डॉ. आलोक सक्सेना
होली है…, आइए, आप भी इस बार की होली-2026 पर जम जाइए काव्य रंग में और तन कर व अपने जांबाज राष्ट्ररक्षक वायु योद्धाओं पर पूरा भरोसा रख कर मजा लीजिए ‘फाइटर योद्धा संग ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश की होली के काव्य बम्बगुल्ले’ का। साहब, होली है, पिछली होली की तरह से इस बार तो दुश्मन का पाजामा आगे से गीला हो और न पीछे से पीला करना बहुत जरूरी था।
बहनो और भाइयो, इस बार की होली पर हमारे जांबाज राष्ट्ररक्षक फाइटर योद्धा ने फिर से अपने करिश्मे आकाश में दिखाते हुए अपने सुखोई और राफेल की सफल उड़ान के जरिए दुश्मनों के क्षेत्र में लाल-पीला होकर फिर रंगमस्त होली खेली। विजय हासिल की। पहलगाम की घटना के बाद अपना पूरा देश दुखी था। अपने वायु योद्धा पूरे ‘कॉमन सेंस ऑफ परपज’ के साथ तैयार थे। उस दौरान अपने इन भारतीय वायु योद्धाओं का न कोई धर्म था, न ही इन वायु योद्धाओं में कोई जेंडर वाइस। था तो बस अपने देश और देशवासियों को सुरक्षित रख, अपने दुश्मन से बदला लेने का जबरदस्त प्रतिशोध।
प्रतिशोध की पूर्ति के बाद जश्न तो बनता है, भाई। फिर क्या होली आई, तो रंगों की मस्ती छाई। रंगों की मस्ती के बीच अपनी-अपनी डांस प्रस्तुति के साथ बेहतरीन रंग प्रदर्शित होता है। अपने योद्धा कहीं भी रहें, पलक झपकते चौकस रहते हैं और कभी भी कहीं भी दुश्मन को नहीं घुसने देते सरहद पर।
ऐसे तमाम जांबाजों को हमसब भारतवासी सदा ‘सैल्यूट’ करते हैं। जी हां, अपने राष्ट्ररक्षक जांबाजों की बात ही अनोखी है। होली का मौका हो और ये साथ हों तो उस मंच के क्या कहने! हमने सपने में देखा एक अनोखा सपना। आंख खुली तो बन गया अनोखा कवि सम्मेलन अपना। तो लीजिए पेश है बुरा न मानो होली है के साथ मेरे स्वपन में जन्मा हमारी प्रयोगधर्मी व्यंग्यकार सोच का एकदम ताजा ‘फाइटर योद्धा संग ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश की होली के काव्य बम्बगुल्ले’ विषय भरा हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन। जी, माइक टेस्टिंग के बाद हास्य-कवि हाजिर हैं,-
कवियों का परिचय जरूरी है, साहब मंच पर विराजमान हैं श्रीमान गोपाल चतुर्वेदी, जो इस वक्त हमारे बीच स्वर्ग से उतरे हैं, और साथ में बैठे हैं डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी और डॉ. आलोक सक्सेना जी जो आपको होली हास्य-व्यंग्य कविताएं सुना-सुनाकर उत्साहित करेंगे। कवि सम्मेलन का प्रयोगधर्मी महायोग संचालन कर रहे हैं, कायस्थ रत्न भारत भूषण डॉ. आलोक सक्सेना जी,-
होली है भई होली है…
ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश की होली है…
दुश्मन को सबक सिखा कर,
आज यहां व्यंग्यकारों ने भी जमकर खूब होली खेली।
हर तरफ जीत-प्रदर्शन कर चमका ली अपनी बात।
होली आई तो स्वर्ग से उतरे हैं श्री गोपाल चतुर्वेदी जी,-
होली के अवसर पर,
हमसे न रहा गया भाई,
स्वर्ग से उतर आए हम भी यहां भाई।
संचालक बीच में बोला,-
“सर, स्वर्ग में भी क्या गलाकाट प्रतिस्पर्धा होती हैं,भाई।”
वे चौंक कर बोले,-
‘राम भरोसे बैठ के लिखता रहा मैं,
प्रतिस्पर्धा की दौड़ न मैंने की, न जाना कभी भाई।
अपने राइटरों से ज्यादा अपने फाइटरों
पर विश्वास हमारा था।
दिखलाई उन्होंने ही अपनी जांबाजी
ऑपरेशन सिंदूर कर
पूरे विश्व को नव
जीवन दृष्टि दिखलाई।
हम तो राम झरोखे बैठ के अपना रंग दिखाए,
और होली की गुझियों के संग सदा जमीं पर
अपना लेखन रंग-भाग्य ही दिखा पाए।
होली के रंग में, रंगों की खोज में सबका अपना-अपना रंग है। इस कवि सम्मेलन में अपने शब्दों के प्रहार का जादू चलाने आ पहुचे हैं। आपके जाने-पहचाने डॉ. अशोक चक्रधर जी,-
होली की ठिठोली में
ऑपरेशन सिंदूर का इस बार जादू है।
जादू है भाई जादू है,
कहीं मिसाइल तो कहीं
दुश्मन के ठिकानों को तहस नहस
करते अपने जांबाज वायु योद्धाओं की बारी है।
आओ हम उन वीर जांबाजों को मिलकर ‘सैल्यूट’ करें
जो पहलगाम का बदला लेकर अपनी जमीन
पर सुरक्षित लौटे।
वे कहते-कहते
एक फाइटर योद्धा से जा टकराए
सबकुछ भूलभाल/
उसके जी-सूट को देख बोले,-
”ए मैं क्या मैं बोलूं, सुन-सुना,
मुझे भी सुना ऑपरेशन सिंदूर के कहानी’
जांबाज फाइटर बोला,
- ‘क्या कहा !, ऑपरेशन सिंदूर के कहानी !’
- ‘आकाश में फाइटर योद्धा के साथ
सुखोई ले उड़ना सीखो,
स्वयं जान जाओंगे
ऑपरेशन सिंदूर की कहानी।’
श्रीमान अशोक जी के बाद आ रहे हैं अपनी बात-बात पर भरपूर गालियों से भरे मसाले संभाले डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी जी,-
होली के अवसर पर
ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश की होली में,
‘डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी जी’ के रंग-संग
होली है भई होली है,
पागलखाना उपन्यास ले बैठो / या मरीचिका पढ़ लो ।
कहीं ऑपरेशन सिंदूर जैसी गोली है/
स्वांग भरी गोली है।
होली पर ज्ञान भी हो गए रंगीन,
वो गाना जिसमें
‘ज्ञान चतुर्वेदी जी’ ने भांग बहुत है घोटी,
ज्ञान है तो जहान है, स्वास्थ्य है।
ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश में पहुंच फाइटर योद्धाओं से बोले,-
‘डर लागे हमें कि तुम अब मिसाइल न छोड़ो कहीं,
हमारे मंच का सुन्दर श्रृंगार बनो एक दिन।
वायु योद्धाओं आपने की है
रक्षा देश और देशवासियों की
हम मिल करें आपका सम्मान
अब बारी हमारी है।’
ये थे डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी जी और अब बारी है अपने जांबाज सुखोई फाइटर योद्धा संग नव कविता लिए माइक संभालते कायस्थ रत्न भारत भूषण डॉ. आलोक सक्सेना जी,-
‘हमने देखा अपने जांबाज वायुयोद्धाओं को
बहुत नजदीक से,
जो जज्बों से थे भरे हुए,
ले शपथ मां भारती और देशवासियों
को सुरक्षित रखने की,
सिंदूर मिटा जो पहलगाम में,
ले बदले का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बने।
ले बदला लेने
अपने सुखोई फाइटर और राफेल ले
आकाशमार्ग से दुश्मन पर गरजे वो,
तूफानी हमलाकर वो
दुश्मन संरक्षित उनके नौ आतंकी
ठिकाने तबाह किए।
पहलगाम आतंकी हमले का बदला ले,
गिनती के पच्चीस मिनटों में
अपनी जवाबी कार्यवाई कर
अपनी सरज़मी पर
‘जयहिंद’ बोल
सुरक्षित वापस लौटे वो।
पहन हौसले, जुनून और जज्बे
का कवच,
ले फौजी युद्ध-प्रशिक्षण वो
जांबाज राष्ट्ररक्षक वायुयोद्धा बने।
धन्य हैं सब वो
राष्ट्ररक्षक जांबाज जननी माताएं,
बुरा वक्त पड़ा तो जिन्होंने अपनी जांबाज संतानों
के माथे पर सदा ‘विजयी भव’ के तिलक लगाए।
हमेशा ‘सैल्यूट’ करेगा भारत अब,
अपने
राष्ट्ररक्षक जांबाज वायुयोद्धाओं
और उनकी माताओं को।’