को’ विशेष चिंता के देश’ बनाने की सिफारिश है जिसमें अफगानिस्तान, चीन, ईरान ,पाकिस्तान एवं रूस शामिल है। उपर्युक्त प्रतिवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2025 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति “और बिगड़ी” है। सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यों को खासकर मुस्लिम एवं ईसाइयों को आघात करने वाले नए विधि बनाए एवं क्रियान्वित किया। मस्जिदों, गिरजाघर एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर हमले सहन किए गए।
आयोग का आरोप है कि’ हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों’ के कार्यकर्ताओं के समूहों ने मुसलमानों एवं ईसाइयों पर हमले किए हैं, हिंसा भड़काई एवं उन्हें परेशान किया गया लेकिन पुलिस ने ज्यादातर मामलों में “ कुछ नहीं ” किया। इसके ठीक विपरीत पुलिस ने मुसलमानों एवं अल्पसंख्यक समुदायों के बीच “ विश्वास बहाली” के लिए “ मोहल्ला समितियां” एवं “ विशेष बैठकों” का आयोजन किया जिससे इन समुदायों में ‘ भय’ एवं ‘ हताशा’ को दूर किया जा सके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ( आरएसएस) एवं ‘ संघ परिवार’ ने इन लोगों के मध्य ‘ सेवा भाव’ से कार्य किया है। ‘ सेवा भाव’ धर्म, जाति,पंथ एवं समुदाय से ऊपर होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं उसके आनुषंगिक संगठन ‘ सेवा भारती ‘ ने समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय त्रासदी एवं महामारियों के दौरान बृहद स्तर पर ‘ राहत एवं सहयोग’ किया हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान इन संगठनों ने भोजन,राशन, सुरक्षा किट, मास्क एवं सैनिटाइजर के वितरण में धर्म एवं संप्रदाय से ऊपर उठकर कार्य किया था। आंकड़ों एवं संस्थाओं के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि राहत कार्यों का उद्देश्य “ बिना किसी धार्मिक भेदभाव से जरूरतमंदों एवं संक्रमितों तक पहुंचाया गया था”। इन संगठनों ने भूकंप, बाढ़ एवं चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में सहयोग बिना किसी भेदभाव से किया है। इन संगठनों ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी गंभीरता से काम किए हैं जिनका उद्देश्य “ गुणात्मक , किफायती एवं जरूरतमंदों” तक शिक्षा एवं दवाइयों की पहुंच से है।
इन संगठनों द्वारा “ गौ- संरक्षण “ के लिए गौशालाओं ,आवारा पशुओं का देखभाल, गौ – उत्पादों का प्रचार- प्रसार किया गया है । इन संगठनों के द्वारा बीमार, बूढ़ी , एवं भटके पशुओं का सेवा सुश्रुषा किया जा रहा है । मुसलमानों एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की दिशा में गुणात्मक प्रगति हुई है। 1948 में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 20.5 % थी ,जबकि सामयिक में उनकी पाकिस्तान में आबादी 2% है। भारत में मुसलमानों की आबादी 1951 में 9.8 प्रतिशत थी जो जनगणना 2011 में 14.2 प्रतिशत हो चुकी है। ईसाइयों की आबादी 1951 में 2.3 प्रतिशत थी जो जनगणना 2011 में 2.3 प्रतिशत पर स्थिर है। सिखों की आबादी 1951 में 1.79% थी जो 2019 में 2 प्रतिशत हो चुकी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक सामाजिक, गैर – राजनीतिक ,सांस्कृतिक एवं हिंदू राष्ट्रवादी संगठन है। यह वैश्विक स्तर का वृहद सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन है जिसका लक्ष्य भारत की “अखंड सांस्कृतिक राष्ट्र” के स्तर पर स्थापना है । इसने भारत के “बुनियादी स्तंभ” को मजबूत किया है। भारत में सामाजिक समरसता के उन्नयन में संघ ने महनीय कार्य किया है। इसने “भारतीयता की भावना के उन्नयन एवं हिंदुत्व के प्रसार” में अग्रणी काम किया है एवं सनातन संस्कृति के आदर्शों एवं बदलते परिदृश्य में राष्ट्रीय चरित्र का प्रसार किया है। संघ ने अपने विचारों, मानवीय मूल्यों एवं बैठक मंथन से “भारत के संप्रभुता” की संरक्षा की है। इसने अपने विविध प्रकल्पों से “ कमजोर वर्गों” को सशक्त किया है एवं भारतीय सभ्यता के मूल्यों एवं आदर्शों का उन्नयन किया है। संघ ने “धार्मिक स्वतंत्रता ,समाज को संगठित करने एवं सामाजिक सौहार्द” के उन्नयन में महनीय भूमिका का निर्वहन किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे सामाजिक सांस्कृतिक संगठन को “ बिना किसी प्रमाणिक मापांक “के “नकारात्मक प्रकृति” बताना चिंता का विषय है।
संघ नि:स्वार्थ भाव से सेवा का जीवंत संगठन है। राष्ट्र- निर्माण व्यक्तियों के उत्तम एवं संगत चरित्र से होता है ।संघ ‘ दैनिक शाखाओं ‘ एवं ‘ साप्ताहिक मिलन’ कार्यक्रम एवं संकल्प भावना से राष्ट्र- निर्माण में योगदान करता है। समर्पित एवं आत्माप्रित भाव से समाज के हर क्षेत्र में स्वयंसेवक लगन एवं निष्ठा से काम कर रहे हैं। स्वयंसेवकों का मौलिक उद्देश्य “भारत को परम वैभव, सर्वशक्तिमान एवं विश्व गुरु के स्तर” पर स्थापित करना है। हिंदू समाज को संगठित करके, समाज में सज्जन शक्तियों को एकत्र करके, संगठित समाज को एकजुट करके, सभी नागरिकों एवं व्यक्तियों को सद्भाव,स्नेह, आत्ममीयता एवं भारतीयता का वातावरण उत्पन्न करके ‘ राष्ट्र सर्वोपरि ‘ के बीच मंत्र को साकार करके ‘ राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक विरासत’ का उन्नयन किया जा सके। ऐसे संगठन पर झूठा एवं पक्षपाती आरोप लगाना ‘ बौद्धिक दिवालियापन’ का संकेत है।
संघ हिंदू राष्ट्र एवं हिंदू समाज में एकता, समरसता, हिंदू धर्म एवं सनातन संस्कृति के बारे में जाग्रत करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। संघ का विचार भारत के प्रगति के लिए काम कर रहा है। संगठित समाज समर्पित भाव से व्यक्ति- निर्माण के महती कार्य को लक्षित करके स्वयंसेवक देश के सभी क्षेत्रों – सेवा,विद्या, इतिहास ,विद्यार्थी,श्रमिक एवं राजनीति में ‘ राष्ट्र- सर्वोपरि’ की भावना को मूल मंत्र मानकर देश के चतुर्दिक विकास के लिए प्राणप्रण से सक्रिय है। देश के आर्थिक समृद्धि एवं शासकीय स्थिरता के मजबूत उन्नयन के लिए संघ को मजबूत आयाम देना होगा। इस विचार के क्रियान्वयन के द्वारा “ भारत को विश्व गुरु” एवं “ वैश्विक मार्गदर्शक “होना है। भारत को वैश्विक मार्गदर्शन के साथ-साथ अपनी परंपराओं, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत का उन्नयन करना है। संघ राष्ट्र – निर्माण में महत्ती भूमिका में उन्नयन के साथ कर्तव्य- भावना को मजबूत कर रहा है। यह समाज को जोड़कर राष्ट्र- निर्माण में पाथेय प्रदान कर रहा है।
भारत वैश्विक स्तर का सबसे वृहद लोकतंत्र है। मजबूत ,समय की कसौटी पर ‘ उचित ‘ न्याय व्यवस्था,जीवंत लोकतांत्रिक संस्थाएं एवं संसदीय नियंत्रण को देखते हुए किसी के “धार्मिक स्वतंत्रता का अतिक्रमण “ करने के पश्चात लोगों या संगठनों के छूट जाने की संभावना “बहुत कम “है।
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग द्वारा संघ की संपत्ति फ्रीज करने, संघ से जुड़े व्यक्तियों के प्रवास को प्रतिबंधित करने एवं संघ से संबद्ध व्यक्तियों को” प्रतिबंध “लगाने की सिफारिशें में पूरी तरह “ मनो मालिन्य, बौद्धिक दिवालियापन एवं विकृत मानसिकता” के निष्कर्ष को दर्शाती है।
भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय के जरिए इस प्रतिवेदन पर अपने आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह अमेरिकी आयोग ‘ व्यक्तिपरक तरीके’ से काम करता है एवं इसके स्रोत “ विश्वसनीय एवं प्रामाणिक नहीं है”। भारत सरकार ने इस प्रतिवेदन को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह प्रतिवेदन बेबुनियाद है जो “ आधारहीन, तथ्यविहीन एवं प्रामाणिक नहीं है।”( युवराज फीचर्स )
डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय