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नीट पेपर लीक: अब फैसला करना होगा – पुरानी व्यवस्था बचानी या भविष्य बनाना है


राजेश जैन

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 का रद्द होना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं था। यह उस भरोसे का टूटना था, जिसके सहारे 22 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अपने भविष्य का सपना देखते हैं। किसी छात्र ने दो साल तक मोबाइल से दूरी बनाई, किसी ने गांव छोड़कर शहर में कमरा लिया, किसी परिवार ने जमीन बेचकर कोचिंग फीस भरी। लेकिन कुछ लोगों के लालच और सिस्टम की कमजोरियों ने लाखों मेहनती विद्यार्थियों को अचानक अनिश्चितता के बीच खड़ा कर दिया। इस पूरे मामले ने देश के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है-क्या भारत की परीक्षा व्यवस्था अब पुराने ढांचे पर चल सकती है? या फिर समय आ गया है कि इसे पूरी तरह नए तरीके से तैयार किया जाए?

आज सबसे बड़ी चिंता केवल पेपर लीक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मन में पैदा हो रहा अविश्वास है। मेहनत करने वाला छात्र यदि यह महसूस करने लगे कि सिस्टम सुरक्षित नहीं है, तो यह केवल परीक्षा का संकट नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के नैतिक आधार का संकट बन जाता है।

पेपर लीक के पीछे संगठित माफिया तंत्र

इस बार की जांच में जो जानकारियां सामने आईं, उन्होंने यह साफ कर दिया कि पेपर लीक अब किसी एक सेंटर या छोटे गिरोह तक सीमित नहीं है। देहरादून, सीकर, जयपुर, गुरुग्राम और कई अन्य शहरों से जुड़े नेटवर्क यह संकेत देते हैं कि यह अब एक संगठित माफिया तंत्र का रूप ले चुका है। सबसे गंभीर बात यह है कि अब यह नेटवर्क नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, क्लोज्ड ग्रुप्स और डिजिटल पेमेंट सिस्टम जांच एजेंसियों के लिए भी चुनौती बन चुके हैं। यही वजह है कि अब केवल एफआईआर दर्ज करना या कुछ गिरफ्तारियां कर लेना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। जरूरत पूरी परीक्षा व्यवस्था को नए सिरे से डिजाइन करने की है।

जेईई मेन की तरह सीबीटी मोड में हो नीट

नीट दुनिया की सबसे बड़ी ऑफलाइन परीक्षाओं में गिनी जाती है। करीब 22 लाख विद्यार्थी, हजारों परीक्षा केंद्र और लाखों ओएमआर शीट्स। इतनी विशाल प्रक्रिया में प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से लेकर सेंटर तक पहुंचने तक दर्जनों हाथों से गुजरता है। यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। वर्तमान मॉडल पूरी तरह फिजिकल सिक्योरिटी पर आधारित है, जबकि अपराधी नेटवर्क अब डिजिटल और संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। यह असंतुलन ही लगातार खतरा पैदा कर रहा है। इसके विपरीत जेईई मेन जैसी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी मोड में  होती हैं। वहां प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के बाद स्क्रीन पर दिखाई देता है। अलग-अलग सेट और एल्गोरिदमिक प्रश्न वितरण के कारण पेपर लीक की संभावना बेहद कम हो जाती है। यही कारण है कि शिक्षा विशेषज्ञ लगातार यह कह रहे हैं कि अब नीट जैसी परीक्षा को भी धीरे-धीरे तकनीक आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा।

क्या भारत पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा के लिए तैयार है?

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या भारत जैसे विशाल देश में इतनी बड़ी परीक्षा ऑनलाइन कराना संभव है? जवाब है-संभव है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से। कोविड के बाद भारत ने तेजी से डिजिटल बदलाव देखा है। बैंकिंग, सरकारी सेवाएं, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल भुगतान गांवों तक पहुंच चुके हैं। जेईई मेन, सीयूएटी और कई बैंकिंग परीक्षाएं पहले से कंप्यूटर आधारित मोड में सफलतापूर्वक आयोजित हो रही हैं।

नीट को भी दो चरणों में आयोजित किया जा सकता है। पहले चरण में बड़े शहरों और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वाले क्षेत्रों में सीबीटी मोड लागू किया जाए। जहां सुविधाएं सीमित हैं, वहां कुछ समय तक हाइब्रिड मॉडल रखा जा सकता है। दूसरे चरण में मल्टी-सेशन ऑनलाइन परीक्षा शुरू की जा सकती है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले किसी के पास नहीं पहुंचेगा। यही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है।

जरूरी है सुरक्षा की नई सोच भी

सिर्फ परीक्षा को ऑनलाइन कर देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि व्यवस्था को वास्तव में सुरक्षित बनाना है, तो सुरक्षा की पूरी सोच बदलनी होगी।
सबसे पहले प्रश्नपत्र निर्माण और वितरण प्रक्रिया को जीरो ह्यूमन एक्सेस मॉडल की ओर ले जाना होगा। यानी पेपर तैयार होने के बाद किसी व्यक्ति के पास उसकी पूरी कॉपी न हो। एआई आधारित एन्क्रिप्शन और डिजिटल लॉकिंग सिस्टम अपनाने होंगे।
दूसरा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी को औपचारिकता नहीं, वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था बनाना होगा। एआई आधारित कैमरा सिस्टम, लाइव कंट्रोल रूम और रियल टाइम अलर्ट सिस्टम लागू किए जा सकते हैं।
तीसरा, बायोमेट्रिक सत्यापन को और मजबूत करना होगा। केवल फिंगरप्रिंट नहीं, बल्कि फेस रिकग्निशन, लाइव फोटो मैचिंग और मल्टी-लेयर पहचान प्रणाली लागू करनी होगी ताकि डमी उम्मीदवारों की एंट्री रोकी जा सके।
दुनिया के कई देशों ने इसी तरह के मॉडल अपनाए हैं। अमेरिका और यूरोप में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं पूरी तरह सीबीटी  मोड में होती हैं। चीन और दक्षिण कोरिया में एआई निगरानी, फेस रिकग्निशन और डिजिटल सिग्नल ब्लॉकर तक इस्तेमाल किए जाते हैं। भारत भी इन मॉडलों से सीख सकता है।