राजेश श्रीवास्तव
प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा जहां वैश्विक रणनीतिक संतुलन, सुरक्षा सहयोग और हाई क्वालिटी टेक्नीक शेयरिग पर फोकस्ड है, वहीं योगी आदित्यनाथ का सिगापुर-जापान दौरा आर्थिक कूटनीति और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम है. एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी विदेश नीति को मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश वैश्विक पूंजी और तकनीक को आकर्षित करने की कोशिश में जुटा है. दोनों यात्राएं यह दर्शाती हैं कि आज की राजनीति में कूटनीति सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है बल्कि सुरक्षा, तकनीक, व्यापार और निवेश से सीधे जुड़ी हुई है.
पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है। एक तरफ ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा बरकरार है तो दूसरी तरफ इस्राइल भी लंबे समय से फलस्तीन में हमास से संघर्ष में जुटा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की इस्राइल यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी मुलाकात के दौरान रक्षा से लेकर व्यापार और तकनीक से लेकर कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के मुद्दे पर समझौता कर सकते हैं।
भारत की विदेश नीति इस वक्त चर्चा में है. चर्चा में इसलिए, क्योंकि एक तरफ पीएम मोदी और दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी दोनों ही विदेश दौरे पर हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिगापुर और जापान का दौरा कर रहे हैं. दोनों नेताओं की यात्राएं अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम मानी जा रही हैं. एक तरफ भारत-इजरायल की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देने की कोशिश है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने के प्रयास की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर हैं. यह उनका दूसरा इजरायल दौरा है. इससे पहले वे 2०17 में इजरायल गए थे. नौ साल बाद हो रही यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिक्स के लिहाज से हालात तेजी से बदल रहे हैं. भारत-इजरायल संबंध रणनीतिक साझेदारी के नए स्टेप में आ चुके हैं.
पीएम मोदी तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे, जहां इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने खुद उनकी आगवानी करेंगे. स्वागत का यही शुरुआती पहला स्टेप ये बताता है कि संबंध सिर्फ फॉर्मेलिटी नहीं है, बल्कि दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच आपस में भरोसा और राजनीतिक समझ के लेवल पर व्यक्तिगत विश्वास मजबूत हो चुके हैं.
अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित करने वाले हैं, हालांकि इजरायल के विपक्षी दलों ने उनके संबोधन का बहिष्कार करने की धमकी दी है. इस पर नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने कहा कि अगर विपक्षी सांसद गैरमौजूद रहते हैं तो खाली सीटों को पूर्व सांसदों से भर दिया जाएगा.
यह घटनाक्रम बताता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की भूमिका और उसकी लीडरशिप को लेकर वैश्विक राजनीति में चर्चा और मतभेद दोनों मौजूद हैं. बावजूद इजरायली सरकार की ओर से पीएम मोदी को दिया जा रहा महत्व दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियों को गहराई देता है.
पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच द्बिपक्षीय बातचीत में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और नई तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (इI), साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी.
भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत है. भारत के प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है. ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, निगरानी तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग रहा है. इस दौरे के दौरान सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर नए एमओयू पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.
26 फरवरी को पीएम मोदी यहूदी नरसंहार स्मारक का दौरा करेंगे और वहां श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके अलावा वे इजरायल के राष्ट्रपति ईसाक हरजोग से भी मुलाकात करेंगे. यह कार्यक्रम प्रतीकात्मक रूप से ऐतिहासिक स्मृति और मानवीय मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाता है. भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे. तब से लेकर अब तक व्यापार, रक्षा, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है.
दोनों देशों के बीच व्यापार कई अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. आतंकवाद-रोधी सहयोग और खुफिया साझेदारी ने भी संबंधों को रणनीतिक गहराई दी है. पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यह यात्रा सुरक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.
अब बात करते हैं सीएम योगी के विदेश दौरे की. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिगापुर के बाद जापान की राजधानी टोक्यो पहुंच चुके हैं. यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश इन्वेस्टमेंट रोडशो किया और जापानी निवेशकों से मुलाकात की. योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश को भगवान राम की जन्मभूमि और भगवान बुद्ध की पवित्र भूमि बताते हुए सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर चलने की बात कही. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां निवेश के असीम अवसर हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. राज्य में व्यापक रेल नेटवर्क और तेजी से बढ़ती एयर कनेक्टिविटी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है.
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत आबादी युवा है, जो एक मजबूत वर्कफोर्स के रूप में उपलब्ध है. स्किल्ड मैनपावर और अपेक्षाकृत कम लागत निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. राज्य सरकार की नीतिगत स्थिरता और फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस सिस्टम को भी उन्होंने निवेशकों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा.
सिगापुर में वैश्विक निवेशकों से मुलाकात
जापान से पहले योगी आदित्यनाथ ने सिगापुर में प्रमुख निवेशकों से मुलाकात की. उन्होंने टेमासेक के चेयरमैन टी ओ ची हीन से चर्चा की. इस दौरान डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, रिन्यूएबल एनर्जी और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर में संप्रभु निवेश की संभावनाओं पर बात हुई.
इसके अलावा उन्होंने जीआईसी के सीईओ लिम चाओ कियात से भी मुलाकात की. इस बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल पार्क, लॉजिस्टिक्स और शहरी विकास परियोजनाओ में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं में जीआईसी की मौजूदा भागीदारी की सराहना भी की. सरकार का लक्ष्य ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना और ‘मेक इन यूपी’ पहल को गति देना है.
एक ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का विजन
योगी आदित्यनाथ अपने दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी सामने रख रहे हैं. वे जापान में निवेशक बैठकों के अलावा भारतीय समुदाय और छात्रों से भी संवाद करेंगे. राज्य सरकार का मानना है कि वैश्विक निवेश और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिये उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में डिवेलप किया जा सकता है.
डिप्लोमेसी और डेवलपमेंट की दो तस्वीरें
प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा जहां वैश्विक रणनीतिक संतुलन, सुरक्षा सहयोग और हाई क्वालिटी टेक्नीक शेयरिग पर फोकस्ड है, वहीं योगी का सिगापुर-जापान दौरा आर्थिक कूटनीति और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम है. एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी विदेश नीति को मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश वैश्विक पूंजी और तकनीक को आकर्षित करने की कोशिश में जुटा है. दोनों यात्राएं यह दर्शाती हैं कि आज की राजनीति में कूटनीति सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, व्यापार और निवेश से सीधे जुड़ी हुई है.
पीएम मोदी के इस्राइल दौरे का एजेंडा?
रक्षा और सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी के इस्राइल दौरे के सबसे अहम बिदु रक्षा और सुरक्षा पर होने वाले समझौते होंगे। भारत इस क्षेत्र में हथियार खरीद से लेकर उन्नत तकनीक हासिल करने पर जोर दे सकता है। मौजूदा समय में भारत इस्राइल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार है। इस दौरे पर 2०26 के लिए 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी मिल सकती है, जिसमें सटीक निशाना लगाने वाले युद्धक हथियार, मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियां शामिल हैं।
उन्नत तकनीक की खरीद :
इस समझौते के तहत भारत को इस्राइल के उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों तक पहुंच मिल सकती है, जिसमें अत्याधुनिक लेजर-आधारित आयरन बीम शामिल है। साथ ही गोल्डन होराइजन एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल पर भी चर्चा हो सकती है। इस मिसाइल को ब्रह्मोस से भी तेज बताया जाता है।
संयुक्त परियोजनाएं : एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली, निर्देशित-ऊज़ाã लेजर हथियारों, लंबी दूरी की मिसाइलों और नेक्स्ट-जेनरेशन ड्रोन के संयुक्त विकास पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार
दोनों नेताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर अहम चर्चा होगी। पीएम मोदी यरूशलम में एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का भी दौरा करेंगे। इस्राइली सरकार ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए चार करोड़ डॉलर की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत भारत में 1० नए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा टेलीमेडिसिन और नवीकरणीय ऊर्ज़ा क्षेत्र में भी संयुक्त कार्यक्रम शुरू होंगे।
व्यापार और अर्थव्यवस्था
मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) : दोनों देश वर्तमान में मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं और इस वर्ष इसके पूरा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी और उनके इस्राइली समकक्ष इसकी आधारभूत शर्तें तय करेंगे।
निवेश और बुनियादी ढांचा : इस्राइल भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को अपने देश में निर्माण और निवेश करने के लिए न्योता दे रहा है। पिछले साल सितंबर में दोनों देशों ने निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक नई द्बिपक्षीय निवेश संधि पर भी हस्ताक्षर किए थे।
आर्थिक गलियारा : भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को आगे बढ़ाने को लेकर भी मोदी-नेतन्याहू के बीच चर्चा होने की संभावना है। इसमें इस्राइल भी एक अहम हिस्सेदार है।
रणनीतिक और भू-राजनीतिक सहयोग
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कट्टरपंथी विरोधियों का सामना करने के लिए ‘हेक्सागॉन गठबंधन’ नाम का एक क्षेत्रीय गुट बनाने की योजना पर चर्चा कर सकते हैं। इसमें इस्राइल, भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब-अफ्रीकी देश शामिल होंगे।
हालांकि, माना जा रहा है कि ईरान के साथ अपने अच्छे संबंधों को देखते हुए भारत इस प्रस्ताव पर सावधानी से कदम बढ़ाएगा। पीएम मोदी के इस्राइल दौरे पर कृषि, जल प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होगी।
पीएम मोदी का इस्राइल दौरा क्यों अहम?
