लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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pakistan-enडा. वेद प्रताप वैदिक

पाकिस्तान के गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान यों तो काफी विनम्र आदमी हैं लेकिन वे दो-टूक बातें करने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने इस बार वह तेवर अख्तियार किया है, जो अयूब खान, जुल्फिकारअली भुट्टो और जनरल जिया को भी पीछे छोड़ देता है। चौधरी निसार के इस शुद्ध पाकिस्तानी तेवर के आगे उसके बड़े नेताओं के तेवर काफी फीके लगते हैं। निसार ने कहा है कि डेविड ट्रंप अपने आप को क्या समझते हैं? वे बुद्धू हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि पाकिस्तान अमेरिका का गुलाम नहीं है। वह उसकी काॅलोनी नहीं है। ये बात निसार ने ट्रंप के जवाब में कही है। ट्रंप आजकल अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने किसी इंटरव्यू में कह दिया कि यदि वे राष्ट्रपति बन गए तो वे डाॅ. शकील अफरीदी को दो मिनिट में रिहा करवा देंगे। डाॅ. अफरीदी को पाकिस्तान की सरकार ने पांच साल के लिए जेल में डाल रखा है, क्योंकि उसने उसामा बिन लादेन के गुप्त ठिकाने का पता अमेरिकियों को दे दिया था। अमेरिकियों ने उसामा को मार गिराया था। गृहमंत्री निसार ने कहा है कि ट्रंप कौन होते हैं, अफरीदी को रिहा करवानेवाले? पाकिस्तान एक संप्रभु राष्ट्र है।

पाकिस्तान की संप्रभुता के बारे में ऐसा बयान मेरी याद में आज तक किसी पाकिस्तानी जनरल या नेता ने नहीं दिया। राष्ट्रपति अयूब खान ने भी अमेरिकियों को ‘मालिक नहीं, मित्र’ कहा था। ‘फ्रेंड्स, नाॅट मास्टर्स’। लेकिन चौधरी निसार ने ऐसा कड़ुआ सच बोल दिया है, जो हर पाकिस्तानी के दिल को कचोटता रहता है। हर पाकिस्तानी अमेरिका की गुलामी से परेशान है। पाकिस्तान में किसी देश की सबसे कम इज्जत है तो वह अमेरिका की ही है। अमेरिका के खिलाफ वहां जितने प्रदर्शन होते हैं, किसी देश के खिलाफ नहीं होते। अमेरिका के साथ वह सुरक्षा-संधि में भी बंधा और उसे अरबों डाॅलर भी मिले लेकिन अमेरिका की नज़र में वह अभी भी एक गुंडा-देश (रोग़ स्टेट) है। ओबामा और हिलैरी क्लिंटन ने भी यह कहा है कि वे पाकिस्तान की मदद जरुर करते हैं लेकिन उस पर भरोसा बिल्कुल नहीं करते। इसीलिए उसामा पर किए गए अमेरिकी हमले की भनक भी उन्होंने उसे नहीं लगने दी।

अब अमेरिका ने पाकिस्तान को 70 करोड़ डाॅलर के एफ-16 जहाज भी देने से मना कर दिया है। लगभग विदेश मंत्री सरताज अजीज ने बड़े गरिमापूर्ण ढंग से प्रतिक्रिया की है। उन्होंने कहा है कि कहीं से पैसों का इंतजाम हो गया तो वे अमेरिका को पूरी कीमत चुकाकर इन जहाजों को लें लेंगे। वरना कहीं से कोई दूसरे जहाज खरीदेंगे। मैं मियां नवाज़ शरीफ, आसिफ ज़रदारी और इमरान खान जैसे नेताओं और पाकिस्तानी जनरलों से भी पूछता रहा हूं कि आपको अमेरिका की यह गुलामी क्यों करनी चाहिए? आप हमारी तरह सिर ऊंचा उठाकर क्यों नहीं रहते? आप भारत के डर के मारे अपनी पगड़ी अमेरिका के जूतों पर क्यों रख देते हैं? अमेरिका ने आज तक पाकिस्तान का भला कभी न किया है, न वह करेगा।

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