नए साल पर एक विरहणी की वेदना

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नया साल है ,बुरा हाल है,
चारो तरफ फैला बबाल है।
मिलने का मन करता है तुमसे,
मेरा भी अब बुरा हाल है।।

बाहर मै निकल नही सकती,
तुमसे भी मैं मिल नही सकती।
कैसा ये करोना काल आया है,
अपनो से भी मैं मिल न सकती।।

चल रही है अब ठंडी ठंडी हवाएं
बैरन बन चुकी है मेरी ठंडी हवाएं।
कैसे रोकूं इनको मै अब तुम बिन,
ये दिन रात अब मुझको सताए।।

कैसे मनाऊं ये नया साल तुम बिन ?
गिन रही हूं एक एक दिन तुम बिन।
चारो तरफ प्यार पे कोहरा छाया है,
कैसे काटू में ये ठंडी राते तुम बिन।।

नाइट कर्फ्यू नगर में लगा हुआ है,
पुलिस का भी पहरा लगा हुआ है।
बंद पड़े है सभी रेस्टुरेंट व मॉल,
फिर भी कहते लोग ये नया साल है।।

चारो तरफ अब अंधेरा मचा है,
चुनाव रैलियों का शोर मचा है।
कोरोना काल लगा है प्रोटोकॉल,
फिर कैसे मनाऊं मै ये नया साल।।

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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