7 अक्तूबर 2०23 को हमास के हमले के बाद से दुनिया के काफी कम नेताओं ने इस्राइल का दौरा किया है। ऐसे में मोदी की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब कुछ ही दिन पहले भारत ने 1०० से अधिक देशों के साथ मिलकर फलस्तीन के वेस्ट बैंक में इस्राइल के विस्तार की निदा की थी। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की यात्रा में जो समझौते होंगे, वह दोनों देशों के रिश्तों को विशेष रणनीतिक संबंधों में बदल देंगे।
पीएम मोदी इस्राइली संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि 1992 के बाद से दोनों देशों के रिश्ते और गहरे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे को इस्राइली नीतियों के समर्थन के रूप में देखा जाएगा।
नेतन्याहू इस दौरे को लेकर उत्साहित क्यों?
इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष के बाद से इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को वैश्विक स्तर पर काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी हैं। उनके नाम पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) का वारंट भी है। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का दौरा नेतन्याहू के लिए एक बड़ा समर्थन होगा। दूसरी तरफ पीएम मोदी और नेतन्याहू के नेतृत्व में ही भारत और इस्राइल सबसे करीब आए हैं। भारत बीते वर्षों में इस्राइल के सबसे मजबूत गैर-पश्चिमी सहयोगी के रूप में उभरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और वैचारिक समानताएं इस साझेदारी को और मजबूत बना रही हैं।
निवेश के लिए खुले नए रास्ते, 5०० एकड़ में बनेगी ‘जापान इंडस्ट्रियल सिटी’
जापान दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेश और औद्योगिक सहयोग को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जापानी निवेशकों के लिए विशेष ‘जापान इंडस्ट्रियल सिटी’ विकसित की जा रही है, जिसकी निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है।
5०० एकड़ में विकसित होगी इंडस्ट्रियल सिटी
यह इंडस्ट्रियल सिटी लगभग 5०० एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य जापान की कंपनियों को विश्वस्तरीय औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने जापान के उद्योग प्रतिनिधियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया।
निवेशकों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी माहौल
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। बीते 9 वर्षों में राज्य में 16 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन शुरू किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
जेवर एयरपोर्ट से विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द संचालित होगा। जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा। एयरपोर्ट के आसपास 27 बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जिससे हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे और वैश्विक कंपनियों को निवेश का बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेगा।
विदेशी कंपनियों की बढ़ती रुचि
मुख्यमंत्री ने बताया कि जापान की कई कंपनियों ने नोएडा क्षेत्र में निवेश को लेकर सकारात्मक रुचि दिखाई है और कुछ ने निवेश भी किया है। ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में देश-विदेश की कंपनियां लगातार संपर्क कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के सिद्धांत पर काम कर रही है और निवेशकों को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है।
एशियाई निवेश केंद्र बनने की दिशा में कदम
गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री सिगापुर दौरे पर भी गए थे, जहां हजारों करोड़ रुपए के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ था। अब जापान दौरे के माध्यम से उत्तर प्रदेश को एशियाई निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जेवर एयरपोर्ट के संचालन के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
राजेश श्रीवास्तव