पाखंडी साधुओं की पोल कौन खोलेगा?

अभी नोएडा की पुलिस ने एक ‘बिल्डर बाबा’ को गिरफ्तार किया है। यह बाबा संन्यासी का भेस धारण करके लोगों को ठगता रहा है। इसने सस्ते फ्लैट बेचने के नाम पर करोड़ों रु. की ठगी की है। लगता है, यह बाबा आसाराम और उसके लड़के की तरह भोला है। वरना भारत में बाबा लोगों पर कौन हाथ डाल सकता है? वह बाबा भी क्या बाबा है, जो कानून की गिरफ्त में आ जाए! लोग बाबा का भेस इसीलिए धारण करते हैं कि ठगना आसान हो जाए।

इतालवी चिंतक निकोलो मेकियावेली ने अब से 500 साल पहले लिखा था कि दुनिया में बुद्धुओं की लंबी जमात है। वह ठगी जाने के लिए तैयार बैठी रहती है। बस उन्हें कोई ठगने वाला चाहिए। आजकल हमारे देश में पांच-सितारा साधुओं की भरमार हो गई है। ये साधु करोड़ों की कारों में सफर करते हैं, महलनुमा वातानुकूलित मकानों में रहते हैं, चांदी और सोने के बर्तनों में भोग लगाते हैं, चेलों और चेलियों से दिन-रात सेवा करवाते हैं और उपदेश झाड़ते हैं, त्याग-तपस्या का, सादगी और सीधेपन का, स्वच्छता और पवित्रता का! बिना कमाए, बिना पसीना बहाए, उनके पास करोड़ों रु. की दौलत जमा होती है। उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य अपनी आरती उतरवाना, अपनी पूजा करवाना, अपने चेले फांसते रहना है। पूजा-पाठ, जप-तप, कंठी-माला, जंतर-मंतर– ये सब उनके साधन होते हैं।

समझ में नहीं आता कि इन पाखंडियों के खिलाफ कोई योजनाबद्ध अभियान देश में क्यों नहीं चलता? अपने आप को महान नेता समझने वाले लोग भी इन धूर्त साधुओं का आशीर्वाद लेने पहुंच जाते हैं। अभी दो साल पहले जब राजू हीरानी और आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ बनी तो तहलका मच गया। मैंने उस फिल्म को देखा, बहुत पसंद किया और उसे पीके याने ‘पाखंड खडिनी’ नाम दिया। उस पर लिखा, बोला और उसके विरोधियों को समझाया, वरना हमारे भोले धर्मप्रेमी लोग उसमें आग लगा देते।

फिल्म जगत के लोगों से मैं अनुरोध करुंगा कि किसी भी पाखंडी को न बख्शें, चाहे वह कोई साधु हो, पादरी हो, मौलाना हो, ग्रंथी हो, गुरु हो या मास्टर हो। सच्चे साधुओं की समुचित प्रतिष्ठा तभी होगी, जबकि इन पाखंडी साधुओं के हर पैंतरे की पोल वे अपनी फिल्मों में खोलते रहें।

यह काम महर्षि दयानंद सरस्वती ने अब से डेढ़ सौ साल पहले हरिद्वार के कुंभ में पाखंड खडिनी पताका गाड़कर किया था। मैं तो सभी संप्रदायों के अग्रणी लोगों से कहता हूं कि वे सजग-सावधान रहें। केवल उन्हीं साधुओं, इमामों, पादरियों और ग्रंथियों का सम्मान करें, जो चरित्रवान हों, विद्वान हों, तपस्वी हों। किसी पर भी अंधविश्वास न करें।

साधुओं को पाखंडी बनाने की जिम्मेदारी उनके भक्तों की भी है। वे साधुओं को अपनी सभी लतें लगा देते हैं। उत्तम भक्त वे ही हैं, जो अपने पूज्यों के आचरण पर कड़ी नजर रखते हैं और कसौटी पर कसे बिना किसी को खरा नहीं कहते हैं।

Leave a Reply

%d bloggers like this: