वसुंधरा राजे की देव दर्शन यात्रा के मायने

-निरंजन परिहार

बीजेपी की दिग्गज नेता और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मतदान के दूसरे ही दिन दर्शन पर निकल गई हैं। वे उस बीजेपी की नेता हैं और जिसके नेताओं के बारे में वैसे भी माना जाता है कि दर्शन, पूजा, हवन, यज्ञ व मंदिर जाकर अर्चना आदि में किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं के मुकाबले वे कुछ ज्यादा ही आस्था रखते हैं। फिर वसुंधरा राजे के बारे में तो यह तथ्य अति प्रचलित हैं कि वे धार्मिक रूप से बेहद आस्थावान राजनेता रही हैं और वे जितनी राजनीतिक रूप से संपन्न हैं, उतनी ही धार्मिक तौर पर भी मजबूत हैं। धर्म में उनकी आस्था है और मंदिरों में उनकी श्रद्धा रही है। सांस्कृतिक रूप से वे काफी आस्थावान महिला नेता के रूप में जानी जाती हैं। वसुंधरा के मतदान के दूसरे दिन ही देव दर्शन यात्रा पर निकलने को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं, और खास तौर पर ये मायने तलाशे जा रहे हैं कि कहीं उनकी इस दर्शन यात्राओं का मुख्यमंत्री बनने से तो कोई नाता नहीं है।  

अब, जब राजस्थान के मतदाताओं ने 200 विधानसभा क्षेत्रों में से 199 के लिए अपने 1862 उम्मीदवारों की किस्मत लिखकर वोटिंग मशीनों में कैद कर दी है और 3 दिसंबर को चुनाव के नतीजे सामने आने तक चर्चाओं का दौर चला दिया है। प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के नेता अपनी अपनी पार्टी के सत्ता में आने के दावे कर रहे हैं। मतदान के बाद अक्सर नेताओं की थकान मिटाने और मालिश करवाने की तस्वीरें आती रहती हैं। मगर, व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ी चर्चा प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर है, जो मतदान समाप्त होते ही बाकी नेताओं की तरह थकान मिटाने के लिए आराम फरमाने के बजाय देव दर्शन यात्रा पर निकल गई।

पहले दिन मतदान, दूसरे दिन देव दर्शन

प्रदेश में महारानी के नाम से मशहूर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मतदान के दूसरे दिन 26 नवंबर को सुबह सबसे पहले प्रतापगढ़ स्थित गौतमेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने पहुंची, जहां पर उन्होंने दर्शन, पूजा – अर्चना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा – ‘बीते दिनों चुनावी दौरों की व्यस्तता के चलते गौतमेश्वर महादेव मंदिर की यात्रा नहीं कर पाई थी, इसलिए आज अरनोद, प्रतापगढ़ स्थित अति प्राचीन श्री गौतमेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर दर्शन एवं पूजन किया।’ उसके बाद वे दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मां त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन करने पहुंची, जहां वे अक्सर जाती रही हैं और कहते हैं कि वहीं से वे अपनी शक्ति अर्जित भी करती रही हैं। वसुंधरा राजे ने मां त्रिपुरा सुंदरी माता के पूजन – दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ ही स्वयं को शक्ति संपन्न करके मेहंदीपुर बालाजी धाम पहुंची। राजे ने वहां भी दर्शन के साथ साथ पहली बार मतदान के बाद मंदिर पहुंची।  

त्रिपुरा सुंदरी सत्ता का मतलब देवी

त्रिपुरा सुंदरी को सत्ता की देवी कहा जाता है। राजस्थान में यह आम मान्यता है कि त्रिपुरा सुंदरी के इस मंदिर में सत्ता प्राप्ति की कामना के लिए जो भी नेता आता है, मां के आशीर्वाद से उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इसी कारण माता त्रिपुरा सुंदरी की सत्ता की देवी के रूप में भी ख्याति है। हालांकि वसुंधरा राजे अक्सर मां त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन को आती रही हैं, मगर इस बार यह पहला मौका है, जब प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मतदान के दूसरे दिन ही त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन को पहुंचती रही हैं। लेकिन इस बार राजे मतदान के तुरंत बाद दूसरे दिन ही त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन करने पहुंची है। चुनाव, दर्शन और यात्रा के उनके पुराने इतिहास को देखें, तो इससे पहले जब भी चुनाव हुआ है तो वसुंधरा राजे मतगणना के दिन माता त्रिपुरा सुंदरी के दरवाजे पर माथा टेकने पहुंचती रही हैं। मतगणना पर शाम तक चुनावी तस्वीर साफ होने के बाद वह त्रिपुरा सुंदरी से जयपुर के लिए निकलती थीं। लेकिन इस बार वोट पड़ते ही वे त्रिपुरा सुंदरी में बीजेपी की विजय की कामना करते हुए पूजा अर्चना करने पहुंची।

बड़ा गहरा है राजनेताओं का मंदिरों से रिश्ता

वैसे देखा जाए, तो भले ही लोग राजनीति को धर्म से दूर रखने की बात करते हैं, मगर असल में राजनीति और धर्म का बड़ा गहरा गहरा रिश्ता हैं। राजनीति और राजनेता धर्म से जुड़े रहने की सहूलियत लेते रहे हैं। खासकर चुनाव के दिनों में तो राजनीतिक लाभ के लोभ में मंदिर – मंदिर यात्राएं करते अक्सर देखे जाते हैं। कांग्रेस के नेता अक्सर बीजेपी वालों पर धर्म का लाभ लेने के आरोप लगाते रहे हैं। मगर, राहुल गांधी हो, प्रियंका गांधी हो या फिर अशोक गहलोत, जैसे खुद को धर्म निरपेक्ष मानने वाले नेता, ये सभी धर्मनिरपेक्ष होने के बावजूद धर्म और मंदिरों का भरपूर उपयोग करते हैं। वसुंधरा राजे के बारे में भी भले ही यह कहा जा रहा हो कि वे मुख्यमंत्री बनने की लालसा में देव दर्शन यात्रा पर निकली हैं। मगर, राजस्थान जानता हैं कि वसुंधरा को त्रिपुरा सुंदरी से कितना गहरा लगाव है। बीजेपी की दिग्गज की नेता वसुंधरा राजे के बारे में यह आम धारणा है कि अपनी मां राजमाता विजया राजे सिंधिया से मिले संस्कारों के अनुरूप वे निजी जीवन में जितनी राजनीतिक हैं, संस्कारों से उतनी ही अति धार्मिक भी हैं। इसीलिए वे देव दर्शन यात्रा पर निकली हैं , जो कि वे पहले भी अक्सर जाती रही हैं।

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