नेताजी की गुमशुदगी के साथ ही गायब होती गई पॉजिटिव पॉलिटिक्स

उत्तम मुखर्जी

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कई बातें ऐसी हैं जो आज भी भारतीय राजनीति को झकझोरती हैं । उनकी ज़िंदगी का हर हिस्सा चर्चे को जन्म देता है । इसी कड़ी में एक अहम हिस्सा है नेताजी सुभाष का एमिली शेंकल से प्रेम सम्बन्ध ।
सन 1932 में जेल में रहने के दौरान जब नेताजी गंभीर रूप से बीमार पड़े तो अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें इलाज़ के लिए यूरोप जाने की इजाज़त दी । सुभाष चन्द्र उस समय ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना गए । वहां उन्होंने भारतीय छात्रों से देश की आज़ादी को लेकर बातचीत की । उसी दरम्यान एक प्रकाशक ने नेताजी को ‘ द इंडियन स्ट्रगल ‘ नामक पुस्तक लिखने का ऑफर दिया । किताब लिखने के लिए सुभाष बोस को एक सहयोगी की ज़रूरत थी । पहला सहयोगी इंटरव्यू में फेल हो गई जबकि दूसरी उम्मीदवार सफल हुई । उसे टंकण का भी ज्ञान था ।
दूसरी उम्मीदवार थी 23 साल की एमिली शेंकल , जिनसे नेताजी को प्यार हो गया , ऐसा दावा किया जाता है । उस समय सुभाष की उम्र 37 साल थी ।

नेताजी के परिवार के सुगत बोस की किताब है ‘ हिज मेजेस्टी ओपोनेंट : नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एंड इंडियाज़ स्ट्रगल अगेंस्ट अंपायर ‘ में उन्होंने एमिली का ज़िक्र किया है । नेताजी के आग्रह पर एमिली ‘द हिन्दू’ और ‘मॉडर्न रिव्यु’ में भी लिखती रहीं । एकबार एमिली ने भारतीय दर्शन पर कुछ किताबें भेजने का आग्रह मिस्टर बोस से किया । एमिली नेताजी को इसी नाम से संबोधित करती थीं । सुभाष ने जवाब में लिखा था जो पुस्तकें पहले से उन्हें दी गई हैं वे ही यूं पड़ी हुई हैं तो नई किताबों से शेल्फ की शोभा बढ़ाने का क्या औचित्य है ?
नेताजी के भाई शरद चन्द्र बोस ने भी लिखा है कि अपने जीवन में सुभाष को प्रेम और शादी के कई ऑफर मिले लेकिन वे मौन रहे । नेताजी कहते रहे देश उनकी प्राथमिकता में है ।
रुद्रांशु मुखर्जी ने भी सुभाष पर एक किताब लिखी है , ‘ नेहरू एंड बोस : पैरेलल लाइव्स ‘..दोनों की पार्टनर की भूमिका का इस पुस्तक में ज़िक्र है । सुभाष ने एमिली को कई प्रेम पत्र दिए । एक प्रेम पत्र को सुभाष के नष्ट करने के आग्रह के बाद भी एमिली संभालकर रखी थी । सुभाष ने लिखा है , देश मेरे लिए सबकुछ है । शायद मुझे फांसी पर लटका दिया जाए । गोली मार दिया जाए । जेलों में सड़ा दिया जाए । शायद इस जन्म में मुलाकात भी न हो । मेरे साथ सम्बंध आत्मा से जुड़ा रहा सकता है। शायद अगले जन्म में फिर मिलें ।
सुभाष को सिगरेट छुड़ाने के लिए भी एमिली प्रयास करती रही ।
दावा यह भी किया जाता है कि एमिली को एक कन्या संतान हुई । 1942 में नेताजी अपनी बेटी अनीता को देखने गए । फिर अंतहीन यात्रा के लिए निकल पड़े । फिर कभी नहीं लौटे । सुभाष ने एमिली और अनीता को लेकर भी कई पत्र अपने बड़े भाई शरदजी को लिखे हैं ।हालांकि एमिली ने मिस्टर बोस दिए वचन के अनुसार अपने सम्बन्ध को गोपनीय ही रखा तथा बोस परिवार से मदद लेने से भी इंकार कर दिया । एक तारघर में काम कर अपनी बेटी अनीता को वे दिग्गज अर्थशास्त्री बनाई ।
कहा यह भी जाता है कि नेताजी अगर आज़ाद भारत में लौटते तो उन्हें युद्धबन्दी बनाकर तीन मुल्क की कार्रवाई शुरू होती । उनकी कथित मृत्यु को लेकर रहस्य आज भी बरकरार है । पहले की सरकार पर तथ्यों को दबाने और दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं करने के आरोप लगते रहे हैं । वर्तमान सरकार ने कुछ दस्तावेज सामने लाए । फिर आज के रहनुमाओं ने भी रहस्यमय चुप्पी साध ली ।
इस वर्ष फिर नेताजी अकस्मात प्रासंगिक हो गए हैं । कोलकाता से लेकर दिल्ली तक मिस्टर बोस छाए हैं। शायद फिर कुछ पन्ने खुले और अवाम अपने प्रिय नेताजी के संदर्भ में अनकही बातें जान पाए । समझ पाए । हालांकि इस बीच एक पॉजिटिव बात हुई है । छत्तीसगढ़ के बालोद के दुग्ध उत्पादकों ने नेताजी के नारे को जीवन का मूल मंत्र बनाकर आर्थिक आज़ादी हासिल कर ली है। ‘तुम मुझे खून दो ; मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा ‘ नारे के अनुरूप ‘तुम मुझे दूध दो ; मैं तुम्हें आर्थिक आज़ादी दूंगा ‘ नारे वहां के तत्कालीन जिलाधिकारी ने दिया तो वहां का दूध ब्रांडेड मिल्क प्रोडक्ट का मुकाबला करने लगा ।
सुभाष आज नहीं हैं लेकिन युवाओं के लिए उन्होंने जो सपना देखा था वह आज बिखरता नज़र आ रहा है । मिस्टर बोस देश के लिए नेताजी बन गए लेकिन आज़ादी के बाद यह शब्द मज़ाक बनता चला गया । सुभाष से नेताजी बनने का सफ़र ही मुल्क की इज़्ज़त बढ़ा सकता है । उनका अंतर्ध्यान आज भी देश-दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है..उनकी रहस्यमय गुमशुदगी के साथ ईमानदार पॉलिटिक्स की गुमशुदगी का राज भी छिपा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,151 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress