लेख शख्सियत

अब न दिखेगा, होना किसी ‘बशीर’ बद्र का

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,

डॉ घनश्याम बादल 

लंबे समय से बीमार चल रहे बशीर बद्र नहीं रहे। 91 वर्ष की लंबी उम्र उतनी उल्लेखनीय नहीं है जितना बद्र साहब की शायरी का मुकाम रहा है।

जब जब भी आम आदमी तक पहुंचने वाली सादगी भरी भाषा के साथ गहरी बातें करने वाले शेयरों और कवियों का जिक्र होगा तो बशीर बद्र बहुत याद आएंगे जिंदगी का कोई ऐसा लम्हा नहीं जिस पर बशीर साहब ने कोई गजल या नजम न कही हो और सबसे बड़ी बात उसे सादगी के साथ कहीं की जहां उस्ताद शायर भी देखते रह गए और आम आदमी के दिल तक उनके असर पहुंच गए ना मुशायरा की महफिल उनके बिना जमती थी और नहीं सुखन वाद हा लोगों का आपस में मिलना।  मेरठ हो या भोपाल अपने पड़ोस पड़ोस में बशीर बद्र साहब के लिए दिलों में एक खास जगह होती थी। 

 उर्दू अदब की दुनिया में जब भी नर्म लहजे, दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों और आम आदमी की भाषा में कही गई गहरी बातों का ज़िक्र होगा, तो बशीर बद्र का नाम बड़े सम्मान और मोहब्बत के साथ लिया जाएगा। उनके जाने से केवल एक शायर नहीं, बल्कि एहसासों की पूरी एक तहज़ीब हमसे बिछड़ गई है। 91 वर्ष की आयु में उनका निधन उर्दू शायरी के उस दौर का अवसान है, जिसने मुहब्बत, रिश्तों, तन्हाई और इंसानी दर्द को नई ज़ुबान दी है। 

 अपने नाम के अनुरूप बशीर बद्र हमेशा शीर जैसे मीठे रहे।  बशीर बद्र की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उन्होंने ग़ज़ल को महफ़िलों की ऊँची दीवारों से निकालकर आम आदमी के दिल तक पहुँचा दिया। उनकी शायरी में न बनावट थी, न भाषाई आतंक। बशीर बद्र ने नई उर्दू ग़ज़ल को आधुनिक संवेदना दी। उन्होंने कठिन फ़ारसी लफ़्ज़ों की जगह सरल हिंदुस्तानी भाषा को अपनाया। यही कारण है कि उनकी ग़ज़लें कॉलेज के युवाओं से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर पीढ़ी की जुान पर चढ़ गईं। 

  मेरठ कॉलेज मेरठ में लंबे समय तक उर्दू के प्रोफेसर रहे बशीर बद्र की शायरी उनके अध्ययन और तजुर्बे का आईना थी। उनके अल्फ़ाज़ सीधे दिल में उतर जाते थे। शायद यही कारण है कि उनकी ग़ज़लें केवल मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि लोगों की निजी ज़िंदगी का हिस्सा बन गईं।उनका एक मशहूर शे’र आज भी हर महफ़िल में गूंजता है—

कोई हाथ भी मिलाएगा

जो गले मिलोगे तपाक से।

और यह शे’र तो जैसे जिंदगी का दर्शन बन गया—

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,

जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।

उनकी शायरी में प्रेम था, मगर वह केवल इश्क़िया नहीं था; उसमें जीवन की धूप-छाँव, समाज की विडंबनाएँ और इंसानी रिश्तों की टूटन भी थी। यही वजह है कि उनका यह शे’र हर दौर में प्रासंगिक लगता है—

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा हों। 

बशीर बद्र का जीवन भी किसी ग़ज़ल से कम नहीं था। 1987 में मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर और दुर्लभ किताबें जल गई थीं। उस हादसे ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया, लेकिन उसी दर्द ने उनकी शायरी को और गहरा बना दिया। दर्द भरे अंदाज में उन्होंने कहा था 

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में

तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में। 

लेकिन घर जलने वालों के प्रति भी उनके मन में कोई कड़वाहट या बदले की भावना नहीं थी जिसे उन्होंने इस शे’र के माध्यम से कहा –

शौक से मेरा घर जला, कोई आंच ना तुझ पे आएगी ,

लेकिन दूसरी लाइन में ही सियासतदानों और पक्षपाती मीडिया वालों को उन्होंने एक मैसेज जरूर दे दिया

यह जुबां किसी ने खरीद ली, यह कलम किसी का ग़ुलाम है

 बाद में भोपाल ने उन्हें अपना आशियाना दिया और वहीं से उनकी रचनात्मक यात्रा ने नया विस्तार पाया। 

उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी ने शिमला समझौते के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति को उनका एक शे’र सुनाया था। यह घटना बताती है कि बशीर बद्र केवल शायरों के शायर नहीं थे, बल्कि सत्ता के गलियारों तक उनकी आवाज़ पहुँची हुई थी

उनकी शख्सियत में अद्भुत सादगी थी। वे बड़े शायर होकर भी आम आदमी की तरह मिलते थे। एक पुराने साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि शायरी किताबों से नहीं, जिंदगी से निकलती है। शायद इसीलिए उनकी हर ग़ज़ल में जिंदगी साँस लेती दिखाई देती है।

   उनके कुछ और अमर शे’र आज उन्हें याद करते हुए बरबस ज़हन में उभर आते हैं—

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,

इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा।

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,

यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।

यूं ही बेसबब फिरा करो,

कोई शाम घर में रहा करो। 

   आज जब बशीर बद्र  हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनकी शायरी हमारे अकेलेपन की साथी  रहेगी। सच तो यह है कि कुछ शायर मरते नहीं, वे अपने अल्फ़ाज़ों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं। बशीर बद्र भी उन्हीं में से एक हैं।

हज़ार सफ़्हों का दीवान कौन पढ़ता है,

बशीर बद्रका कोई इंतिख़ाब दे जाओ।” 

उर्दू अदब के इस चमकते सितारे को विनम्र श्रद्धांजलि।