मूलतः पाकिस्तान की परिकल्पना थी – भगवा आतंकवाद – सन्डे गार्जियन

bhagwa aatankwadविगत रविवार को द संडे गार्जियन में श्री माधव नालपत का एक आलेख प्रकाशित हुआ है ! इस आलेख में काल्पनिक भगवा आतंक को पाक प्रायोजित बताया गया है, जिसमें भारतीय सिक्यूलर राजनेता भी जाने अनजाने सहयोगी बन गए ! लेख के अनुसार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में कार्यरत उसके आतंकी संगठनों पर से ध्यान हटाने के लिए तथा भारतीय मुस्लिमों के मन में हिन्दुओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के उद्देश्य से यह योजना बनाई थी ! प्रस्तुत है उक्त आलेख के अनूदित अंश –

एक दशक पूर्व की योजना थी भगवा आतंकवाद –

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जीएचक्यू रावलपिंडी द्वारा हिंदू आतंक की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए, अरब से भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाली लॉबी का इस्तेमाल किया गया था । इस समूह द्वारा इसके लिए योजनापूर्वक झूठे सबूत गढ़े गए, जिन्हें तात्कालिक लाभ की दृष्टि से उस समय भारतीय जांचकर्ताओं द्वारा स्वीकार किया गया । ‘हिंदू आतंक’ की इस अवधारणा को बल देने के पीछे जहाँ एक ओर भारतीय मुसलमानों के मन में हिंदुओं के प्रति अविश्वास बढ़ाना था, तो वहीं दूसरी ओर आईएसआई के प्रति निष्ठा रखने वाले स्थानीय आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों को एक छद्मआवरण देना था । इसके अलावा विश्व के अन्य देशों में भारतीयों को भी वैसा ही संदिग्ध बना देना उनका लक्ष्य था, जैसे पाकिस्तानी स्वयं हैं । स्मरणीय है कि उक्त तस्कर लॉबी का भारत में 15 बिलियन डॉलर का कारोबार फैला हुआ है !

“हिन्दू आतंक” के इस झूठे दुष्प्रचार के पीछे चार उद्देश्य थे ! पहला उद्देश्य तो यह था कि उग्रवाद और आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत और पाकिस्तान समान माने जाएँ । दूसरा उद्देश्य यह था कि तेहरान और काबुल की नजरों में दिल्ली के प्रति अविश्वास पैदा हो । स्मरणीय है कि ईरान, अफगानिस्तान और भारत के बीच सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लेकर बढ़ता सहयोग आईएसआई और उसके द्वारा संचालित छद्मयुद्ध को ध्वस्त कर सकता था !

तीसरा उद्देश्य चीन को यह दर्शाना था कि पाकिस्तान में चीनी नागरिकों के खिलाफ हो रही आतंकवादी घटनाओं के पीछे भारत का ही हाथ है, जिससे सम्पूर्ण उप महाद्वीप में खलीफा राज्य स्थापित करने का सपना संजोए आईएसआईएस और पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान के अति वहाबियों की गलबहियों का दोष भारत के मत्थे मढ़ा जा सके । चौथा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दर्शाना था कि भारत भी पाकिस्तान के समान उग्रवादी और आतंकवादी समूहों को प्रायोजित करता है, जिससे पाकिस्तान के खिलाफ बनते जा रहे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अभिमत का लाभ भारत को न मिल सके ।

सूत्रों का दावा है कि “सेना प्रमुख राहील शरीफ के निर्देशन में, सभी चार उद्देश्यों की पूर्ति बहुत अच्छी प्रकार से हुई, भले ही उनका पहला निशाना (हिंदू आतंक) में लगाए गए कथित आरोप बहुत ही लचर और कमजोर थे, किन्तु तात्कालिक राजनैतिक मौसम में अचूक सिद्ध हुए ।”

