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    Homeसाहित्‍यकविताप्रकृति व पर्यावरण

    प्रकृति व पर्यावरण

    जब पल पल पेड़ कटते जायेंगे ,
    तब सब जंगल मैदान बन जायेंगे |
    मानव तब बार बार पछतायेगा ,
    जब सारे वे मरुस्थल बन जायेगे ||

    जब पौधे सिमट गए हो गमलो में ,
    प्रकृति सिमट गयी हो बंगलो में |
    जब उजाड़ जायेगे घौसले पेड़ो से,
    तब बन्द हो जायगे पक्षी पिंजरों में ||

    जब गांव बस रहे हो नगरों में,
    प्रदूषण फ़ैल रह हो नगरों में |
    जहरीली हवा होगी चारो तरफ,
    दम घुट जायेगा बंद कमरों में ||

    जब वाहन रेंग रहे हो सड़को पर,
    वे धुआँ उडा रहे हो सड़को पर |
    तब मानव सांस कैसे ले पायेगा ?
    वह दम तोड़ेगा अपना सड़को पर ||

    तब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखायेगी,
    मानव से हर तरह से बदले चुकायेगी |
    वह अपने नए रूप में जल्द आयेगी ,
    कोरोना जैसी नई महामारी लायेगी ||

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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