लेखक परिचय

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान युवा पत्रकार, शायरा और कहानीकार हैं. आपने दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हरिभूमि में कई वर्षों तक सेवाएं दीं हैं. अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया है. ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहता है. आपने ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं के लिए लेखन भी जारी है. आपकी 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित हो चुकी है, जिसे काफ़ी सराहा गया है. इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन भी कर रही हैं. उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए आपको कई पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है. इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत करती रही हैं. कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली है. आप कई भाषों में लिखती हैं. उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में ख़ास दिलचस्पी रखती हैं. फ़िलहाल एक न्यूज़ और फ़ीचर्स एजेंसी में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं.

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-फ़िरदौस ख़ान

हरित क्रांति के लिए अग्रणी हरियाणा को कृषि के क्षेत्र में सिरमौर बनाने में यहां के किसानों की अहम भूमिका है। यहां के किसानों ने न केवल खेतीबाड़ी में नित नए प्रयोग किए हैं, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भी अपनी योग्यता का परचम लहराया है। ऐसे ही एक किसान हैं यमुनानगर ज़िले के गांव दामला के धर्मवीर, जिन्होंने बहु उद्देशीय प्रसंस्करण मशीन बनाकर इस क्षेत्र में एक नई क्रांति को जन्म दिया है। इस मशीन से जूसर, ग्राइंडर, कुकर और मिक्सर का काम एक साथ लिया जा सकता है।

जड़ी-बूटियों की खेती करने वाले धर्मवीर बताते हैं कि उनका कारोबार जड़ी-बूटियों का है। वह अपने खेतों में उगी औषधियों को तैयार करके बाज़ार में बेचते हैं। औषधियों को पीसना, उनका जूस और अर्क़ निकालना बहुत मेहनत का काम है और इसमें समय भी ज्यादा लगता है। साथ ही लेबर का ख़र्च बढ़ने से लागत भी ज्यादा हो जाती है। इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसी कोई मशीन बनाई जाए, जिससे उनका काम आसान हो जाए। उन्होंने वर्ष 2006 में बहु उद्देशीय प्रसंस्करण मशीन बनाई। उन्होंने क़रीब एक साल तक इस मशीन से जड़ी-बूटियों , गुलाब, ऐलोवेरा (धूतकुमारी), आंवला, जामुन, केला और टमाटर की प्रोसेसिंग करके विभिन्न उत्पाद तैयार किए। गुलाब का अर्क़, केले के छिलके का अर्क़, जामुन का जूस और जामुन की गुठली का पाउडर भी इससे तैयार किया। मशीन में जड़ी-बूटियों और फल-सब्ज़ियों की प्रोसेसिंग करके पांच-छह उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इन मशीन से एलोवेरा और आंवले की जैली, जूस, शैंपू, चूर्ण, तेल और मिठाई बना सकती है।

उनका कहना है कि छह फ़ीट ऊंची इस मशीन की क़ीमत एक लाख 35 हज़ार रुपये रखी गई है। इस मशीन का कुकर, मिक्सर और ग्राइंडर एक घंटे में क़रीब 150 किलोग्राम जड़ी-बूटियों और फल-सब्ज़ियों की प्रोसेसिंग करने में सक्षम है। मशीन में तीन टैंक लगे हैं, एक बड़ा और दो छोटे टैंक। बड़े टैक्स से जुड़े एक छोटे टैंक में अरंडी का तेल भरा होता है। जड़ी-बूटियां और फल-सब्जियां पकाते समय जलते नहीं हैं, क्योंकि अरंडी तेल से भरा टैंक अतिरिक्त ताप को सोख लेता है। मशीन को चलाने के लिए दो एचपी की मोटर लगी है। इस मशीन को चलाने के लिए पांच-छह लोगों की ज़रूरत होती है। यह मशीन छोटी फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए बड़ी उपयोगी हो सकती है। यह मशीन हल्की होने के काण इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में ही उनकी इस मशीन को फूड प्रोडक्ड ऑर्डर (एफपीओ) 1955 के तहत लाइसेंस मिल गया था। इसके अलावा अहमदाबाद के नेशनल इन्नोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) ने भी इस मशीन को उपयोगी माना है। उन्होंने सबसे पहले करनाल के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीटयूट (एनडीआरआई) में आयोजित किसान मेले में इस मशीन को प्रदर्शित किया था, जहां इसे बहुत सराहा गया। इसके बाद वह हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों में भी इस मशीन का प्रदर्शन करने लगे। वह बताते हैं कि वर्ष 2008 से इस मशीन की कॉमर्शियल बिक्री कर रहे हैं और अब तक 25 मशीनें बेच चुके हैं। उनका कहना है कि यह मशीन हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल सरकार के बागवानी विभागों ने ख़रीदी है, ताकि फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्यमियों के सामने इसे प्रदर्शित किया जा सके। वह बताते है कि राज्य में फूड प्रोसेसिंग इकाई संचालित करने वाले एक उद्यमी ने यह मशीन लगाई है।

उन्होंने 20 जून को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित एसोचैम हर्बल इंटरनेशनल एक्सपो मेले में भी इस मशीन को प्रदर्शित किया था। इसमें आयुष विभाग, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार, विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय, राष्ट्रीय औषधि पादक विभाग के दिल्ली, छत्तीसगढ़, गुजरात, बिहार, सिक्किम, पंजाब और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों व कंपनियों ने अपने-अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया। उन्होंने हरियाणा के बाग़वानी विभाग की तरफ़ से मेले का प्रतिनिधित्व किया। इसमें उनके द्वारा निर्मित प्राकृतिक उत्पादनों को प्रदर्शित किया गया। उसके द्वारा निर्मित प्राकृतिक उत्पादनों को देखकर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री दिनेश त्रिवेदी इतने प्रभावित हुए कि कार्यक्रम का सबसे ज्यादा समय हरियाणा के इस स्टॉल पर व्यतीत किया। किसान द्वारा तैयार किए गए हर्बल उत्पादों में गहन रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश का ही नहीं, बल्कि विश्व का भविष्य है। धर्मवीर ने बताया कि मेले में आने वाले देश-विदेश से प्रतिनिधि, कंपनियों व अधिकारियों ने उसके द्वारा निर्मित प्रोसेसिंग मशीन में ख़ासी दिलचस्पी ली। उन्होंने इस मशीन को किसानों के लिए ‘वरदान’ बताते हुए कहा कि इससे किसानों की आर्थिक दशा सुधारने में मदद मिलेगी। इस उपलब्धि के लिए धर्मवीर को पिछले साल 18 नवंबर को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सम्मानित किया था।

6 Responses to “हरियाणा के किसान ने बनाई बहु उद्देशीय प्रसंस्करण मशीन”

  1. lovekesh gaur

    i am very surprised by this machine but i want to say that the price of machine is too much ,no dout machine is so better & its fullfill our nesserites .small gosalas has very oblised if its costs will be minimuse. also with its capicity pl contact me my no is 09136358469

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  2. mukesh

    i would like to have more detail about procedure for aurvedica agriculture. i live in malpura tehsil, tonk, rajasthan.
    pl advise me the suitable crops which require less water

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  3. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    (१)बहुत आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहा हूं।
    (२) जिन मशीनों-उपकरणों से भारत के अंतिम पंक्तिका कल्याण हो, वैसे साधन शोधे जाए, निर्माण किए जाए। जिससे हमारा ग्रामीण आगे बढे, हमारा कृषक आगे बढे, हमारा आखरी पंक्तिका साधारण नागरिक आगे बढे, ऐसे साधन लक्ष्य पूर्वक विकसित हो।
    (३) चिंतक, विचारक इसपर सोचें। इनकी प्रदर्शनियां लगे, कॉन्फ़रेन्सेस हो, इसी क्षेत्र को विकसित करने वाले निबंध पढे और प्रकाशित किए जाए। इन्हीं की स्पर्धा रखी जाए। इनके लिए विशेष नियत कालिक प्रारंभ किया जाए।{“किसीने तो, आगे आना चाहिए”}
    (४)हमारा साधारण कृषक भी अपनी बुद्धिमानीं का परिचय देगा, उसे प्रोत्साहित करना होगा।
    (५) सबसे अंतिम पंक्तिकी उन्नति हुए बिना, भारत उन्नत नहीं, कहला सकता। सारे देश चिंतकोने यही कहा हुआ है। यही कुंजी है, भारतको आगे बढाने की। कुंजी को भूलकर आगे नहीं बढा जा सकता।
    (६) आंदोलन भी चलाया जाए, तो इनके लिए। निम्नतम वर्ग उपर उठा तो फिर सारा देश आप ही उपर उठेगा। भारत उपर उठेगा। सारे भारतके हित चिंतक, विचारक, वैज्ञानिक इसी दिशामें सोचे। अपने विचार दर्शाएं।
    लेखिका, फ़िरदौस खान को इस विशेष विषय की ओर ध्यान दिलाने के लिए,धन्यवाद।

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  4. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    सकारात्मक,उपयोगी सामग्री की प्रस्तुती के लिए फिरदौस जी बधाई की पात्र हैं. मेरी शुभकामनाएं !

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  5. पंकज झा

    पंकज झा.

    चीज़ों को खोज-खोज कर निकालने में फिरदौस का जबाब नहीं. बहुत सुन्दर. सुनील जी ने बिलकुल ठीक कहा है ऐसे गुदरी के लालों के लिए पुरस्कार की व्यवस्था कहाँ होती है. वैसे एक अच्छी जानकारी शेयर करना चाहूँगा सुनील जी….छत्तीसगढ़ के एक सहकारिता से जुड़े व्यक्ति ने केन्द्र सरकार को यह प्रस्ताव दिया की किसानों को भी पद्मश्री पुरस्कार देना चाहिए. पता चला है के केन्द्र सरकार ने सहमति व्यक्त की है. शायद आने वाले साल से इसकी शुरुआत हो जाय.

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  6. sunil patel

    आदरणीया फिरदौस जी ने बहुत अच्छी जानकारी दी है. श्री धर्मवीर जी ने वाकई बहुत लाभदायक मशीन बनाई है. इन्हें राष्ट्रीय पुरुस्कार मिलना चाइये, किन्तु पुरुस्कार तो केवेल क्रिकेट खिलाडियो के लिए ही रिसर्व होते है.

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