लेखक परिचय

लक्ष्मी जायसवाल

लक्ष्मी जायसवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा तथा आज समाज जैसे समाचार पत्रों में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका साधना पथ में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत। सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री लेखन में विशेष रुचि।

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याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना
वो तुम्हें देखकर मेरा खुद से ही नज़रें चुराना
महफ़िल के बीच छुपकर तुमसे नज़रें मिलाना
याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना।
याद है मुझे आज भी वहां मेरा वो देर से आना
बातें करते-करते तुम्हारी बातों में खो जाना।
तुमसे और बात करने के लिए मेरा ढूंढ़ना बहाना
याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना।

याद है मुझे अब भी तुम्हारा मेरा दिल धड़काना
याद है अब भी मुझे वो मेरा शर्म से नज़रें झुकाना।
याद है मुझे अब भी तुमसे हाल-ए-दिल छिपाना।
याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना। 

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