सूत्रों का यह भी दावा है कि जनरल राहील शरीफ इस वैश्विक धारणा को खंडित करने का प्रयास कर रहे थे कि भारत आतंक का शिकार है और अशांति भड़काने के मामले में पाकिस्तान हमलावर है । इसीलिए यह रणनीति बुनी गई ताकि विश्व जनमत द्वारा भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू पर तौला जाए । एक दशक पूर्व जनरल शरीफ द्वारा पाकिस्तान सैन्य अकादमी में इसी योजना पर काम किया गया ।

इन संपर्कों के अनुसार जनरल शरीफ ने 2011 में ही गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए एक विशेष सेल स्थापित किया था, क्योंकि जीएचक्यू को पूर्वानुमान था कि नरेंद्र मोदी ही 2014 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के संभावित उत्तराधिकारी हो सकते हैं । यह ध्यान देने योग्य बात है कि आईएसआई ने जोकि जीएचक्यू की अधीन ही कार्य करती है, गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से लंदन, न्यूयॉर्क और जेनेवा में नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने की हर संभव कोशिश की ! ये संगठन विशेष रूप से भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए ही बनाए गए थे और इनमें खालिस्तानी समूहों को भी शामिल किया गया था जो कि हाल के वर्षों में अपनी नींद तोड़कर पुनः अत्याधिक सक्रिय हो गए थे । इन गैर सरकारी संगठनों को आईएसआई से जुड़े व्यक्तियों द्वारा “सैन्य सहायता” के माध्यम से वाशिंगटन और अन्य राजधानियों में महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंचाया गया ।

पाकिस्तान की भावी कार्य योजना –

पाकिस्तान लम्बे समय से आरोप लगाता रहा है कि भारत पाकिस्तान में अस्थिरता फैला रहा है, तथा बांगलादेश के समान ही बलूचिस्तान बनाना चाहता है, साथ ही पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की मदद कर रहा है ! लेकिन इस आरोप की पुष्टि में उसके पास महज एक सबूत है, और वह है कुलभूषण यादव, जिस पर रॉ एजेंट होने का जीएचक्यू ने आरोप लगाया है और उसे ही वे विश्व स्तर पर पेश कर रहे हैं ! सूत्रों की मानें तो इस समय पाकिस्तान में नौ व्यक्तियों को पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की देखरेख में प्रशिक्षित किया जा रहा है, तथा वे शीघ्र ही न केवल पाकिस्तान में बल्कि ईरान और अफगानिस्तान में हुई आतंकी घटनाओं में भारतीय भागीदारी की कहानियों के साथ बाहर आने वाले है ।

सूत्रों का कहना है कि जनरल शरीफ ने व्यक्तिगत रूप से कुलभूषण यादव के बारे में चीन को बताया है कि यह भारतीय ग्वादर में उस लॉज को उड़ाना चाहता था, जहाँ चीनी तकनीशियन रह रहे थे ! साथ ही यह भी कि 45 अरब $ के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे में तोड़-फोड़ जैसे कृत्य करने का प्रयत्न कर रहा था ।

अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार को ईरान द्वारा यादव के बारे में डोजियर दिया गया है जो यह दर्शाता है कि भारत लगातार तालिबानी तत्वों के संपर्क में है और उन्हें घोषित नीति के विरुद्ध सहयोग प्रदान कर रहा है ! ईरान द्वारा दिए गए डोजियर में कहा गया है कि वह न केवल पाकिस्तान में बल्कि ईरान में भी बलूचों की सहायता कर रहा था । जल्द ही अन्य तथाकथित भारतीय एजेंट भी सामने लाये जायेंगे जो यह बताएँगे कि कैसे वे पाकिस्तान के खिलाफ ही नहीं, बल्कि चीन, अफगानिस्तान और ईरान के खिलाफ भी सक्रिय थे ।

सूत्रों का कहना है कि रावलपिंडी का उद्देश्य 2019 तक (जब प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान अवधि समाप्त होगी) दिल्ली को दक्षिण एशिया में आतंकवाद और उग्रवाद प्रायोजित करने वाले देश के रूप में प्रदर्शित करना है । यही कारण है कि पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज सार्वजनिक रूप से भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगा रहे हैं ।

