मीनाक्षी दानू
कन्यालीकोट, उत्तराखंड
एक ही लक्ष्य है हमारा,
देश को बदल कर दिखाएंगे,
भले कोई ना दे साथ हमारा,
हम खुद मंजिल चढ जाएंगे,
उम्मीद एक बांधी है मैंने,
हम ये सब कर दिखाएंगे,
वो वर्दी होगी मेरे बदन पर,
जिसकी हम शान कहलाएंगे,
मत कर मेरे वतन फिक्र तू,
हम रक्षक बनकर आएंगे,
बनकर जब सैनिक हम,
अपने गांव में आएंगे,
तब अपने मां-बाबा की,
शान हम कहलाएंगे,
मत समझ हमें कमजोर जमाना,
हम तुझे पछाड़ कर दिखाएंगे,
भले कोई ना दे साथ हमारा,
हम खुद मंजिल चढ़ जाएंगे।।
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