लेखक परिचय

हरिहर शर्मा

हरिहर शर्मा

पूर्व अध्यक्ष केन्द्रीय सहकारी बेंक, शिवपुरी म.प्र.

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arvind-kejriwalआज के दैनिक भास्कर में प्रकाशित दो आलेखों ने चेतना को झकझोर दिया ! श्री एन. रघुरामन के आलेख में झारखंड की राजधानी रांची से महज 20 कि.मी. दूर ब्राम्बे के एक स्कूल की कहानी है, जिसमें प्री नर्सरी से लेकर दसवीं क्लास तक के बच्चे पढ़ते है ! ये सभी बच्चे या तो अनाथ हैं, या आसपास के खेतिहर मजदूरों के परिवारों के हैं ! इस स्कूल में 15 दिन पूर्व एक अभिनव प्रयोग हुआ ! ओनेस्टी शॉप के नाम से एक दूकान चालू की गई, जिसमें कोई दूकानदार नहीं था ! केवल दूकान में रखे हर सामान की मूल्य सूची लगी थी ! बच्चे अपने हाथ से सामान उठाते और उसकी कीमत कैशबॉक्स में डालते थे ! जब 15 दिन का हिसाब किताब किया गया तो मालूम हुआ कि जितना सामान बिक्रय हुआ है, कीमत उससे बच्चों द्वारा किया गया भुगतान उससे कहीं अधिक है ! यह शायद इसलिए हुआ होगा, क्योंकि दूकानदार न होने से बकाया पैसे वापस करने की व्यवस्था नहीं थी !
दूसरा आलेख श्री चेतन भगत का है, जिसमें जनता द्वारा “आम आदमी पार्टी” के रूप में देखे गए स्वप्न के बिखरने की दास्तान है ! एक ऐसी पार्टी जो सादगी को एक गुण के रूप में प्रदर्शित कर सत्ता में आई, जिसने इंडिया अगेंस्ट करप्शन गठित कर आम भारतीय को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागृत किया ! लेकिन नतीजा क्या निकला ? चेतन भगत लिखते हैं कि दिल्ली से लन्दन का इकोनोमी क्लास का एयर टिकिट 45 हजार का है, फ्लेट बेड, लाउंज और लाजबाब वाहन सुविधाओं बाला बिजनेस क्लास का टिकिट करीब दो लाख का है, जबकि दिल्ली सरकार के मंत्री जिस फर्स्ट क्लास में यात्रा करते हैं, उसका किराया चार लाख का है !
वे सरकारी खर्चे पर ही यह यात्राएं करते हैं, जिसका बोझ स्वाभाविक ही परोक्ष में हम और आप जैसे करदाताओं पर ही आता है ! और ये यात्राएं भी कैसी होती हैं ? प्रायः सतही – अनजाने से सेमीनार, अनौपचारिक किस्म के छात्र संस्थाओं के निमंत्रण, मतलब कोई भी ऐसा आयोजन जो उन्हें दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित महानगर से बाहर जाने का बहाना दे सके ! इस तरह की फर्जी, निरुपयोगी यात्राओं के लिए इस गरीब राष्ट्र का पैसा बर्बाद करना, कोई मजाक का विषय नहीं है, यह भारतीय राजनीति का सबसे दुखद पल है, क्योंकि “आप” के रूप में देखा गया स्वप्न बिखर गया है ! हमने आप का चयन तब किया था जब हम भ्रष्टाचार पर बहुत क्रोधित थे ! यह विश्वासघात आहत करने वाला है !
अब एक तीसरा समाचार ! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विज्ञापनों के कंटेंट और खर्च पर निगरानी रखने वाली, केंद्र द्वारा गठित रेगुलेशन कमेटी ने अरविंद केसरीवाल की छवि चमकाने हेतु देश भर के समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों को सरकारी खजाने का दुरुपयोग माना है और उसे आप पार्टी से बसूलने का आदेश दिया है !
उक्त तीनों बिन्दुओं को मिलाकर विचार करने से आप जैसे सुधी पाठकों को क्या लगता है ? जहाँ तक मेरा सवाल है, मुझे तो लगता है कि हमारे देश की आने वाली नई पीढ़ी स्वभावतः ईमानदार है, जबकि आज की राजनैतिक जमात निहायत अविश्वसनीय और निपट स्वार्थी ! किन्तु यही बात विश्वास जगाती है कि हमारा भविष्य उज्वल है ! देश के गरीब परिवारों से नैतिकता, सदाचार और ईमानदारी का पाठ पढ़कर निकलने वाली हमारे भविष्य की पौध भारत का भाल उन्नत करेगी !

One Response to “अनाथ बच्चे बनाम केजरीवाल !”

  1. mahendra gupta

    ईमानदारी की शेखियां भर कर सत्ता में आ कर रूप बदल लेने वाले लोगों का ज्वलंत उदाहरण केज्रिवाल्व उनके मंत्री हैं , भरस्टाचार , पक्ष पात , व वादों से मुकर जाने वाले नेताओं से तंग आ कर जनता जब ऐसे लोगों पर विश्वास कर सत्ता सोंपती है और उसके साथ वे भी वही दगाबाजी करतय हैं तो आखिर किस पर विश्वास किया जाये , “आप” पार्टी ने तो जिस तरह तेवर बदले और झूठ से ही सारी कायनात बदलने के जौहर दिखाने शुरू किये तो एक्सपोज़ हो गए इन्होंने कांग्रेस व भा ज पा को भला कहला दिया आज “आप ” व इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नजर नहीं आता , जो लाखों के पैकेज छोड़ कर देश के लिए कुछ करने के जज्बे सेआप के साथ आये वे बिल्कुल ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं , लगता है सामाजिक राजनीतिक परिवर्तन की आड़ में अपराधी तत्व ही इस पार्टी में घुस आये , व बहुत शेखी हांकने वाले केजरी भी सत्ता लोलुपता में उनके साथ हो गए , और उसका यह को मिल रहा है , केजरी के आम आदमी मंत्री बन कर जिस क्लास में हवाई यात्रा कर रहे हैं , शायद केंद्र व अन्य किसी राज्य के मंत्री भी ऐसा नहीं कर रहे , वे सभी तरह से ज्यादा विलासी हो गए हैं , और यह समझ रहें हैं कि यह सब बस एक बार ही होना है फिर कुछ नहीं मिलना है
    आज का युवा परिवर्तन की राह ढूंढ रहा है , लेकिन उसे सही राह दिखाने वाला कोई नहीं है , सब विश्वासघात में ही लगे हैं , ऐसे में एक मात्र उम्मीद मोदी से ही लगती है , क्योंकि अन्य पार्टियों न कोई उपयुक्त नेता है और न विज़न
    देखो देश किधर जाता है यह अगले दो साल में तय हो जाएगा

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