पहले से ही, इस्लामाबाद आसियान देशों व जीसीसी प्रतिनिधियों को भारतीय हस्तक्षेप और आतंक को समर्थन के विषय में बढाचढा कर बताता रहा है ! और संभावना है कि तथाकथित भारतीय एजेंटों को सामने लाने की योजना इसी दिशा में एक और कदम होगा । संक्षेप में, पाकिस्तान भारत के खिलाफ वही हथियार उपयोग कर रहा है, जो भारत जीएचक्यू की गतिविधियों को उजागर करने के लिए करता रहा है।

2019 में लोकसभा चुनाव हैं, अतः आने वाले दो सालों में यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि भारत में आतंकी हमलों के ढोल पीटे जायें । जबसे मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, कश्मीर में लगभग 13 आत्मघाती हमले हुए है, एक संगठित प्रयास किया जा रहा है, जिससे घाटी में उग्रवाद पनपे । निर्देश दिया जा रहा है कि भारतीय नागरिकों में सांप्रदायिकता का जहर फैले । यह ध्यान देने योग्य बात है कि आईएसआई के जरखरीद रंगरूट भारत के हर जाति समुदाय में हैं । देखा जाये तो नेपाल में अधिकाँश हवाला व्यापारी हिन्दू हैं, जो दक्षिण एशिया में आईएसआई द्वारा नियंत्रित नशीले पदार्थों के व्यापार में शामिल हैं ।

जीएचक्यू सतर्कता से प्रधानमंत्री मोदी की नवीन कूटनीति, साथ ही पाकिस्तान, चीन और अमेरिका के प्रति द्रष्टिकोण को देख रही है । जनरलों के लिए अमेरिका के साथ हुआ घनिष्ठ सैन्य साझेदारी समझौता ही किसी दुस्वप्न से कम नहीं था, और साथ में अब चीन के साथ होने जा रही तीन खरब डॉलर की वाणिज्यिक साझेदारी ने तो उसे हक्का बक्का ही कर दिया है ! भारत-चीन आर्थिक कॉरिडोर की शुरुआत से माओवादी इलाकों में सड़क मार्ग निर्माण और विकास के अवसर के भरपूर अवसर की सुगबुगाहट से पाकिस्तान की छाती पर सांप लोट रहे हैं ।

1 COMMENT

  1. प्रस्तुत लेख की गंभीरता केंद्र में राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाओं के लिए है और संभवतः पहले से ही इस विषय पर विचार विमर्श करते सतर्क वे कोई उचित कार्यवाही कर रहे हैं लेकिन सामान्य भारतीय के जीवन में भगवा का महत्व बराबर बना रहना चाहिए| तथाकथित भगवा आतंकवाद, यदि सचमुच कोई ऐसा भय है, के पीछे उद्देश्य को समझते उन्हें विधि व्यवस्था एवं धर्मनिरपेक्षतावादी शासकीय नीतियों द्वारा नियंत्रण में लाना होगा| मैं तो कहूँगा भगवा आतंकवाद से भगवा शब्द निकाल इसे केवल आतंकवाद कहते निपटना चाहिए ताकि समाज में भगवा के महत्व पर कोई आंच न आने पाए| मेरे विचार में किसी प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय अथवा घरेलू आतंकवाद से जूझने का उत्तरदायित्व भारत में बहुसंख्यक हिन्दुओं पर है और परस्पर शंका, भय, व द्वेष के कारण भगवा में अविश्वास उन्हें निर्बल बना ऐसा कर पाने में असमर्थ कर देगा| सशक्त संगठित सभी भारतीयों को हिंदुत्व के आचरण द्वारा समाज में धर्मनिरपेक्षता के वातावरण में सभी के मानव अधिकारों का सम्मान करते भारत पुनर्निर्माण में योगदान देना होगा|

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,170 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress