कहानी

आज़ादी के साल पचहत्तर 

पात्र -बच्चे —-

                १-सूरज -आयु १५ वर्ष 

                २- चंदा-आयु ११ वर्ष 

                ३-रहमान-आयु १६ वर्ष 

                ४-और सलमा-आयु १३ वर्ष 

              पर्दा खुलता है ,मंच पर सम्पूर्ण अन्धकार है |अचानक नगाड़े की आवाज़ सुनाई पड़ती है और एक स्त्री स्वर गूँजता है -आज़ादी के साल पचहत्तर.. 

उत्तर में पुरुष स्वर गूँजता है -मना रहे हैं हम सब घर- घर 

             [ आज़ादी के साल पचहत्तर, 

              मना रहे हैं हम सब घर- घर] [ सामूहिक स्वर में  ] -२बार 

पुनः स्त्री स्वर -बीत गए पचहत्तर साल ,

पुरुष स्वर -देश हुआ कितना खुश हाल? 

स्त्री स्वर -इन पचहत्तर सालों में ,हमने क्या- क्या पाया है? 

पुरुष स्वर -सूरज नया उगाया है ,नया उजाला लाया है |[सारी आवाजें परदे के पीछे से आ रही हैं ]

                  [ मंच पर प्रकाश आ जाता है और कुर्सियों पर सूरज और चन्दा बैठे दिखाई पड़ते हैं |

   चंदा -भैया यह कैसा शोरगुल है ,कैसी नारेबाजी हो रही है ,नगाड़े भी बज रहे हैं ,क्या कोई चुनाव है ?

सूरज- धत पगली ,अभी कहाँ हैं चुनाव उनाव |

चन्दा -फिर यह हो हल्ला नारेबाजी ,क्यों हो रहा है यह सब ?

सूरज-बहन यह आज़ादी के जश्न की तैयारी है |कल पन्दरह अगस्त है न ,तुम्हें मालूम है न, इस दिन हम आज़ाद हुए थे ||

चन्दा- लेकिन स्वतंत्रता दिवस तो हम हर साल मनाते है पर ऐसा हो हल्ला नगाड़े, ऐसा तो कभी  नहीं देखा |

सूरज-इस साल कोई ख़ास बात है |

चन्दा- ख़ास बात !क्या खास बात है? भैया बताओ न |

सूरज -इस साल हम आज़ादी की हीरक जयंती मनाएंगे ,हीरक जयंती [हीरक जयंती पर जोर ]

चन्दा- हीरक जयंती,यह हीरक जयंती क्या होती है भैया ?

सूरज- लो अब इतना भी नहीं जानती तुम |किसी घटना के पचहत्तर साल बीत जाने पर उस घटना के उपलक्ष में जो जश्न मनाया जाता है उसे हीरक जयंती कहते हैं |

चंदा- -भैया हम १५ अगस्त को आज़ाद हुए थे तो गुलाम कब हुए थे और क्यों हुए थे?

सूरज –फिर प्रश्न !इसलिए तो कहता हूँ किताबें पढ़ा करो |मोबाइल में फालतू सहेलियों से चेटिंग न करके काम की चीजें देखा करो तो ज्ञान बढ़ेगा ,अक्ल आएगी |

चंदा– ऊँह ,क्या मैं काम की चीजें नहीं देखती मोबाइल में ?देखती हूँ, लेकिन मुझे तो इतिहास समझ में ही नहीं आता |हमें आज़ादी अंगेजों से मिली थी न ?हम कितने दिन गुलाम रहे ?

सूरज –दिन !अरे शर्म करो ,हम लगभग  दो सौ साल तक गुलाम रहे अंग्रजों के |हमें  ,तरह- तरह की यातनाएं दी गईं ,अरे हमें तो जानवरों से भी बत्तर समझा गया |कई क्लबों और आलिशान होटलों के बाहर लिखा होता था कुत्तों और भारतीयों का प्रवेश निषेध |

चन्दा -तो क्या हम दो सौ साल पहले आज़ाद थे ?

सूरज –थे भी और नहीं भी थे |हमारा देश पहले बहुत  वैभव  शाली था |यह सोने की चिड़िया  कहलाता था |यहां की भूमि देव भूमि थी |यहां के संतों ने, मनीषियों  ने, ऋषियों ने वेद लिखे, पुराण लिखे ,रामायण लिखी, महाभारत ,गीता लिखी स्मृतियाँ  लिखी और  अनेकों अनेक सद ग्रन्थ लिखे |यहां सुश्रुत ,चरक और धन्वंतरि  जैसे अद्वितीय  वैद्य हुए हकीम हुए  ,भास्कराचार्य ,आर्यभट्ट    जैसे  गणिताचार्य हुए बाल्मीकि ,वेद व्यास   जैसे संत लेखक कवि  हुए ,चाणक्य जैसे अर्थशास्त्री हुए और……..

चंदा –फिर हम गुलाम कैसे हो गए?

                       [तभी मंच पर रहमान और सलमा का प्रवेश ]

रहमान– हम अपनी मूर्खताओं के कारण गुलाम हो गए चंदा बहन |हमारे देश में बहुत सारे छोटे- बड़े राज्य थे |सबमें अलग- अलग राजे महाराजे थे |ये राजे  महाराजे  थे तो बहुत   बहादुर लेकिन अधिकाँश घमंडी  थे और विस्तारवादी थे |आपस में लड़ते रहते थे |

 |चन्दा–लेकिन इससे गुलामी का क्या मतलब है?

रहमान -हमारी आपसी फूट का लाभ विदेशी हमलावरों  ने उठाया|हमारे सुन्दर स्वर्ग के सामान  प्रिय देश पर बाहरी हमले होते रहे और हम धीरे -धीरे गुलामी की और बढ़ते गए |

सलमा– सिकंदर ,महमूद ग़ज़नवी ,मोहम्मद गौरी ने जो हमले शुरू  किये तो फिर हमले बढ़ते ही गए |

रहमान–दिल्ली सल्तनत पर ,गुलाम वंश ,खिलजी वंश ,तुगलक वंश ,सैयद वंश और लोधी वंश काबिज़ होते रहे |

सलमा– फिर मुगलों  ने जो पैर  जमाये तो फिर तीन सौ साल तक उनका शासन देश में रहा |सत्ता के लिए भारी  संघर्ष  हुए खून खराबा हुआ लेकिन एक मिली जुली संस्कृति भी पनपी गंगा जमुनी तहज़ीब |पीर पैगंबरों, सूफी संतों ने जाति  धर्मों के मेल जोल   के लिए बहुत प्रयत्न किये |

रहमान –लेकिन भाग्य में एक गुलामी और लिखी थी |हमारे राजाओं की कायरता और  नबाबों की अकर्मण्यता से बाहर से एक विदेशी कम्पनी ईस्ट इंडिया कम्पनी    जो  इस देश में मात्र व्यापार करने आई थी इस देश की शासक बन बैठी |

चंदा– क्या !क्या भैया ,व्यापार करने आई कंपनी यहां की शासक बन गई ?कैसे हमारे राजे महाराजे नबाब शहंशाह इतने नाकारा थे ?

सलमा –अरे नहीं बहन चन्दा ,नाकारा नहीं थे ,मूर्ख थे निरा मूर्ख ,आपस में लड़ते थे |ईस्ट इंडिया कम्पनी ने इसी फूट का फायदा उठाया | |बांटो और राज्य करो की नीति अपनाई |दो बिल्लियों  और बंदर वाली कहानी सुनी है न |बस वैसे ही कुछ |पूरा देश हड़प लिया |

सूरज– लेकिन देश का  जन मानस जागृत था |क्रान्ति की चिंगारी राख के अंदर दबी हुई थी |गुलामी किसी को पसंद नहीं थी |आज़ादी के लिए आंदोलन पूरे  देश में हो रहे थे |अंग्रेजों का दमन चक्र जारी था |

सलमा–फिर भी  क्रांतिकारियों के हौसले बुलंद थे |महारानी लक्ष्मीबाई ने १८५७ की क्रांति में अपना बलिदान दे दिया |दिल्ली के बादशाह बहादुर शाह के नेतृत्व में कई राजाओं नवाबों ने अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा खोला लेकिन अंग्रेजों की भारी पल्टन और आधुनिक हत्यारों के आगे तीर तलवारों जैसे पुराने हथियारों से लड़नेवाले राजा पराजित हो गए |

सूरज–  राख में दबी हुई चिंगारी फिर भी सुलगती रही |नई चेतना, नई ऊर्जा   भगत सिंह चंद्र शेखर आज़ाद, बिस्मिल,राज गुरु सावरकर जैसे क्रांतिकारियों के रूप में उभरी |  हज़ारों युवा  जान की बाजी लगाकर देश में क्रांति का बिगुल फूँक रहे थे | 

रहमान — गांधीजी ने जो  अफ्रिका से अपनी वकालत छोड़कर अपने देश भारतवर्ष वापस आ  गए थे   देश की आज़ादी के लिए अहिंसक तरीके से आंदोलन छेड़ दिया   |

सलमा –इस तरह आज़ादी के लिए दो तरह से आंदोलन चल  पड़ा  |एक गांधी जी का अहिंसक आंदोलन और दूसरा सशस्त्र  क्रांतिकारी आंदोलन |

सूरज –आज़ादी  पाने के लिए सुभाषचंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फ़ौज बनाई   और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध खुला युद्ध छेड़ दिया |

रहमान –दूसरा  विश्व युद्ध प्रारम्भ हो चुका था |गांधीजी ने भारत छोडो आंदोलन की शुरुवात कर दी थी |करो या मरो के नारे के साथ जनता मैदान में थी |एक तरफ  सुभाष चंद्र बोस  की आज़ाद हिन्द फ़ौज  दूसरी तरफ भारत छोडो का अहिंसक आंदोलन |और सिर पर मंडरा रहा  विश्व युद्ध |ब्रिटिश हुकूमत को भागना ही पड़ा |और १५ अगस्त  १९४७ को हम आज़ाद हो गए |

सूरज –हमनें ब्रतानियाँ हुकूमत  का यूनियन जेक उतारकर  अपना तिरंगा  फहरा दिया |

रहमान –पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधान मंत्री बने  |

चंदा –सच में बड़ी दर्दनाक और रोचक है हमारी गुलामी और आज़ादी की कहानी |रहमान भैया, अब तो हम खुश हैं न ,आज़ादहैं,  स्वतंत्र हैं उत्साहित हैं  |

रहमान –हाँ बहन चंदा हम खुश हैं ,बहुत खुश |जहाँ हमें दो जून की रोटी भी मुहैया नहीं होती थी ,लोग भूखे पेट सोने को मजबूर थे वहीँ अब हम भरपूर अनाज उत्पन्न कर रहे हैं ||

सलमा– पहले जहां बड़े शहरों को छोड़कर सारे देश में अन्धकार छाया रहता था हम मिटटी के तेल की ढेबरी में पढ़ने के लिए मजबूर  थे आज गाँव- गाँव, शहर- शहर में बिजली है| खेतों में बिजली की मोटर है पम्प है |सिंचाई के भरपूर साधन हैं |

सूरज–देश की नदियों पर बड़े- बड़े बाँध बन चुके हैं |नहरों का जाल  बिछा है |पीने के पानी केलिए  हेंड पंप और नलों की व्यवस्था है|

रहमान –देश में  अच्छी रेल सेवायें उपलब्ध हैं ||

सलमा –अब गाड़ियां बिजली से चलती हैं |सस्ती हैं और समय भी बचता है |

सूरज –देश में सड़कों का जाल बिछ गया है |उत्तर दक्षिण गलियारा में जम्मू काश्मीर के श्रीनगर से कन्याकुमारी तक शानदार सड़क का निर्माण हो चुका  है|

रहमान –पूरब पश्चिम गलियारे में आसाम  के सिलचर से गुजरात के पोरबंदर तक सड़क का निर्माण हो चुका है |स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में देश के महानगर मुंबई चेन्नई कोलकाता और दिल्ली को आपस में जोड़ दिया गया है |

सूरज –हमारी तीनों सेनाएं देश की रक्षा करने में सक्षम हैं |हमारे पास परमाणु ताकत है |

रहमान –हमारे पास आधुनिकतम हथियार हैं |हम दुनियां  के दूसरे ताकतवर मुल्कों के समकक्ष खड़े हैं |हमारे पास मारक मिसाइलें हैं |जो पलक झपकते ही दूर बैठे दुश्मन देशों की सेना नेस्तनाबूद कर सकती हैं |

सलमा– हमारे पास अग्नि पृथ्वी जैसी सुपर सोनिक क्रूज़ मिसाइलें हैं |बोफोर्स तोप है|ब्रह्मोस बेलास्टिक मिसाइलें हैं   एंटीटेंक  गाइडेड मिसाइलें हैं |और राफेल जैसे लड़ाकू जहाज हवाई बेड़े  में शामिल हैं |

सूरज –और अभी अभी एस -४०० मिसाइल डिफेन्स सिस्टम भी हमारी वायु सेना को मिल रहा है |

सलमा –देश में बड़े- बड़े कारखाने चल रहे हैं  रोज मर्रा की सभी वस्तुएं  हमारे देश में बन रही है |संचार क्रांति के  असर से  पूरी दुनियां सिमटकर एक गाँव में तब्दील हो रही  है i इससे हमारा   देश अछूता नहीं रहा |  घर -घर मोबाइल टी, वी, कम्प्यूटर ने तो जैसे क्रांति ही ला दी है |

रहमान –अब देश में कच्चे खपरेल वाले घर नहीं बचे |सब घर पक्के हो गए |

सलमा –अब लोगों को शौचालय के लिए बाहर  नहीं जाना पड़ता |हर घर में पक्के शौचालय हैं |

सूरज –हम रूस और अमेरिका की तरह अंतरिक्ष में भी पैर जमा चुके हैं |हमारे उपकरण मंगल की  कक्षा  में पहुँचने में कामयाब हो चुके हैं |चंदमा पर पहुँचने को अब हम बेताब हैं |

रहमान — देश के लगभग हर घर में गैस चूल्हा  है और सिलेंडर है |

सूरज- देश  के हर गाँव में स्कूल है |घर- घर में टू व्हीलर है |अधिकाँश घरों में फोर   व्हीलर है |

रेहमान –सड़कें चमकदार हैं |वाहन दौड़  रहे हैं |दुकानों में भीड़ है |लोगों के पास पैसा है |

सलमा –अधिकाँश लोगों को मुफ्त अनाज मिल रहा है |ग़रीबों को बिजली मुफ्त मिल रही है |

रहमान –महिलायें सेना में भर्ती हो रहीं है |महिलायें हवाई जहाज उड़ा  रही हैं |

सलमा –महिलायें कुश्ती लड़ रही हैं ,टेनिस खेल रही हैं  बैटमिंटन खेल रहीं है ,और क्रिकेट भी खेल रही हैं |

सूरज –केवल खेल नहीं रहीं हैं स्वर्ण पदक जीत रहीं हैं |देश का नाम भी रोशन कर रहीं हैं |पुलिस में भी अपने जौहर दिखा रहीं हैं |कुशल प्रशासनिक अधिकारी भी बन रही हैं |

चंदा– क्या बात है सूरज भैया, रहमान भैया और सलमा दीदी ,मजा आ  गया|

लेकिन एक बात भूल रहें आप लोग ,स्मरण करो …..

सभी –क्या!  क्या ………?

चन्दा– कचरा गाडी अब घर-घर में आती है |

         कचरा रोज उठाकर   के ले जाती है  |

          सड़कों पर अब रोज बुहारी लगती है |

          सड़कें चांदी जैसी चम- चम करती हैं 

 वाह!क्या बात है चंदा,  [सब ताली बजाते हैं और उठकर खड़े हो जाते हैं|और गाते  हैं]-

आज़ादी के साल पचहत्तर होने तक ,

हमने भारत बिलकुल नया  बनाया है |

लिए तिरंगा  हाथों में हम दौड़ रहे  ,

जन-मन-गण हम सबने मिलकर गाया है|

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब मिलकर,

रहते बिलकुल भाई- भाई जैसे हैं |

नहीं गरीबी पूरे से मिट पाई है ,

फिर भी लोगों की जेबों में पैसे हैं | 

चलना हमनें नहीं कभी भी छोड़ा है ,

हम मंजिल की ओर बढे ही जाएंगे |

चलते -चलते हम मंजिल तक पहुंचेंगे ,

और अंत में विश्व गुरु कहलायेंगे |

                           [धीरे- धीरे पर्दा गिरता है| ]