पुनीत उपाध्याय
भारत सरकार क्षेत्रवार कृषि नीति, नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून की तैयारी कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में लखनऊ में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार कृषि नीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब खेती के लिए पूरे देश में एक जैसी नीति के बजाए क्षेत्रवार रणनीति बनाई जाएगी। जलवायुए पानी की उपलब्धता, भूमि की स्थिति और फसल पैटर्न के आधार पर अलग.अलग क्षेत्रों के लिए अलग योजना तैयार होगी। उन्होंने कहा कि भारत को कृषि विकास के लिए अब व्यावहारिक और स्थानीय जरूरतों पर आधारित मॉडल अपनाना होगा। लखनऊ सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का संदेश साफ रहा कि आने वाला समय वैज्ञानिक, टिकाऊ, जलवायु अनुकूल और किसान.केंद्रित खेती का है। यदि राज्य और केंद्र मिलकर काम करें तो भारतीय कृषि को नई ऊंचाई दी जा सकती है। इसी सोच के तहत देश को पांच कृषि क्षेत्रों में विभाजित किया गया है और हर क्षेत्र के लिए अलग सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं ताकि राज्यों के साथ मिलकर खरीफ और रबी मौसम की ठोस कार्ययोजना बनाई जा सके। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से अपील की कि वे अपनी कृषि परिस्थितियों के अनुसार अलग रोडमैप तैयार करें। उन्होंने कहा कि जब तक हर राज्य अपनी मिट्टी, पानी, फसल और बाजार के हिसाब से दीर्घकालिक योजना नहीं बनाएगा तब तक कृषि का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से राज्यों को पूरा सहयोग देगी।
गेहूं.धान से आगे बढ़ेगी कृषि नीति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन, खासकर गेहूं और धान में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन आने वाले समय में केवल इन फसलों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। अब दालें, तिलहन, बागवानी, फल, सब्जियां, खाद्य प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने कृषि क्षेत्र के तीन बड़े लक्ष्य हैं- देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना। चौहान ने बताया कि सरकार की कृषि रणनीति छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है-उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, किसानों को मेहनत का उचित मूल्य दिलाना, नुकसान होने पर मुआवजा देना, फसल विविधीकरण बढ़ाना और किसानों को बाजार से जोड़ना। खेती को अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं देखा जा सकता। इसे प्रसंस्करण, निर्यात, तकनीक और पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़कर देखना होगा।
मंत्री ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं इसलिए कम जमीन से अधिक आय देने वाले मॉडल अपनाने होंगे। उन्होंने अंतरवर्तीय फसल प्रणाली, अनाज के साथ फल.सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती जैसे एकीकृत कृषि मॉडल को छोटे किसानों के लिए उपयोगी बताया। केंद्र सरकार ऐसे कई मॉडल तैयार कर चुकी है जिन्हें राज्य अपनी परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकते हैं।
देश की एक बैठक नहीं अब क्षेत्रवार रणनीति बनेगी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले खरीफ और रबी सीजन को लेकर पूरे देश के लिए एक ही बैठक होती थी, लेकिन भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में एक मंच पर सभी क्षेत्रों की समस्याओं पर गहराई से चर्चा संभव नहीं थी। इसी कारण अब जोनल कॉन्फ्रेंस मॉडल शुरू किया गया है ताकि हर क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, पानी, फसल प्रणाली और स्थानीय चुनौतियों के अनुसार रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत कृषि दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र हैए जहां पंजाब और हरियाणा हरित क्रांति के केंद्र रहे हैं जबकि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में किसानों को सस्ता संस्थागत ऋण नहीं मिल पा रहा है। इसलिए हर पात्र किसान तक किसान क्रेडिट कार्ड पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि किसान समय पर बीज, उर्वरक, मशीनरी और अन्य संसाधन खरीद सकें। उन्होंने फार्मर आईडी को कृषि प्रशासन में बड़ा सुधार बताया। इसके तहत भूमि रिकॉर्ड, खसरा नंबर, पशुधन और किसान से जुड़ी अन्य जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी जिससे योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता से मिल सकेगा। मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक शोध का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए विकासित कृषि संकल्प अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीमें गांव.गांव जाकर किसान सभाएं करेंगी और नई तकनीक, उन्नत बीज तथा वैज्ञानिक खेती की जानकारी देंगी। उन्होंने कहा कि जब तक प्रयोगशाला का ज्ञान खेत तक नहीं पहुंचेगा तब तक शोध का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिलेगा।
नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा नकली बीज, नकली कीटनाशक और मिलावटी कृषि उत्पादों के खिलाफ कड़े कानून बनाने को लेकर रही। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त सख्त नहीं हैं। कई मामलों में मामूली जुर्माने का प्रावधान है जिससे दोषियों में डर नहीं बनता। इसलिए बीज अधिनियम और कीटनाशक कानून में सख्त प्रावधान लाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसानों की फसल का मामला नहीं है बल्कि मानव स्वास्थ्य से भी जुड़ा गंभीर विषय है। प्राकृतिक खेती और बागवानी को बढ़ावा देने को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। शुरुआती वर्षों में किसानों को आने वाली चुनौतियों को देखते हुए प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। देश में नौ क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं जहां से किसानों को रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बागवानी क्षेत्र को नई गति मिलेगी।