डॉ. वेदप्रकाश
हाल ही में लंदन से प्रकाशित प्रतिष्ठित एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिका “द इकोनॉमिस्ट” की एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा को मजबूत करने वाला बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाशिंगटन के टैरिफ से परेशान यूरोपीय नेताओं के लिए भारत का अनुभव एक सीख हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने संतुलित और चतुर रणनीति के जरिए न केवल बाहरी दबावों को झेला बल्कि उन्हें घरेलू सुधारों को तेज करने का जरिया भी बनाया। पत्रिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के चीन के साथ संबंधों में सुधार आया है। निवेश पर लगी पाबंदियां हटाई गई हैं और कई अहम व्यापार समझौते किए गए हैं। ध्यातव्य है कि विगत लंबे समय से अमेरिका भारत सहित कई देशों पर टैरिफ का दबाव बनाए हुए है। ऐसे में उत्पादन और व्यापार की समूची व्यवस्था उलझन में पड़ी दिखाई देती है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी गति से बिना किसी विवाद में उलझे निरंतर चल रहा है।
इसके साथ-साथ विश्व के कई देशों के बीच युद्ध चल रहे हैं। वहां के लोग और संसाधन प्रभावित हो रहे हैं। व्यापार और दूसरे देशों के साथ भिन्न-भिन्न प्रकार की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। भारत के पड़ोसी देशों में भी राजनीतिक अस्थिरता एवं आंतरिक उतार-चढ़ाव और संघर्ष जारी हैं। वैश्विक चुनौतियों के ऐसे वातावरण के उपरांत भी वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की अनुमानित विकास दर 7.4 प्रतिशत है जो निश्चित ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूती को दर्शाता है। वर्ष 2014 से 2025 तक की भारत की विकास यात्रा को देखने से हम पाते हैं कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी युग प्रवर्तक के रूप में हमारे सामने हैं। वे राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर निरंतर नए संकल्पों का सृजन करते हैं। वे समय की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं को समझते हुए गंभीर चिंतन करते हुए योजनाएं बनाकर उन्हें क्रियान्वित भी करते हैं। विगत कुछ समय से वे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को लेकर काम कर रहे हैं। इसके लिए वे ढांचागत सुधारों के साथ-साथ सैन्य मजबूती,विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में मजबूत भारत हेतु भी लगातार काम कर रहे हैं।
भारत विविधताओं वाला विशाल देश है। ये विविधताएं जहां एक ओर भारत की शक्ति हैं वहीं दूसरी ओर इसमें चुनौतियां भी विद्यमान हैं लेकिन वर्ष 2014 के बाद से किसान, गरीब, मजदूर, महिला, युवा, गांव, शहर, ज्ञान-विज्ञान एवं सूचना- तकनीक आदि के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। स्वच्छ भारत, शौचालय युक्त भारत, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया, प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्किल इंडिया, नारी सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी युक्त भारत आदि ऐसी अनेक योजनाएं एवं दूरदर्शी संकल्प रहे हैं जिनसे सामान्य व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन हुए हैं। इसके साथ-साथ भारत ने आर्थिक दृष्टि से भी राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर नए कीर्तिमान बनाए हैं। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय फलक पर संवैधानिक संस्थाओं एवं लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया है तो वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह भी स्पष्ट किया है कि वसुधैव कुटुंबकम हमारे लिए कोई नई चीज नहीं है अपितु यह हमारा जीवन दर्शन है, जिसके तहत हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी वैश्विक फलक पर लगातार आतंकवाद, भ्रष्टाचार, ड्रग्स, अवैध हथियार, मनी लॉन्ड्रिंग, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक, प्रदूषण, आपसी सौहार्द, शांति एवं विस्तारवाद जैसे महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों और चुनौतियों पर समाधान के लिए आगे आए हैं। विश्व के अनेक देश उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं। एक कुशल रणनीतिकार के रूप में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर दीर्घकालिक सुधारों हेतु निरंतर प्रतिबद्ध रहते हैं। वैश्विक महामारी कोरोना ने विश्व के अनेक देशों की आंतरिक और आर्थिक स्थिति को अस्थिरता की ओर पहुंचा दिया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सुनियोजित ढंग से आत्मनिर्भरता का संकल्प लेकर सामने आए। उन्होंने न केवल भारत में अपितु विश्व के कई देशों को वैक्सीन से लेकर भिन्न-भिन्न प्रकार की आवश्यक सहायताएं पहुंचाई।
वे पूरे देश को एक बड़े और महत्वपूर्ण संकल्प के साथ लेकर आगे बढ़े। उनकी योजनाओं में रेहड़ी पटरी वाले और पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के लिए जितनी चिंता और प्रतिबद्धता होती है वे उतनी ही चिंता और प्रतिबद्धता देश के विकास में भागीदार उद्योगपतियों की भी करते हैं। देश के विभिन्न राज्यों से उनका समन्वय और संतुलन निरंतर रहता है तो विश्व के विभिन्न देशों के साथ भी वे उसी संतुलन से आगे बढ़ते हैं। वर्ष 2022 में अपनी जापान यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि- मेरा जो लालन पालन हुआ, मुझे जो संस्कार मिले, जिन-जिन लोगों ने मुझे गढ़ा है, उसके कारण मेरी भी एक आदत बन गई है-मुझे मक्खन पर लकीर करने में मजा नहीं आता। मैं पत्थर पर लकीर करता हूं।
राष्ट्रीय स्तर पर कई बार संसद में नए कानून बनाने और विभिन्न योजनाओं को लागू करते समय विपक्ष के दबाव और विरोध से लेकर जाति, भाषा और संप्रदाय आधारित आपसी वैमनस्य आदि समस्याएं आती हैं। वैश्विक फलक पर भी विभिन्न मुद्दों पर कूटनीतिक सूझबूझ से काम लेना पड़ता है। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी व्यावहारिकता, दृढ़ता, आत्मीयता और दूरदर्शिता के साथ प्रत्येक स्थिति को संभालते हुए सबको साथ लेकर आगे बढ़ते हैं।
डॉ. वेदप्रकाश